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रिसर्च बिना दालों में आत्मनिर्भरता कैसे? : 1 साल में शोध परियोजनाओं को मंजूरी नहीं, कृषि मंत्रालय ने क्या कहा?

गांव जंक्शन डेस्क, नई दिल्ली Published by: Devesh Saraswat Updated Tue, 20 Oct 2026 11:23 AM IST
सार

  • दलहन में आत्मनिर्भरता मिशन का पहला साल पूरा, लेकिन 500 करोड़ रुपये के रिसर्च फंड से अब तक किसी प्रोजेक्ट को मंजूरी नहीं मिली।
  • रिसर्च का उद्देश्य ऐसी जलवायु-अनुकूल दलहन किस्में विकसित करना है, जो किसानों को अधिक उपज दे सकें।
  • कैबिनेट सचिवालय ने कृषि मंत्रालय को 15 नवंबर से पहले रिसर्च प्रोजेक्ट्स की मंजूरी की प्रक्रिया पूरी करने का निर्देश दिया है।
  • मिशन के तहत 2030-31 तक दलहन उत्पादन 242 लाख टन से बढ़ाकर 350 लाख टन करने का लक्ष्य रखा गया है।

दलहन आत्मनिर्भरता मिशन की सफलता में शोध काफी मायने रखता है।
दलहन आत्मनिर्भरता मिशन की सफलता में शोध काफी मायने रखता है। - फोटो : AI
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विस्तार
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भारत दालों की घरेलू मांग को पूरा करने के लिए विदेश पर निर्भर है। इस निर्भरता से निपटने के लिए सरकार दलहन आत्मनिर्भरता मिशन चला रही है। शोध इस मिशन का प्रमुख स्तंभ है। सरकार ने भी मिशन के शोध घटक के लिए 500 करोड़ रुपये खर्च करने की योजना बनाई है। दूसरी तरफ मिशन की उम्र एक साल हो गई है, लेकिन अब तक किसी भी शोध परियोजना को मिशन के तहत मंजूरी नहीं मिली है।

क्यों अहम है दलहन आत्मनिर्भरता के लिए शोध?
दलहन आत्मनिर्भरता मिशन का शोध घटक खासतौर से ऐसी किस्मों के विकास पर जोर देता है, जो जलवायु परिवर्तन के प्रभाव को झेल सकें और किसानों को बंपर उपज दे सकें। इस तरह न केवल दलहन उत्पादन में बढ़ोतरी होगी, बल्कि ज्यादा उत्पादन होने से किसानों को भी फायदा होगा। 

कृषि मंत्रालय को मिला 15 नवंबर तक का समय  
कैबिनेट सचिवालय ने रिसर्च प्रोजेक्ट को मंजूरी ने मिलने पर कड़ी आपत्ति जताई है। कैबिनेट सचिव टीवी सोमानाथन की अध्यक्षता 5 अक्तूबर को तिलहन, दलहन और कपास में कृषि अनुसंधान पुनर्संरचना को लेकर हुई बैठक में यह मामला उठा। रिपोर्ट के अनुसार, कृषि मंत्रालय को 15 नवंबर से पहले शोध परियोजनाओं को मंजूरी देने की प्रक्रिया को पूरा करने का निर्देश मिला है।

कृषि मंत्रालय का क्या कहना है?
कृषि मंत्रालय का कहना है कि मिशन के तहत प्राथमिकता वाले रिसर्च क्षेत्रों की पहचान करने के बाद रिसर्च संस्थानों और दूसरे योग्य संगठनों से प्रस्ताव आमंत्रित किए थे। कुल 419 प्रस्ताव प्राप्त हुए हैं, जिनकी स्क्रीनिंग और तकनीकी मूल्यांकन किया जा रहा है।

इनमें से 125 प्रस्ताव भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद संस्थानों से, 249 राज्य कृषि विश्वविद्यालयों से, 14 अन्य सरकारी विश्वविद्यालयों, संस्थानों व सार्वजनिक उपक्रमों से और 5 प्रस्ताव निजी विश्वविद्यालयों से मिले हैं।

एक कमेटी के बाद दूसरी कमेटी तक पहुंचे प्रस्ताव
मंत्रालय के मुताबिक, एक स्क्रीनिंग कमेटी ने मिशन की प्राथमिकताओं और उद्देश्यों के आधार पर इन प्रस्तावों की जांच की और प्रस्तुतिकरण के लिए शोध परियोजनाओं का चुनाव किया। अब शोधकर्ता राष्ट्रीय स्तर की रिसर्च एंड डेवलपमेंट कमेटी के सामने अपने प्रस्ताव पेश कर रहे हैं। इस कमेटी में अतिरिक्त सचिव, आईसीएर के वरिष्ठ अधिकारी, वैज्ञानिक, मिशन अधिकारी और विषय विशेषज्ञ शामिल हैं।

मंत्रालय ने मूल्यांकन में सभी प्रमुख चीजों पर ध्यान रखनी की बात कही और बताया की कमेटी ने बीते तीन बैठकों के माध्यम से कई प्रस्तावों को मंजूरी के लिए शॉर्टलिस्ट भी किया जा चुका है।

देरी क्यों है महत्वपूर्ण और क्या हैं लक्ष्य?
दलन में आत्मनिर्भरता के लिए इस मिशन को 1 अक्टूबर 2025 को केंद्रीय मंत्रिमंडल द्वारा मंजूरी दी गई थी और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने 11 अक्टूबर 2025 को इसका शुभारंभ किया था। वर्ष 2025-26 से 2030-31 तक के लिए इस मिशन का कुल बजट 11,440 करोड़ रुपये है, जिसमें से 500 करोड़ रुपये सिर्फ रिसर्च प्रोजेक्ट्स के लिए निर्धारित किए गए हैं।

मिशन का उद्देश्य साल 2030-31 तक दलहन के कुल उत्पादन को 45 प्रतिशत बढ़ाकर 242 लाख मीट्रिक टन (2023-24 के आंकड़े) से 350 लाख मीट्रिक टन करना है। इसके साथ ही, दलहन के तहत आने वाले क्षेत्र को 13 प्रतिशत (275 लाख हेक्टेयर से बढ़ाकर 310 लाख हेक्टेयर) और औसत उपज को 28 प्रतिशत (881 किलो प्रति हेक्टेयर से बढ़ाकर 1,130 किलो प्रति हेक्टेयर) तक बढ़ाने का लक्ष्य है।

अक्तूबर के आखिर तक कई शोधकर्ताओं को खुशखबरी?
कृषि मंत्रालय को 15 नवंबर की समय सीमा मिली है, ऐसे में मंत्रालय अक्तूबर महीने के आखिर तक कमेटी की तरफ से सुझाए गए सभी योग्य शोध परियोजना को मंजूरी देने की तैयारी में है।
 


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