दक्षिण अमेरिकी देश ब्राजील जल्द ही भारत को तुअर (अरहर) दाल का निर्यात शुरू करने वाला है। आने वाले कुछ महीनों में ब्राजील की तुअर भारतीय बाजार में उपलब्ध होने की उम्मीद है। इंडिया पल्सेस एंड ग्रेन्स एसोसिएशन (IPGA) की पहल पर ब्राजील के किसानों और निर्यातकों ने खास तौर पर भारतीय बाजार के लिए तुअर उगाना शुरू किया है।
दालों के शीर्ष व्यापारिक निकाय, इंडिया पल्सेस एंड ग्रेन्स एसोसिएशन (IPGA) के चेयरमैन बिमल कोठारी के अनुसार, भारत भारी मात्रा में तुअर का आयात जारी रखेगा और इस साल ब्राजील एक नए विकल्प के रूप में जुड़ेगा। उन्होंने बताया कि फाइटोसैनिटरी (वनस्पति स्वच्छता) से जुड़ी मंजूरी मिलने के बाद ब्राजील से तुअर आना शुरू हो जाएगी।
कोठारी ने कहा, हमने ब्राजील के किसानों और निर्यातकों से तुअर उगाने के लिए पहल की थी। अक्टूबर-नवंबर से शिपमेंट शुरू होने की संभावना है। इस साल मात्रा बहुत अधिक नहीं होगी, लगभग 20,000 से 30,000 टन। लेकिन अगले साल हमें ब्राजील से अच्छी मात्रा में तुअर मिलने की उम्मीद है।" हाल के वर्षों में ब्राजील ने भारत को उड़द और ब्राउन आई बीन्स (लोबिया की एक किस्म) का निर्यात भी शुरू किया है। उड़द के मामले में म्यांमार के बाद ब्राजील अब भारत के लिए दूसरा सबसे बड़ा स्रोत है। तुअर इस सूची में शामिल होने वाली नई दाल है।
आयात के ताज़ा आंकड़े
भारत अपनी जरूरत के लिए मोजाम्बिक, म्यांमार, तंजानिया, सूडान और मलावी जैसे देशों से तुअर का आयात करता है। वर्ष 2026 के पहले सात महीनों (जनवरी-जुलाई) में भारत का तुअर आयात 44 प्रतिशत बढ़कर 5.79 लाख टन हो गया, जो पिछले साल इसी अवधि में 4.01 लाख टन था।
इस दौरान मोजाम्बिक भारत को तुअर बेचने वाला सबसे बड़ा देश रहा, जिसने 2.18 लाख टन तुअर का निर्यात किया। इसके बाद म्यांमार से 1.35 लाख टन, तंजानिया से 1.04 लाख टन और सूडान से 68,499 टन तुअर भारत आई। वहीं, कैलेंडर वर्ष 2025 के दौरान भारत का कुल तूर आयात 5.42 प्रतिशत बढ़कर 13.25 लाख टन दर्ज किया गया था।
खरीफ 2026 में तुअर की बुवाई की स्थिति
ताजा आंकड़ों के अनुसार, खरीफ 2026 सीजन में तुअर की बुवाई लगभग 47.25 लाख हेक्टेयर में हुई है, जो पिछले साल 45.95 लाख हेक्टेयर थी। हालांकि, देश के प्रमुख उत्पादक राज्यों में इसका रकबा घटा है। कर्नाटक में बुवाई का क्षेत्र 6 प्रतिशत गिरकर 14.16 लाख हेक्टेयर (पिछले साल 15.33 लाख हेक्टेयर) रह गया। इसी तरह महाराष्ट्र में यह 1.5 प्रतिशत घटकर 12.02 लाख हेक्टेयर (पिछले साल 12.21 लाख हेक्टेयर) रह गया।
इसके विपरीत, उत्तर प्रदेश में बुवाई का रकबा 33 प्रतिशत बढ़कर 4.95 लाख हेक्टेयर और गुजरात में 11 प्रतिशत बढ़कर 3.3 लाख हेक्टेयर हो गया है। इसके अलावा तेलंगाना, आंध्र प्रदेश, झारखंड और छत्तीसगढ़ में भी तुअर की बुवाई में बढ़ोतरी देखी गई है।
सूखे की चिंता और कीमतों पर असर
वर्तमान खरीफ फसल पर कम बारिश का असर देखने को मिल रहा है। कमजोर मानसून के कारण कर्नाटक और महाराष्ट्र ने राज्य के कई इलाकों में सूखा घोषित कर दिया है। IPGA के चेयरमैन कोठारी के अनुसार, कर्नाटक और महाराष्ट्र जैसे प्रमुख राज्यों में कम बारिश से उत्पादन पर असर पड़ने की चिंताएं हैं। हालांकि कुछ अन्य राज्यों में बारिश हुई है, इसलिए अक्टूबर के मध्य तक फसल की असली स्थिति साफ हो पाएगी।
सूखे के कारण 2026 की फसल को नुकसान पहुंचने की इन्हीं चिंताओं को देखते हुए, सोमवार को देश की विभिन्न मंडियों में तुअर की कीमतों में 50-100 रुपये प्रति क्विंटल तक की बढ़ोतरी दर्ज की गई है।