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Arnab Bay Of Bengal New Storm Active Heavy Rain Alert Issued In Several States Including Uttar Pradesh
अर्नब के बाद बंगाल की खाड़ी में फिर हलचल: नया तूफान हो रहा एक्टिव, UP समेत कई राज्यों में भारी बारिश का अलर्ट
गांव जंक्शन डेस्क, नई दिल्ली
Published by: Mohammad Aamil
Updated Thu, 29 Oct 2026 01:50 PM IST
सार
चक्रवात अर्नब के बाद बंगाल की खाड़ी में नया कम दबाव का क्षेत्र बना है। IMD के अनुसार, शनिवार तक इसके मजबूत होने की संभावना है। जानें यूपी, मध्य प्रदेश और छत्तीसगढ़ में बारिश का ताजा अनुमान।
बंगाल की खाड़ी में चक्रवाती तूफान
- फोटो : AI Image
चक्रवात अर्नब के तट से टकराने के दो दिन बाद ही बंगाल की खाड़ी में एक और मौसमी सिस्टम बनने लगा है। भारत मौसम विज्ञान विभाग (IMD) के अनुसार, दक्षिण अंडमान सागर के पास कम दबाव का क्षेत्र बना है। इसके अगले दो दिनों में मजबूत होकर अवदाब (डिप्रेशन) में बदलने की संभावना है। इससे बंगाल की खाड़ी में एक बार फिर मौसम की गतिविधियां बढ़ सकती हैं।
इस बीच, चक्रवात अर्नब का असर मध्य भारत के कई हिस्सों में बना हुआ है। गुरुवार सुबह इसका कमजोर हुआ सिस्टम दक्षिण छत्तीसगढ़ और उससे सटे दक्षिण ओडिशा के ऊपर अवदाब के रूप में मौजूद था। इसका केंद्र छत्तीसगढ़ के जगदलपुर से करीब 20 किलोमीटर पश्चिम में था।
ओडिशा और आंध्र प्रदेश में भारी बारिश
चक्रवात के बचे हुए प्रभाव के कारण ओडिशा, तटीय आंध्र प्रदेश और यानम में भारी से बहुत भारी बारिश दर्ज की गई। गुरुवार सुबह 5:30 बजे तक पिछले 12 घंटों में कई इलाकों में अच्छी बारिश हुई।
- 9 सेंटीमीटर बारिश: ओडिशा के गोपालपुर और आंध्र प्रदेश के मछलीपट्टनम में।
- 7 सेंटीमीटर बारिश: ओडिशा के बालासोर और पारादीप बंदरगाह के साथ आंध्र प्रदेश के तुनी और अमरावती में।
- 6 सेंटीमीटर बारिश: क्योंझर और विशाखापत्तनम में।
- 5 सेंटीमीटर बारिश: झारसुगुड़ा में।
मौसम विभाग ने गुरुवार को पूर्वी उत्तर प्रदेश में कुछ स्थानों पर बहुत भारी बारिश की संभावना जताई है। वहीं, पूर्वी मध्य प्रदेश और छत्तीसगढ़ में कुछ जगहों पर भारी से बहुत भारी बारिश हो सकती है। शुक्रवार को पूर्वी उत्तर प्रदेश में भी कुछ स्थानों पर भारी बारिश का अनुमान है। IMD के मुताबिक, अर्नब का कमजोर हुआ सिस्टम उत्तर दिशा की ओर बढ़ेगा और गुरुवार शाम तक कम दबाव के स्पष्ट चिह्नित क्षेत्र में बदल सकता है।
समुद्र का तापमान बढ़ा रहा नए तूफान की संभावना
चक्रवात के बाद इतनी जल्दी नया कम दबाव का क्षेत्र बनना मौसम वैज्ञानिकों के लिए महत्वपूर्ण है। आम तौर पर चक्रवात के दौरान तेज हवाएं समुद्र के नीचे का ठंडा पानी ऊपर ले आती हैं। इससे समुद्र की सतह का तापमान घट सकता है और दूसरे चक्रवात के बनने के लिए अनुकूल परिस्थितियां कमजोर पड़ सकती हैं।
आमतौर पर समुद्र की सतह का तापमान 26.5 डिग्री सेल्सियस से अधिक होने पर चक्रवात बनने के लिए अनुकूल परिस्थितियां मिल सकती हैं। हालांकि, इसके लिए समुद्र में मौजूद गर्मी, हवा की दिशा और ऊंचाई पर हवा की गति जैसे दूसरे कारक भी अहम होते हैं।
गुरुवार सुबह की उपग्रह तस्वीरों के अनुसार, अंडमान-निकोबार द्वीप समूह और उससे लगे बंगाल की खाड़ी के पूर्व-मध्य हिस्से में समुद्र की सतह का तापमान करीब 30 डिग्री सेल्सियस था। बंगाल की खाड़ी के अन्य बड़े हिस्सों में भी तापमान लगभग 29 डिग्री सेल्सियस बना हुआ था। समुद्र का यह गर्म पानी नए मौसमी सिस्टम को ऊर्जा दे सकता है।
अनुमान है कि शुक्रवार तक दक्षिण अंडमान सागर के ऊपर कम दबाव का क्षेत्र और स्पष्ट हो सकता है। इसके बाद यह पश्चिम-उत्तर-पश्चिम दिशा में तमिलनाडु के उत्तरी तट और आंध्र प्रदेश की ओर बढ़ सकता है। शनिवार तक इसके दक्षिण-पूर्वी बंगाल की खाड़ी और आसपास के क्षेत्रों में अवदाब बनने की संभावना है।
हिंद महासागर की मौसमी परिस्थितियां भी अनुकूल
समुद्र के गर्म तापमान के अलावा हिंद महासागर में बन रही मौसमी परिस्थितियां भी नए सिस्टम को मजबूत कर सकती हैं। इस समय हिंद महासागर में सकारात्मक इंडियन ओशन डाइपोल (+IOD) की स्थिति उभरी है। यह समुद्र के अलग-अलग हिस्सों के तापमान में अंतर से जुड़ी मौसमी स्थिति है, जो हिंद महासागर के आसपास बारिश और वायुमंडलीय गतिविधियों को प्रभावित कर सकती है।
इसके साथ ही मैडेन-जूलियन ऑसिलेशन (MJO) की सक्रियता भी बढ़ने के संकेत हैं। यह उष्णकटिबंधीय क्षेत्रों में बादलों, बारिश और हवाओं से जुड़ी एक बड़ी मौसमी गतिविधि है, जो धीरे-धीरे भूमध्य रेखा के आसपास पूर्व दिशा में आगे बढ़ती है।
मौसम मॉडल के अनुमान के मुताबिक, यह गतिविधि अगले दो सप्ताह तक जारी रह सकती है और पूर्वी हिंद महासागर की ओर बढ़ सकती है। इससे क्षेत्र में बारिश और चक्रवात बनने के लिए अनुकूल परिस्थितियां बनी रह सकती हैं।
नवंबर में भी सक्रिय रह सकता है तूफानों का दौर
ऊपरी वायुमंडल में पूर्वी हवाओं का प्रभाव भी नए सिस्टम के बनने की प्रक्रिया को प्रभावित कर सकता है। मौसम मॉडल नवंबर के तीसरे सप्ताह में भी हिंद महासागर में ऐसी मौसमी गतिविधियों के दोबारा सक्रिय होने की संभावना जता रहे हैं।
अर्नब 26 अक्टूबर को बंगाल की खाड़ी के ऊपर बना था। इसके बाद अब एक नया कम दबाव का क्षेत्र विकसित हो रहा है। आने वाले दिनों में इसकी दिशा और ताकत से पता चलेगा कि समुद्र में तूफान बनने के लिए अनुकूल परिस्थितियां कितनी देर तक बनी रहती हैं।
प्रशांत महासागर में सुपर टाइफून इन-फा भी सक्रिय
इस बीच, उत्तर-पश्चिमी प्रशांत महासागर में सुपर टाइफून इन-फा भी सक्रिय है। यह फिलीपींस से लगभग 3,500 किलोमीटर पूर्व में खुले प्रशांत महासागर के ऊपर आगे बढ़ रहा है। इससे पहले सुपर टाइफून चांपी भी इसी क्षेत्र में सक्रिय था।
मौसम विशेषज्ञ इन-फा की दिशा पर नजर रख रहे हैं। शुरुआती अनुमान के अनुसार, यह आगे चलकर अपनी दिशा बदल सकता है और पूर्वी चीन सागर तक पहुंचने से पहले कमजोर पड़ सकता है। हालांकि, इसके खुले प्रशांत महासागर की ओर मुड़ने की संभावना भी है। इसकी आगे की दिशा आसपास बहने वाली हवाओं और वायुमंडलीय परिस्थितियों पर निर्भर करेगी। फिलहाल, इसका भविष्य का रास्ता निश्चित नहीं है।
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