बिहार के पश्चिम चंपारण जिले के चनपटिया में जीविका और प्रथम एजुकेशन फाउंडेशन के सेकंड चांस कार्यक्रम के तहत 75 जीविका दीदियों ने मैट्रिक परीक्षा पास कर एक अनूठी मिसाल पेश की है। इनमें से 57 महिलाओं ने प्रथम श्रेणी हासिल की है। यह अभियान उन महिलाओं को शिक्षा की मुख्यधारा से जोड़ने के लिए है जो किसी कारणवश पढ़ाई पूरी नहीं कर पाई थीं।
18 से 50 वर्ष की महिलाओं ने पास की परीक्षा
वर्ष 2026 की परीक्षा के लिए कुल 85 महिलाओं ने पंजीकरण कराया था। इनमें से 79 महिलाओं ने मुजफ्फरपुर के परीक्षा केंद्र पर परीक्षा दी, जिनमें 75 सफल रहीं। इस अभियान में 18 वर्ष से लेकर 50 वर्ष तक की महिलाओं ने हिस्सा लिया। किसी की पढ़ाई पांच वर्ष पहले छूटी थी, तो किसी ने 20 वर्ष बाद दोबारा किताबें उठाईं। कई महिलाएं जीविका में सीएम (CM) पद पर भी कार्यरत हैं। उन्होंने घर-गृहस्थी और काम के साथ-साथ पढ़ाई जारी रखी।
दो वर्षों में अभियान ने पकड़ी रफ्तार
इस अभियान की नींव वर्ष 2024 में चनपटिया जीविका कार्यालय और प्रथम एजुकेशन फाउंडेशन के सहयोग से रखी गई थी। तब 30 महिलाएं परीक्षा में शामिल हुई थीं और 28 पास हुई थीं। वर्ष 2025 में इसे और गति मिली। महिलाओं से संपर्क करने के लिए जीविका समूहों, ग्राम संगठनों और संकुल संघों की बैठकों का सहारा लिया गया। इसके बाद 'बिहार मुक्त विद्यालयी शिक्षण एवं परीक्षा बोर्ड' के माध्यम से 85 महिलाओं का पंजीकरण हुआ। उन्हें ऑनलाइन व ऑफलाइन दोनों माध्यमों से एक वर्ष तक पढ़ाया गया और बोर्ड की ओर से निःशुल्क पुस्तकें दी गईं।
अब 500 महिलाओं का नया लक्ष्य
प्रखंड परियोजना प्रबंधक मनोज कुमार रजक के अनुसार, पिछली सफलताओं से प्रेरणा लेकर इस वर्ष अभियान का दायरा बढ़ाया जाएगा। इस वर्ष 500 महिलाओं का पंजीकरण कराकर उन्हें मैट्रिक परीक्षा दिलाने का लक्ष्य रखा गया है। इसके लिए जीविका समूहों और ग्राम संगठनों के जरिए निरंतर जागरूकता फैलाई जा रही है।