विज्ञापन
Home› Khabar Junction› Pm Kusum 2 0 Shivraj Expressed Concerns On Agrivoltaic Model Pralhad Joshi Said Concerns Will Be Resolved

PM KUSUM 2.0: शिवराज ने एग्रीवोल्टाइक मॉडल पर जताई चिंताएं, प्रल्हाद जोशी ने जल्द चिंताओं के समाधान की बात कही

गांव जंक्शन डेस्क, लखनऊ Published by: Devesh Saraswat Updated Thu, 05 Nov 2026 03:18 PM IST
सार

  • केंद्र सरकार PM कुसुम योजना के दूसरे चरण में एग्रीवोल्टेइक मॉडल को शामिल करने वाली है
  • इस मॉडल को लेकर कृषि मंत्रालय और दूसरे विभागों की कुछ चिंताएं सामने आई है
  • नवीन एवं नवीकरणीय ऊर्जा मंत्री प्रल्हाद जोशी ने जल्द इन चिंताओं को सुलझाने की बात कही है
  • कृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने बीते दिनों इस मॉडल को छोटे किसानों के अनुकुल बनाने पर जोर दिया था
  • उन्होंने तय करने के लिए कहा कि इस मॉडल से फसल उपज में नुकसान नहीं होना चाहिए
  • एग्रीवोल्टेइक मॉडल के तहत खेत में थोड़ी ऊंचाई पर सौलर पैनल लगाए जाते हैं और नीचे फसल उगती हैं।

नवीन और नवीकरणीय ऊर्जा मंत्री प्रल्हाद जोशी
नवीन और नवीकरणीय ऊर्जा मंत्री प्रल्हाद जोशी - फोटो : गांव जंक्शन
विज्ञापन

विस्तार
वॉट्सऐप चैनल फॉलो करें

केंद्र सरकार पीएम कुसुम योजना के दूसरे चरण में एग्रीवोल्टेइक को शामिल करने वाली है। एग्रीवोल्टेइक खेती का एक खास मॉडल है, जिसके तहत किसान खेत में फसल संग सौर उर्जा का उत्पादन भी करते हैं। इसके तहत खेत में थोड़ी ऊंचाई पर सोलर पैनल लगाए जाते हैं और नीचे खेती-बाड़ी का काम होता है। हालांकि इस मॉडल को लेकर कृषि मंत्रालय और दूसरे विभागों की चिंताएं सामने आई हैं। नवीन और नवीकरणीय ऊर्जा मंत्री प्रल्हाद जोशी ने कहा है कि इन चिंताओं को जल्द सुलझा लिया जाएगा। उन्होंने बताया कि किसानों, राज्य सरकारों और कृषि मंत्रालय की समस्याओं पर चर्चा जारी है और जल्द इस नीति को अंतिम रूप दिया जाएगा।

कृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने जताई थीं ये चिंताएं
बीते महीने कृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने एग्रीवोल्टेइक मॉडल को लेकर कई सवाल उठाए थे। कृषि मंत्री के अनुसार, भारत में 85 प्रतिशथ से ज्यादा किसान छोटे और सीमांत वाली श्रेणी में आते हैं। उन्होंने इस बात पर जोर दिया था कि सोलर मॉडल छोटे किसानों के खेतों के अनुकूल होना चाहिए और फसल उपज को नुकसान नहीं पहुंचना चाहिए।

कृषि मंत्री ने सुझाव दिया था कि खेतों में लगाए जाने वाले सोलर पैनलों की ऊंचाई, उनके खंभों के बीच की दूरी और ट्रैक्टर से जुताई करने की व्यवस्था को बहुत सावधानी से डिजाइन किया जाना चाहिए। इससे किसानों को अपनी जमीन पर बिना किसी परेशानी के खेती करने में मदद मिलेगी। साथ ही, यह व्यवस्था ऐसी होनी चाहिए कि किसान हर साल अपनी पसंद की अलग-अलग फसलें चुन सकें और बिना किसी रुकावट के अपने फसल चक्र में बदलाव कर सकें।

किसानों को नुकसान से बचाने के लिए तय होंगे नियम
इस नीति को जमीन पर उतारने से पहले किसानों की सुरक्षा सुनिश्चित करने पर भी जोर दिया गया है। कृषि मंत्री के अनुसार, योजना की शुरुआत से ही ऐसे नियम और जिम्मेदारियां तय होनी चाहिए कि अगर कोई कंपनी बीच में ही अपना प्रोजेक्ट छोड़कर चली जाती है, या फिर कॉन्ट्रैक्ट खत्म होने के बाद पैनल हटाने पड़ते हैं, तो इसका कोई भी आर्थिक या शारीरिक बोझ किसानों पर बिल्कुल न पड़े।

जल्द घोषित होगा पीएम कुसुम योजना का नया चरण
केंद्रीय मंत्री प्रल्हाद जोशी ने बताया कि पीएम कुसुम योजना का दूसरा चरण जल्द ही घोषित होने वाला है। इस नए चरण में ग्रामीण भारत के लिए सौर ऊर्जा पैदा करने का एक नया मॉडल तैयार किया जाएगा, जिसके जरिए किसान एक ही जमीन पर बिना कृषि उत्पादकता घटाए खेती भी कर सकेंगे और सौर ऊर्जा भी पैदा कर सकेंगे।


विज्ञापन
विज्ञापन