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Himachal Apple: लाहौल के सेब ने मचाई धूम, 20 किलो की पेटी 1500 रुपये तक बिकी, 90% तुड़ान पूरी

गांव जंक्शन डेस्क, नई दिल्ली Published by: Mohammad Aamil Updated Thu, 05 Nov 2026 03:40 PM IST
सार

लाहौल घाटी में सेब की 90 फीसदी तुड़ान पूरी हो चुकी है। इस बार 20 किलो की पेटी के 1,300 से 1,500 रुपये तक दाम मिले हैं। जानें सेब उत्पादन का हाल।

सांकेतिक तस्वीर
सांकेतिक तस्वीर - फोटो : सोशल मीडिया
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विस्तार
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हिमाचल प्रदेश की लाहौल घाटी में इस बार सेब का सीजन बागवानों के लिए अच्छा रहा है। बाजार में सेब की 20 किलो की पेटी 1,300 से 1,500 रुपये तक बिकी है। बागवानों को मिले अच्छे दाम से वे संतुष्ट हैं। घाटी में सेब की करीब 90 फीसदी तुड़ान पूरी हो चुकी है। अब बागवान सेब की ग्रेडिंग और पैकिंग में जुटे हैं।

इस बार शिमला और कुल्लू में सेब की पैदावार कम रहने का फायदा लाहौल के बागवानों को मिला है। स्थानीय बागवान राहुल ठाकुर, महेंद्र और सुरेश कुमार का कहना है कि लाहौल का सेब गुणवत्ता के मामले में बेहतर है। इसका छिलका मोटा और फल रसदार होता है। इस वजह से इसे लंबे समय तक सुरक्षित रखा जा सकता है।

1,000 हेक्टेयर से ज्यादा क्षेत्र में हो रही सेब की खेती
बागवानी विभाग के अनुसार, लाहौल घाटी में सेब की खेती का दायरा लगातार बढ़ रहा है। शुरुआती वर्षों में यहां करीब 450 हेक्टेयर क्षेत्र में सेब की खेती होती थी और उत्पादन लगभग 125 मीट्रिक टन था। अब हर साल करीब 60 हजार नए पौधे लगाए जा रहे हैं। इससे लगभग 120 हेक्टेयर क्षेत्र में बागवानी का विस्तार हो रहा है।

वर्तमान में घाटी का पट्टन क्षेत्र सेब उत्पादन के प्रमुख केंद्र के रूप में उभरा है। यहां सेब की खेती का कुल रकबा 1,000 हेक्टेयर से अधिक हो गया है। वहीं, सालाना उत्पादन करीब 3,000 से 4,000 मीट्रिक टन तक पहुंच गया है।

बदलते मौसम से बढ़ रहा सेब की खेती का दायरा
जलवायु परिवर्तन के कारण लाहौल के उन इलाकों में भी सेब की खेती संभव हो रही है, जहां पहले इसे उगाने के लिए अनुकूल नहीं माना जाता था। इससे घाटी में सेब उत्पादन का क्षेत्र लगातार बढ़ रहा है। एपीएमसी कुल्लू एवं लाहौल-स्पीति के सचिव दीक्षित जरियाल ने बताया कि घाटी में सेब सीजन अब अंतिम दौर में है। करीब 10 फीसदी तुड़ान बाकी है।
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