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पीएम-कुसुम योजना से किसानों की बढ़ेगी कमाई: सौर ऊर्जा से सिंचाई के साथ बिजली बेचकर भी कमा सकेंगे पैसा, जानें

गांव जंक्शन डेस्क, नई दिल्ली Published by: Mohammad Aamil Updated Thu, 29 Oct 2026 02:01 PM IST
सार

पीएम-कुसुम योजना के तहत किसान सोलर पंप से सिंचाई के साथ पात्रता के अनुसार सौर ऊर्जा संयंत्र लगाकर बिजली बेचने से अतिरिक्त कमाई कर सकते हैं। जानें योजना के फायदे और जरूरी बातें।

पीएम कुसुम योजना
पीएम कुसुम योजना - फोटो : गांव जंक्शन
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विस्तार
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देश में खेती के लिए सौर ऊर्जा का इस्तेमाल तेजी से बढ़ रहा है। अब किसान सिर्फ सोलर पंप से सिंचाई ही नहीं कर सकते, बल्कि खेत की अनुपयोगी जमीन पर सोलर बिजली संयंत्र लगाकर बिजली बेचने से भी अतिरिक्त कमाई कर सकते हैं। केंद्र सरकार की पीएम-कुसुम योजना इसी दिशा में किसानों को अवसर दे रही है। नवीकरणीय ऊर्जा कंपनी कोरिट एनर्जी एंड इंफ्रा के मुख्य कार्यकारी अधिकारी (सीईओ) मयूर मिश्रा के मुताबिक, देश में सिंचाई के लिए इस्तेमाल होने वाले करीब 3 करोड़ पंपों में से लगभग 88 लाख पंप डीजल से चलते हैं।

उनका दावा है कि पिछले एक दशक में सोलर पंपों का इस्तेमाल तेजी से बढ़ा है। हालांकि, उन्होंने सौर ऊर्जा से चलने वाले पंपों की सटीक संख्या नहीं बताई। मिश्रा ने बिजनेसलाइन से बातचीत में कहा कि शुरुआत में किसानों को सौर ऊर्जा अपनाने के लिए तैयार करना मुश्किल था, लेकिन अब किसान इसके फायदे समझने लगे हैं। उनके अनुसार, पिछले दशक की तुलना में सौर ऊर्जा अपनाने की रफ्तार दोगुनी हो गई है।

बंजर जमीन से भी होगी कमाई
केंद्र सरकार ने मार्च 2019 में प्रधानमंत्री किसान ऊर्जा सुरक्षा एवं उत्थान महाभियान (पीएम-कुसुम) योजना शुरू की थी। इसका उद्देश्य खेती में सौर ऊर्जा को बढ़ावा देना, किसानों को दिन में सिंचाई के लिए बिजली उपलब्ध कराना और उनकी अतिरिक्त आय के रास्ते खोलना है।

इस योजना के तहत पात्र किसान अपनी अनुपयोगी या बंजर जमीन पर सौर ऊर्जा संयंत्र लगाने की संभावनाएं तलाश सकते हैं। तय शर्तों और संबंधित बिजली कंपनी या राज्य सरकार की व्यवस्था के अनुसार, उत्पादित बिजली ग्रिड को बेचकर आमदनी की जा सकती है। मिश्रा के मुताबिक, देश में ऐसी काफी जमीन है, जहां खेती से अच्छी पैदावार नहीं मिलती। ऐसे में किसानों की पूरी आजीविका फसल पर निर्भर रहती है। सौर ऊर्जा संयंत्र किसानों के लिए कमाई का एक अतिरिक्त साधन बन सकते हैं।

तीन राज्यों में 100 मेगावाट की परियोजनाएं
कोरिट एनर्जी एंड इंफ्रा उत्तर प्रदेश, राजस्थान और पंजाब में कुल करीब 100 मेगावाट क्षमता की सौर ऊर्जा परियोजनाओं पर काम कर रही है। कंपनी का लक्ष्य अगले 12 महीनों में इन परियोजनाओं को पूरा करना है। कंपनी के सीईओ ने बताया कि अगले 18 महीनों में परियोजनाओं की कुल क्षमता बढ़ाकर 500 मेगावाट तक ले जाने की योजना है। कंपनी उत्तर प्रदेश, हरियाणा, पंजाब, राजस्थान, बिहार, दिल्ली, मध्य प्रदेश, छत्तीसगढ़ और महाराष्ट्र सहित कई राज्यों में सौर ऊर्जा परियोजनाओं से जुड़ी है।

किसानों को बैंक से कर्ज मिलने में आती है दिक्कत
पीएम-कुसुम योजना के तहत सौर ऊर्जा परियोजनाएं लगाने में किसानों के सामने एक बड़ी चुनौती बैंक से कर्ज हासिल करना है। मिश्रा के मुताबिक, कई किसानों के पास आयकर रिटर्न या संपत्ति से जुड़े ऐसे दस्तावेज नहीं होते, जिनके आधार पर बैंक आसानी से उन्हें बड़ा कर्ज दे सकें। उन्होंने बताया कि दो मेगावाट क्षमता की एक परियोजना लगाने में करीब 8 करोड़ रुपये खर्च हो सकते हैं। इतनी बड़ी रकम के लिए बैंक से कर्ज लेना किसानों के लिए मुश्किल हो जाता है।

ऐसी स्थिति में सौर ऊर्जा कंपनियां किसानों के साथ साझेदारी कर सकती हैं। इससे परियोजना तैयार करने और उसके लिए वित्तीय सहायता जुटाने में मदद मिलती है। योजना के तहत पात्र किसान साझेदारी या संयुक्त उद्यम के माध्यम से भी परियोजनाएं लगा सकते हैं।

बुंदेलखंड में सौर ऊर्जा की संभावनाएं
कंपनी के सीईओ के अनुसार, उत्तर प्रदेश में सौर ऊर्जा परियोजनाओं के लिए बुंदेलखंड का क्षेत्र उपयोगी साबित हो रहा है। झांसी जैसे इलाकों में जमीन के बड़े हिस्से उपलब्ध हैं, जहां खेती करना मुश्किल है। ऐसी जमीन पर सौर ऊर्जा संयंत्र लगाने की संभावनाएं तलाशी जा सकती हैं। हालांकि, किसी जमीन पर परियोजना लगाने से पहले उसकी पात्रता, बिजली ग्रिड से दूरी, जमीन के इस्तेमाल से जुड़े नियम और योजना की शर्तों की जांच जरूरी है।

सरकार से बिजली खरीद का भरोसा
मिश्रा के अनुसार, पीएम-कुसुम योजना में कंपनी की दिलचस्पी की एक वजह बिजली खरीद की व्यवस्था है। इस तरह की परियोजनाओं में संबंधित सरकारी एजेंसी या बिजली वितरण कंपनी के साथ तय समझौते के आधार पर बिजली बेची जाती है। इससे परियोजना की कमाई का अनुमान लगाने और बैंक से वित्तीय सहायता हासिल करने में मदद मिल सकती है। हालांकि, भुगतान और बिजली खरीद की शर्तें संबंधित समझौते पर निर्भर करती हैं।

खेती के अलावा उद्योगों में भी सौर ऊर्जा पर जोर
कंपनी कृषि क्षेत्र के साथ-साथ कपड़ा, ऑटोमोबाइल और इस्पात उद्योगों में भी सौर ऊर्जा परियोजनाओं का विस्तार करना चाहती है। मिश्रा ने बताया कि कंपनी पंजाब में एक इस्पात कंपनी के लिए 65 मेगावाट क्षमता की परियोजना पर काम कर रही है।

उन्होंने बैटरी ऊर्जा भंडारण प्रणाली (बीईएस) को भी भविष्य के लिए महत्वपूर्ण बताया। इस तकनीक में सौर ऊर्जा से बनी बिजली को बैटरी में जमा किया जा सकता है और जरूरत पड़ने पर इस्तेमाल किया जा सकता है। इससे रात के समय या बिजली की कमी होने पर ऊर्जा उपलब्ध कराने में मदद मिल सकती है।

किसानों के लिए क्या है खास?
पीएम-कुसुम योजना किसानों को सौर ऊर्जा के जरिए दो तरह से फायदा पहुंचाने का अवसर देती है। पहला, सोलर पंप से सिंचाई के लिए बिजली की व्यवस्था करना। दूसरा, योजना के संबंधित घटक और पात्रता के अनुसार सौर ऊर्जा संयंत्र लगाकर बिजली बेचने से अतिरिक्त आय हासिल करना।

हालांकि, योजना के सभी घटकों में लाभ, सब्सिडी और आवेदन की शर्तें एक जैसी नहीं हैं। किसानों को निवेश करने से पहले अपने राज्य के कृषि या ऊर्जा विभाग और संबंधित बिजली वितरण कंपनी से मौजूदा नियमों की जानकारी लेनी चाहिए।
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