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Palm Oil: पाम ऑयल पर दोहरी मार, मलेशिया में बढ़ा स्टॉक तो भारत की खरीद पड़ी सुस्त

गांव जंक्शन डेस्क, नई दिल्ली Published by: Mohammad Aamil Updated Thu, 24 Sep 2026 03:54 PM IST
सार

मलेशिया में पाम ऑयल का स्टॉक सितंबर के अंत तक 30 लाख टन के पार पहुंचने का अनुमान है। वहीं भारत में खरीद धीमी पड़ने से कीमतों पर दबाव बना हुआ है। अक्टूबर से उत्पादन घटने पर बाजार को राहत मिल सकती है।
 

पाम ऑयल का पेड़
पाम ऑयल का पेड़ - फोटो : सोशल मीडिया
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मलेशिया में पाम ऑयल का स्टॉक बढ़ने और भारत में इसकी खरीद धीमी पड़ने से आने वाले दिनों में पाम ऑयल की कीमतों पर दबाव बना रह सकता है। उद्योग से जुड़े अधिकारियों के मुताबिक, इस समय बाजार में मांग की तुलना में उपलब्धता ज्यादा है। वहीं, अल नीनो के कारण पड़ने वाले मौसम के असर का भी अभी पाम ऑयल उत्पादन पर साफ असर नहीं दिखा है।

मलेशिया में स्टॉक 30 लाख टन के पार जाने की उम्मीद
मलेशिया दुनिया का दूसरा सबसे बड़ा पाम ऑयल उत्पादक देश है। यहां अल नीनो के कारण सामान्य से कम बारिश हुई है, लेकिन सितंबर में पाम ऑयल का उत्पादन पिछले महीने की तुलना में बढ़ गया।उद्योग अधिकारियों का अनुमान है कि सितंबर के अंत तक मलेशिया में पाम ऑयल का भंडार 30 लाख मीट्रिक टन से अधिक हो सकता है।

अगस्त में स्टॉक करीब 28.2 लाख मीट्रिक टन था, जो आठ महीने का सबसे ऊंचा स्तर था। इंटरनेशनल फूडस्टफ्स कंपनी (IFFCO) के ट्रेडिंग और खरीद विभाग के महाप्रबंधक ताजगीर रहमान ने कहा कि सितंबर के अंत तक स्टॉक 30 लाख टन से ऊपर पहुंच सकता है। इससे कीमतों पर दबाव बढ़ सकता है।

उत्पादन बढ़ने और निर्यात घटने से बढ़ा स्टॉक
मलेशिया में सितंबर पाम ऑयल उत्पादन के लिहाज से प्रमुख महीनों में शामिल है। इस दौरान उत्पादन बढ़ने और निर्यात धीमा होने से स्टॉक में इजाफा हुआ है। मलेशियन पाम ऑयल एसोसिएशन के मुख्य कार्यकारी रॉसलिन अजमी हसन के मुताबिक, सितंबर में उत्पादन बढ़ने और निर्यात घटने से स्टॉक बढ़ा है। सर्वे एजेंसियों के आंकड़ों के अनुसार, इस महीने के शुरुआती 20 दिनों में मलेशिया से पाम ऑयल का निर्यात पिछले महीने की समान अवधि की तुलना में 25 प्रतिशत तक घटा है।

अक्टूबर से घट सकता है स्टॉक
अधिकारियों का कहना है कि अक्टूबर के आसपास मलेशिया में पाम ऑयल का उत्पादन कम होना शुरू हो सकता है। इसके बाद स्टॉक में भी कमी आने की संभावना है। हालांकि, स्टॉक कितनी तेजी से घटेगा, यह भारत और चीन जैसे बड़े बाजारों की मांग पर निर्भर करेगा।

भारत में पाम ऑयल की खरीद धीमी पड़ सकती है
भारत दुनिया का सबसे बड़ा वनस्पति तेल आयातक है। सनविन ग्रुप के मुख्य कार्यकारी संदीप बजोरिया के मुताबिक, अगस्त और सितंबर में भारत ने बड़ी मात्रा में पाम ऑयल खरीदा है। ऐसे में अक्टूबर से भारत की पाम ऑयल खरीद कम हो सकती है।

नई दिल्ली के एक वैश्विक ट्रेडिंग कंपनी से जुड़े कारोबारी के अनुसार, सोयाबीन तेल और सूरजमुखी तेल की तुलना में पाम ऑयल का कीमत अंतर कम हुआ है। इसके चलते भारतीय खरीदार पाम ऑयल की जगह दूसरे खाद्य तेलों को प्राथमिकता दे रहे हैं।

अल नीनो का असर देर से दिखेगा
मौसम विशेषज्ञों के अनुसार इस साल अल नीनो काफी मजबूत है। इसके कारण मलेशिया में मौसम ज्यादा सूखा रहा है। हालांकि, इसका असर अभी पाम ऑयल की पैदावार पर स्पष्ट रूप से दिखाई नहीं दिया है। पाम के पेड़ों की पैदावार पर मौसम का असर आमतौर पर कुछ समय बाद दिखाई देता है। अधिकारियों के मुताबिक, अल नीनो के कारण सूखे मौसम का असर 2027 के मध्य से स्पष्ट हो सकता है।

उत्पादन घटा तो कीमतों में तेजी संभव
IFFCO के ताजगीर रहमान के मुताबिक, आने वाले समय में कीमतों में बड़ी गिरावट की संभावना सीमित है। जैसे ही मलेशिया में उत्पादन घटने और निर्यात बढ़ने के संकेत मिलेंगे, पाम ऑयल की कीमतों में फिर तेजी आ सकती है। अभी बाजार में मलेशिया का बढ़ता स्टॉक और भारत की धीमी खरीद कीमतों पर दबाव बना रहे हैं, जबकि अक्टूबर से उत्पादन में संभावित गिरावट कीमतों को सहारा दे सकती है।
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