खरीफ 2026-27 में धान की प्रीमियम किस्म (Premium Paddy) उगाने वाले किसानों को MSP से कम से कम एक हजार रुपये प्रति क्विंटल ज्यादा भाव मिल रहा है। आगामी महीनों में सोना मसूरी और कोलम जैसी चावल किस्मों का बाजार भाव तेजी पकड़ सकता है।
किसानों को मिल रहा बंपर मुनाफा
बाजार जानकारों के अनुसार, इस समय धान किसानों को प्रीमियम किस्म के लिए 3,600 से 3,700 रुपये प्रति क्विंटल तक का दाम मिल रहा है, जो सरकारी एमएसपी और राज्यों के बोनस से करीब एक हजार रुपये ज्यादा है। उनका कहना है कि किसानों ने इतनी बढ़त पहले कभी नहीं देखी है।
मंडियों में 5,200 तक पहुंचा धान का दाम
आंध्र प्रदेश के बापटला जिले की कई मंडियों में धान का मॉडल दाम 3,600 से 4,500 रुपये प्रति क्विंटल दर्ज किया गया है। वहीं, कर्नाटक की अधिकांश मंडियों में धान के दाम 3,000 रुपये से अधिक और 5,200 रुपये तक बोले जा रहे हैं। जबकि सरकार ने इस साल ग्रेड-ए धान का एमएसपी 2,461 रुपये तय किया है।
कर्नाटक में कम बारिश से कतरनी और सरवती किस्मों की मांग बढ़ी
बाजार में अल नीनो के प्रभाव का डर बना हुआ है। कर्नाटक में मानसूनी की कमी के कारण आधी फसल में देरी हुई है और जलाशयों का जलस्तर कम होने से पेयजल को प्राथमिकता मिल सकती है। कर्नाटक की इस कमी के कारण बिहार के कतरनी और उत्तर प्रदेश की सरवती या नेल्लोर सन्ना जैसी प्रीमियम किस्मों की मांग और कीमतें बढ़ गई हैं, जो कोलम चावल के विकल्प के रूप में 3,300 रुपये से ऊपर बिक रही हैं। इसके अलावा, बंगाल जैसे राज्यों में भी बेहतर रिटर्न के चलते किसानों ने सोना मसूरी के बजाय गोविंद भोग धान की ओर रुख किया है।
उत्पादन गिरा, सोना मसूरी-कोलम धान हुआ महंगा
रिपोर्ट के अनुसार, कर्नाटक, आंध्र प्रदेश और तेलंगाना के कुछ हिस्सों में उत्पादन पर असर पड़ने से सोना मसूरी और कोलम जैसी धान किस्में महंगी हुई हैं।
चावल की कीमत घंटों के हिसाब से बदल रहीं
चावल निर्यातकों के अनुसार, चावल मिलें की ओर से मिलने वाला दाम मात्र 6 घंटे के लिए मान्य है, क्योंकि दाम हर घंटे बदल रही हैं। दूसरी तरफ द राइस एक्सपोर्टर्स एसोसिएशन के अध्यक्ष बी.वी. कृष्णा राव का कहना है कि यह आपसी संबंधों और बातचीत पर निर्भर करता है और यह अवधि 24 घंटे से अधिक भी हो सकती है।
घरेलू भाव और निर्यात कीमतों में तेजी
निर्यातकों के अनुसार, पिछले कुछ हफ्तों में सामान्य उबले चावल (parboiled rice) की कीमत 100 रुपये बढ़कर 3,550 रुपये प्रति क्विंटल हो गई है, जबकि सफेद चावल की कीमत बढ़कर 3,350 रुपये प्रति क्विंटल हो गई है। उबला चावल (5% टूटा) 395 डॉलर प्रति टन और सफेद चावल 380 डॉलर प्रति टन से ऊपर बोला जा रहा है।
उत्पादन में गिरावट और सरकारी स्टॉक
अनुमान है कि इस साल भारत का खरीफ चावल उत्पादन पिछले साल के 123.93 मिलियन टन से कम से कम 10 मिलियन टन कम रह सकता है। अल नीनो के कारण कम मानसून से धान का रकबा भी कम से कम चार प्रतिशत घटकर 426.81 लाख हेक्टेयर रह गया है।
इसके बावजूद, भारतीय खाद्य निगम (FCI) के पास 1 सितंबर तक आपातकालीन और कल्याणकारी योजनाओं के लिए 39.05 मिलियन टन चावल का रिकॉर्ड स्टॉक मौजूद था, साथ ही धान का भी अच्छा स्टॉक है जिससे 30.75 मिलियन टन चावल मिल सकता है। विशेषज्ञों का मानना है कि किसानों के लिए यह एक अस्थायी लाभ है, लेकिन सरकार को किसान की आय और उपभोक्ता की कीमतों के बीच संतुलन बनाने के लिए बाजार में हस्तक्षेप करते समय सावधानी बरतनी होगी।