देशभर में चाय की नीलामी के लिए नए स्मार्ट डिजिटल प्लेटफॉर्म को पूरी तरह लागू करने से पहले उसकी तकनीकी और संचालन संबंधी खामियां दूर करने की मांग उठी है। टी ट्रेड एसोसिएशन ऑफ कोचिन (TTAC) ने टी बोर्ड से प्लेटफॉर्म की पूरी जांच और सफल परीक्षण के बाद ही इसे लागू करने को कहा है।
TTAC के अध्यक्ष अनिल जॉर्ज जोसेफ ने बिजनेस लाइन से कहा कि अब तक हुए मॉक ऑक्शन में कुछ ऐसी समस्याएं सामने आई हैं, जिन्हें प्लेटफॉर्म की शुरुआत से पहले ठीक करना जरूरी है। उन्होंने प्रमुख चाय कारोबार केंद्रों के ब्रोकर, खरीदार, विक्रेता और अन्य संबंधित पक्षों को शामिल कर बंद और व्यवस्थित मॉक नीलामी कराने की सिफारिश की।
उन्होंने कहा कि ऐसे परीक्षण से वास्तविक कारोबार जैसी परिस्थितियों में प्लेटफॉर्म की कमियों को पहचानने, उन्हें दूर करने और सिस्टम की पूरी तरह जांच करने में मदद मिलेगी। सभी संबंधित पक्षों के संतुष्ट होने और सिस्टम के भरोसेमंद साबित होने के बाद ही इसे देशभर में लागू किया जाना चाहिए।
सिर्फ पुरानी नीलामी को डिजिटल करना मकसद न हो
जोसेफ ने कहा कि नए प्लेटफॉर्म का उद्देश्य केवल पुरानी नीलामी व्यवस्था को डिजिटल रूप देना नहीं होना चाहिए। इससे देशभर के लिए ऐसा डिजिटल चाय बाजार तैयार किया जा सकता है, जिससे कारोबार में पारदर्शिता बढ़े, सही कीमत तय करने में मदद मिले और खरीदारों व विक्रेताओं की बाजार तक पहुंच बेहतर हो। उन्होंने यह बात TTAC की 34वीं वार्षिक आम बैठक में कही।
चाय बाजार में उतार-चढ़ाव जारी
चाय बाजार की स्थिति पर उन्होंने कहा कि 2025-26 का साल चुनौतीपूर्ण रहा। इस दौरान उत्पादन, गुणवत्ता, घरेलू खपत और निर्यात मांग में बदलाव के कारण चाय की कीमतों में उतार-चढ़ाव बना रहा।पश्चिम एशिया में तनाव के कारण निर्यात कारोबार प्रभावित हुआ। इसके अलावा माल ढुलाई और बीमा लागत बढ़ने, समुद्री मार्गों में व्यवधान और विदेशी खरीदारों की अनिश्चितता ने भी चाय उद्योग पर दबाव बढ़ाया।
फिलहाल उत्पादन कम रहने के कारण चाय की कीमतें उचित स्तर पर हैं। हालांकि, उद्योग के सामने जलवायु परिवर्तन से जुड़ा प्रतिकूल मौसम, कमजोर मांग और भू-राजनीतिक घटनाओं के कारण बढ़ी माल ढुलाई लागत जैसी चुनौतियां बनी हुई हैं।
जनवरी-जुलाई में उत्पादन 1.7% घटा
आंकड़ों के मुताबिक, जनवरी से जुलाई 2026 के बीच भारत में चाय उत्पादन 1.7 फीसदी घटा। दक्षिण भारत में गिरावट और अधिक रही और वहां उत्पादन 4.4 फीसदी कम हुआ। इस दौरान सबसे बड़ी चिंता चाय निर्यात को लेकर रही। जनवरी-जुलाई 2026 में भारत का चाय निर्यात 16 फीसदी से अधिक घट गया।
जोसेफ ने कहा कि ये आंकड़े दो बड़ी चुनौतियों की ओर इशारा करते हैं। एक तरफ बदलती जलवायु के कारण उत्पादन पर दबाव बढ़ रहा है, वहीं दूसरी तरफ अंतरराष्ट्रीय बाजार में भारत की स्थिति को और मजबूत करने की जरूरत है। उन्होंने उद्योग के लिए उत्पादकता बढ़ाने, जलवायु के अनुकूल खेती, बेहतर गुणवत्ता और लागत प्रतिस्पर्धा पर ध्यान देने की जरूरत बताई।
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