भारत में सोयाबीन से बनने वाले खली उत्पाद यानी सोयामील का बचा हुआ स्टॉक नए तेल वर्ष 2026-27 की शुरुआत में बढ़कर 1.93 लाख टन रहने का अनुमान है। पिछले साल इसी समय यह स्टॉक 0.68 लाख टन था। यानी एक साल में इसमें दोगुने से भी ज्यादा बढ़ोतरी हुई है।
सोयाबीन प्रोसेसर्स एसोसिएशन ऑफ इंडिया (SOPA) के ताजा अनुमान के मुताबिक, 1 अक्टूबर 2026 तक देश में सोयाबीन का स्टॉक भी करीब 8 फीसदी बढ़कर 8.31 लाख टन हो गया। सोयामील का इस्तेमाल मुख्य रूप से पशु और मुर्गीपालन के चारे में प्रोटीन की मात्रा बढ़ाने के लिए किया जाता है।
महंगे दाम से सोयामील का निर्यात आधा हुआ
SOPA के अनुसार, 30 सितंबर को समाप्त हुए तेल वर्ष 2025-26 में भारत से सोयामील का निर्यात घटकर 10 लाख टन रह गया। पिछले तेल वर्ष में यह 20.23 लाख टन था। यानी निर्यात में करीब 50 फीसदी की गिरावट आई। निर्यात घटने की प्रमुख वजह घरेलू बाजार में सोयामील की ऊंची कीमतें मानी जा रही हैं। घरेलू बाजार में दाम अधिक होने से भारतीय सोयामील अंतरराष्ट्रीय खरीदारों के लिए कम प्रतिस्पर्धी हो गया।
पशु आहार और खाद्य क्षेत्र में बढ़ी खपत
निर्यात घटने के बावजूद देश में सोयामील की घरेलू खपत बढ़ी है। SOPA के आंकड़ों के अनुसार, 2025-26 में पशु आहार क्षेत्र में इसकी खपत बढ़कर 63 लाख टन हो गई, जो पिछले साल 62 लाख टन थी। वहीं, खाद्य क्षेत्र में सोयामील की खपत 8 लाख टन से बढ़कर 9 लाख टन हो गई। इसके बावजूद सोयामील का उत्पादन पिछले साल के 89.56 लाख टन से घटकर 83.25 लाख टन रह गया। इसकी प्रमुख वजह सोयाबीन की कम उपलब्धता रही।
सोयाबीन का उत्पादन भी घटने का अनुमान
SOPA के मुताबिक, तेल वर्ष 2025-26 में भारत का सोयाबीन उत्पादन 128.82 लाख टन से घटकर 110.26 लाख टन रह गया। हालांकि, इस दौरान सोयाबीन का आयात तेजी से बढ़ा। पिछले तेल वर्ष में भारत ने महज 0.02 लाख टन सोयाबीन का आयात किया था, जबकि 2025-26 में यह बढ़कर 11 लाख टन हो गया। भारत मुख्य रूप से अफ्रीका के कम विकसित देशों से गैर-आनुवंशिक रूप से संशोधित (नॉन-जीएम) सोयाबीन आयात करता है।
नए सीजन में भी उत्पादन घटने की आशंका
तेल वर्ष 2026-27 में भारत का सोयाबीन उत्पादन 107.90 लाख टन रहने का अनुमान है। यह पिछले वर्ष के 110.26 लाख टन के अनुमान से कम है। महाराष्ट्र और कर्नाटक के कुछ हिस्सों में सूखे जैसी परिस्थितियों का असर सोयाबीन उत्पादन पर पड़ा है। खास बात यह है कि इस साल सोयाबीन की बुवाई का क्षेत्र करीब 5 फीसदी बढ़कर 117.73 लाख हेक्टेयर हो गया, लेकिन इसके बावजूद उत्पादन में बढ़ोतरी की उम्मीद नहीं है।
इससे संकेत मिलता है कि खेती का रकबा बढ़ने के बावजूद मौसम की प्रतिकूल परिस्थितियां फसल की पैदावार को प्रभावित कर सकती हैं। सोयाबीन उत्पादन में कमी का असर आगे चलकर सोयामील की उपलब्धता, घरेलू कीमतों और निर्यात पर भी पड़ सकता है।
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