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Maize cultivation: मौसम की मार से मक्का की खेती बचाने की तैयारी, 35000 किसानों को मिलेगी नई तकनीक की ट्रेनिंग

गांव जंक्शन डेस्क, नई दिल्ली Published by: Mohammad Aamil Updated Thu, 05 Nov 2026 02:57 PM IST
सार

  • 35 हजार किसानों को प्रशिक्षण: महाराष्ट्र और मध्य प्रदेश के मक्का उत्पादक किसानों तक तीन साल में पहुंचने का लक्ष्य।

  • तीन बड़ी संस्थाएं साथ आईं: GIZ, पेप्सिको इंडिया और बायर ने HARVEST कार्यक्रम शुरू किया।

  • मिट्टी की सेहत सुधरेगी: खेतों की उर्वरता बनाए रखने वाली तकनीकों को बढ़ावा दिया जाएगा।

  • पानी और खाद की बचत: कृषि संसाधनों का बेहतर इस्तेमाल करना सिखाया जाएगा।

मक्का की फसल
मक्का की फसल - फोटो : सोशल मीडिया
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विस्तार
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मौसम में तेजी से हो रहे बदलाव का असर खेती पर भी पड़ रहा है। कहीं सूखा तो कहीं बेमौसम बारिश किसानों की फसलों को नुकसान पहुंचा रही है। ऐसे में मक्का किसानों को जलवायु बदलाव के असर से बचाने और खेती की लागत घटाने के लिए तीन बड़ी संस्थाओं ने हाथ मिलाया है। जर्मनी की विकास एजेंसी GIZ, पेप्सिको इंडिया और बायर के क्रॉप साइंस डिवीजन ने भारत में टिकाऊ खेती को बढ़ावा देने के लिए 'हार्वेस्ट' (HARVEST) नाम से नई साझेदारी शुरू की है।

इस पहल के तहत महाराष्ट्र और मध्य प्रदेश के मक्का उत्पादक क्षेत्रों में किसानों को मिट्टी की सेहत सुधारने, पानी का बेहतर इस्तेमाल करने और खेती के नए तरीकों की जानकारी दी जाएगी। तीन साल तक चलने वाले इस कार्यक्रम के जरिए 35 हजार किसानों तक पहुंचने और उन्हें प्रशिक्षण देने का लक्ष्य रखा गया है। यह कार्यक्रम जर्मनी के आर्थिक सहयोग और विकास मंत्रालय (BMZ) की ओर से संचालित develoPPP कार्यक्रम के तहत शुरू किया गया है। इसमें भारतीय मक्का अनुसंधान संस्थान (IIMR) भी शोध और तकनीकी सहयोग देगा।

क्या है HARVEST कार्यक्रम?
HARVEST का पूरा नाम Holistic Agricultural Climate Resilience and Versatile Ecosystem Strengthening Techniques है। इसका उद्देश्य मक्का आधारित खेती को मौसम के बदलावों के प्रति अधिक मजबूत और टिकाऊ बनाना है।

इसके तहत किसानों को ऐसी कृषि पद्धतियां अपनाने के लिए प्रोत्साहित किया जाएगा, जिनसे मिट्टी की उर्वरता बनी रहे, पानी और खाद का सही इस्तेमाल हो तथा मौसम की मार से फसल को होने वाले नुकसान का खतरा कम किया जा सके।

मिट्टी की सेहत सुधारने और पानी बचाने पर जोर
इस कार्यक्रम में प्राकृतिक संसाधनों को बचाने वाली खेती यानी पुनर्योजी कृषि (Regenerative Agriculture) को बढ़ावा दिया जाएगा। इसके तहत खेतों में मिट्टी की सेहत सुधारने, पानी की बचत करने और फसलों में विविधता लाने पर काम होगा।

कार्यक्रम के प्रमुख कामों में शामिल हैं
  • मिट्टी की सेहत सुधारना : मिट्टी की गुणवत्ता और उर्वरता बनाए रखने वाली कृषि पद्धतियों को बढ़ावा देना।
  • पानी की बचत : सिंचाई के पानी और दूसरे कृषि संसाधनों का बेहतर इस्तेमाल करना।
  • फसल विविधीकरण : मक्का के साथ दूसरी उपयुक्त फसलें उगाने के लिए किसानों को प्रोत्साहित करना।
  • खेती की लागत घटाना : खाद और दूसरे कृषि संसाधनों का जरूरत के अनुसार इस्तेमाल करना।
  • मौसम के जोखिम से बचाव : जलवायु बदलाव के अनुसार खेती के तरीकों में सुधार करना।

आलू के बाद अब मक्का की खेती पर साथ आएंगी कंपनियां
पेप्सिको और बायर पिछले दो दशक से भारत में आलू की खेती और उसकी आपूर्ति से जुड़ी गतिविधियों में साथ काम कर रहे हैं। अब इस साझेदारी में GIZ भी शामिल हो गई है। तीनों संस्थाएं मिलकर मक्का की खेती को अधिक टिकाऊ बनाने पर काम करेंगी।

पेप्सिको इंडिया के वरिष्ठ निदेशक और इंडिया मार्केट सप्लाई ऑफिसर अशोक राय ने कहा कि कंपनी ने भारत में आलू की खेती के दौरान कृषि साझेदारी और मिट्टी की सेहत सुधारने के क्षेत्र में काम किया है। अब इसी अनुभव का इस्तेमाल मक्का की खेती में किया जाएगा। इसका उद्देश्य किसानों को ऐसी खेती अपनाने में मदद करना है, जिससे मिट्टी की सेहत सुधरे और पानी जैसे संसाधनों का बेहतर इस्तेमाल हो सके।

GIZ इंडिया और भूटान की कंट्री डायरेक्टर उलरिके एबेलिंग ने कहा कि इस साझेदारी में तीनों संस्थाओं का अनुभव और तकनीकी विशेषज्ञता एक साथ आएगी। इससे किसानों की आजीविका बेहतर बनाने और कृषि उत्पादों की पूरी आपूर्ति व्यवस्था को टिकाऊ बनाने में मदद मिलेगी।

वहीं, बायर के क्रॉप साइंस डिवीजन के कंट्री डिविजनल हेड साइमन वीबुश ने कहा कि टिकाऊ खेती को बड़े स्तर पर अपनाने के लिए पर्यावरण संरक्षण के साथ किसानों की आर्थिक स्थिति का भी ध्यान रखना जरूरी है। इसके लिए वैज्ञानिक जानकारी, नई तकनीक और किसानों के प्रशिक्षण को एक साथ जोड़ना होगा।

किसानों को नई तकनीक अपनाने में मिलेगी मदद
HARVEST कार्यक्रम का एक बड़ा उद्देश्य किसानों को टिकाऊ खेती अपनाने के लिए जरूरी जानकारी और प्रशिक्षण देना है। इसके तहत किसानों को खेतों में नई कृषि पद्धतियों को देखने, समझने और उनके परिणामों का आकलन करने का अवसर भी मिलेगा।

कार्यक्रम के जरिए यह समझने की कोशिश की जाएगी कि पुनर्योजी खेती अपनाने में किसानों के सामने क्या चुनौतियां आती हैं और उन्हें किस तरह कम किया जा सकता है। इससे महाराष्ट्र और मध्य प्रदेश के मक्का उत्पादक किसानों को खेती के ऐसे तरीके अपनाने में मदद मिलने की उम्मीद है, जो लंबे समय तक मिट्टी और पानी की सेहत बनाए रखने के साथ उनकी आजीविका को भी मजबूत कर सकें।
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