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Four Countries Monitor Fish In Bay Of Bengal Providing Assistance Through Ocean Weather Data
मछुआरों के लिए बड़ी पहल: बंगाल की खाड़ी में मछलियों पर नजर रखेंगे 4 देश, समुद्र-मौसम के आंकड़ों से मिलेगी मदद
गांव जंक्शन डेस्क, नई दिल्ली
Published by: Mohammad Aamil
Updated Thu, 05 Nov 2026 03:12 PM IST
सार
भारत, श्रीलंका, बांग्लादेश और मालदीव ने BOB-NOR नेटवर्क शुरू किया है। इससे बंगाल की खाड़ी में मछलियों की उपलब्धता और समुद्र के बदलते हालात का अध्ययन होगा।
भारत, श्रीलंका, बांग्लादेश और मालदीव ने बंगाल की खाड़ी में मछलियों की संख्या और उनके बदलते व्यवहार पर नजर रखने के लिए हाथ मिलाया है। चारों देश समुद्री वैज्ञानिकों और शोधकर्ताओं के साथ मिलकर एक क्षेत्रीय नेटवर्क बनाएंगे। इसका उद्देश्य समुद्र, मौसम और मछलियों से जुड़े आंकड़ों को एक साथ जोड़कर मछली पालन और मत्स्य प्रबंधन को बेहतर बनाना है।
समुद्र, मौसम और मछलियों के आंकड़े होंगे एक साथ
इस पहल के तहत 'बे ऑफ बंगाल नेटवर्क ऑफ ओशन रिसर्चर्स फॉर फिशरीज' (BOB-NOR) की शुरुआत की गई है। यह नेटवर्क समुद्र में होने वाले बदलावों और मछलियों की उपलब्धता के बीच संबंधों का अध्ययन करेगा। इसकी शुरुआत भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद (ICAR) के केंद्रीय समुद्री मत्स्य अनुसंधान संस्थान (CMFRI) की मेजबानी में आयोजित एक अंतरराष्ट्रीय बैठक में हुई।
यह बैठक मत्स्य पालन और रिमोट सेंसिंग पर आयोजित अंतरराष्ट्रीय संगोष्ठी के दौरान हुई। इसमें चारों देशों के प्रतिनिधियों के अलावा अमेरिका, ब्राजील, चिली, पुर्तगाल, ब्रिटेन और ग्रीस के समुद्री वैज्ञानिकों ने भी हिस्सा लिया।
समुद्र के तापमान और मानसून का होगा अध्ययन
BOB-NOR नेटवर्क के तहत उपग्रहों से मिलने वाली जानकारी, समुद्र के सर्वेक्षण, मौसम से जुड़े संकेतों और मछलियों के आंकड़ों को एक साथ जोड़ा जाएगा। वैज्ञानिक यह पता लगाएंगे कि समुद्र के तापमान, मानसून, खारेपन और समुद्री धाराओं में बदलाव का मछलियों पर क्या असर पड़ता है।
इससे यह समझने में मदद मिलेगी कि मछलियां किस क्षेत्र में जा रही हैं, उनके प्रजनन और संख्या में कितना बदलाव हो रहा है और किन इलाकों में मछलियों की उपलब्धता बढ़ या घट रही है। इस पहल का उद्देश्य केवल मछलियों की मौजूदा संख्या और पकड़ के आंकड़ों पर निर्भर रहने के बजाय वैज्ञानिक जानकारी के आधार पर भविष्य का अनुमान लगाना है। इससे मत्स्य प्रबंधन की बेहतर योजनाएं बनाने में मदद मिलेगी।
मछुआरों को समय पर मिल सकेंगी वैज्ञानिक सलाह
बंगाल की खाड़ी कार्यक्रम अंतर-सरकारी संगठन (BOBP-IGO) के निदेशक पी. कृष्णन ने कहा कि BOB-NOR समुद्र से जुड़े शोध और मत्स्य प्रबंधन के बीच की दूरी कम करेगा। इसके जरिए बंगाल की खाड़ी से जुड़े देशों के वैज्ञानिक और विशेषज्ञ मिलकर काम करेंगे। साथ ही समुद्र से मिलने वाली जानकारी का इस्तेमाल मछली पकड़ने और मत्स्य प्रबंधन से जुड़े फैसलों में किया जा सकेगा।
केंद्रीय मत्स्य विभाग की संयुक्त सचिव सुरभि राय ने कहा कि बंगाल की खाड़ी क्षेत्र में शुरू की गई यह पहल दुनिया के दूसरे हिस्सों के लिए भी वैज्ञानिक आंकड़ों के आधार पर मत्स्य प्रबंधन का उदाहरण बन सकती है।
भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद (ICAR) की पूर्व उप महानिदेशक बी. मीनाकुमारी ने कहा कि समुद्र की बदलती परिस्थितियों को देखते हुए आंकड़ों पर आधारित प्रबंधन जरूरी है। समुद्र की सतह के तापमान जैसे अहम संकेतकों के आधार पर मछुआरों को समय पर और भरोसेमंद सलाह मिलनी चाहिए, ताकि वे मछली पकड़ने से जुड़े बेहतर फैसले ले सकें। आयोजन केंद्रीय मत्स्य विभाग ने GEO Blue Planet और Trevor Platt Science Foundation के सहयोग से किया।
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