मछली पालक किसान प्राकृतिक आपदाओं, बीमारियों के जोखिमों से बचने के लिए प्रधानमंत्री मत्स्य किसान समृद्धि सह-योजना के तहत जलीय कृषि बीमा का लाभ उठा सकते हैं। इस योजना के घटक 1-बी के तहत मछली पालकों को एक फसल चक्र के लिए बीमा पॉलिसी खरीदने पर सीधे उनके बैंक खाते में प्रोत्साहन राशि दी जाती है। यह लाभ राष्ट्रीय मत्स्य डिजिटल प्लेटफॉर्म के माध्यम से प्रदान किया जा रहा है।
सामान्य श्रेणी के किसानों को बीमा प्रीमियम की लागत का 40 प्रतिशत तक का प्रोत्साहन दिया जाता है। यह राशि अधिकतम 25,000 रुपये प्रति हेक्टेयर तय की गई है। कोई भी किसान अधिकतम 4 हेक्टेयर क्षेत्र (1,00,000 रुपये की अधिकतम सब्सिडी) तक के लिए यह लाभ ले सकता है। केज कल्चर, बायोफ्लॉक, रेसवे और आरएएस जैसी आधुनिक प्रणालियों के लिए भी प्रीमियम पर 40% की सब्सिडी दी जा रही है, जिसकी अधिकतम सीमा 1,00,000 रुपये (1,800 घन मीटर आकार तक) है। अनुसूचित जाति,अनुसूचित जनजाति और महिला लाभार्थियों को सामान्य श्रेणी की तुलना में 10 प्रतिशत का अतिरिक्त प्रोत्साहन दिया जाता है।
30 से 45 दिनों में होगा दावों का निपटान
योजना के तहत पारदर्शी और समयबद्ध दावा निपटान की व्यवस्था की गई है। सरकार के अनुसार, नुकसान होने पर किसान को तुरंत बीमा कंपनी को सूचित करना होगा। इसके बाद एक क्षति मूल्यांकनकर्ता नुकसान का आकलन करेगा। झींगा पालन के मामलों में दावों का निपटान 30 दिनों के भीतर और अन्य जलीय कृषि गतिविधियों के लिए 45 दिनों के भीतर पूरा करने का नियम तय किया गया है।
कौन सी कंपनियां दे रही हैं बीमा?
वर्तमान में चार प्रमुख सरकारी बीमा कंपनियां जलीय कृषि के लिए बीमा कवरेज दे रही हैं, जैसे ओरिएंटल इंश्योरेंस कंपनी लिमिटेड, एग्रीकल्चर इंश्योरेंस कंपनी ऑफ इंडिया लिमिटेड, न्यू इंडिया एश्योरेंस कंपनी लिमिटेड और यूनाइटेड इंडिया इंश्योरेंस कंपनी लिमिटेड शामिल है। सरकार के अनुसार, इस प्रणाली को और मजबूत करने के लिए निजी बीमा कंपनियों को भी इससे जोड़ने की प्रक्रिया चल रही है।
योजना की अब तक की प्रगति
आधिकारिक आंकड़ों के मुताबिक, इस बीमा पहल को लेकर किसानों में उत्साह देखा जा रहा है। अब तक 730.61 हेक्टेयर क्षेत्र के लिए 316 आवेदन प्राप्त हुए हैं। इनमें से 127 आवेदनों को मंजूरी दी जा चुकी है और 321.74 हेक्टेयर क्षेत्र के किसानों को कुल 40.03 लाख रुपये की प्रोत्साहन राशि वितरित की गई है।
योजना की आवश्यकता क्यों पड़ी?
भारत इस समय वैश्विक स्तर पर दूसरा सबसे बड़ा मछली उत्पादक देश है। वर्ष 2024-25 में देश का कुल मछली उत्पादन 19.8 मिलियन टन तक पहुंच गया है। सरकार के अनुसार, इस क्षेत्र से 3 करोड़ से अधिक लोगों की आजीविका जुड़ी है। हालांकि, बाढ़, चक्रवात, गर्मियों में होने वाली मत्स्य क्षति और बीमारियों के कारण किसानों को भारी आर्थिक नुकसान उठाना पड़ता है। कई बार एक फसल के नुकसान से छोटे किसान गहरे कर्ज में डूब जाते हैं।
इस योजना का लक्ष्य केवल सब्सिडी देना नहीं है, बल्कि एक ऐसा आत्मनिर्भर और भरोसेमंद बीमा बाजार तैयार करना है, जिससे छोटे और सीमांत मछली पालकों को नुकसान के समय तुरंत राहत मिल सके और उनका उत्पादन निर्बाध रूप से चलता रहे।