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चीनी मिलों की बढ़ी धड़कनें : इथेनॉल टेंडर से गन्ना बाहर, उद्योग को नुकसान का डर, सरकार से की ये मांग...

गांव जंक्शन डेस्क, नई दिल्ली Published by: Devesh Saraswat Updated Tue, 20 Oct 2026 10:33 AM IST
सार

  • केंद्र ने प्रमुख गन्ना उत्पादों से बने इथेनॉल को 2026-27 में खरीद नीति से बाहर रखा है
  • यह कदम गन्ना उत्पादन में गिरावट के खतरे के बीच बाजार में चीनी की सप्लाई को बढ़ाने का काम करेगा
  • चीनी मिलों को आशंका है कि लंबे समय तक प्रतिबंध जारी रहने पर चीनी उत्पादन बढ़ने और कीमतें गिरने से उनकी वित्तीय स्थिति पर दबाव बढ़ सकता है।
  • उद्योग ने आगामी समय में फिर से प्रमुख गन्ना उत्पादों से बने इथेनॉल को टेंडर में शामिल करने की मांग की है
  • नवंबर से शुरू होने वाले इथेनॉल सप्लाई वर्ष में सरकारी तेल विपणन कंपनियां गन्ने के रस, शुगर सिरफ और बी-हेवी मोलासेस से बने इथेनॉल की खरीद नहीं करेंगी। 
  • सी-हेवी मोलासेस से बना इथेनॉल टेंडर के तहत अभी भी पात्र है

नई इथेनॉल खरीद नीति से चीनी मिलों की बढ़ी धड़कनें
नई इथेनॉल खरीद नीति से चीनी मिलों की बढ़ी धड़कनें - फोटो : सोशल मीडिया
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विस्तार
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नए पेराई सीजन (2026-27) में कम बारिश के कारण गन्ने की उपलब्धता को लेकर चिंता बनी हुई है, जिससे चीनी उत्पादन पर भी आंच आने का खतरा है। ऐसे में सरकार ने बाजार में चीनी की सप्लाई को मजबूत करने के लिए सरकार ने इथेनॉल को लेकर बड़ा कदम उठाया है। इस कदम के तहत 2026-26 इथेनॉल सप्लाई वर्ष में सरकारी तेल विपणन कंपनियां  गन्ने के रस, शुगर सिरफ और बी-हेवी मोलासेस से बने इथेनॉल की खरीद नहीं करेंगी। 

चीनी की सप्लाई को मजबूती, मिलों ने कहा लंबे समय में हमें नुकसान 
बता दें कि इस तरह चीनी उत्पादन को मजबूती मिलने की उम्मीद जताई जा रही है, जिसकी भारत को वर्तमान में काफी जरूरत है। हालांकि चीनी मिल इस फैसले से खुश नहीं हैं। चीनी मिलों का कहना है कि अगर यह प्रतिबंध लंबे समय तक जारी रहा, तो चीनी का उत्पादन बढ़ेगा और कीमतों में तेजी से गिरावट आएगी। इस तरह मिलों की वित्तीय सेहत पर भारी दबाव पड़ सकता है। ऐसे में उद्योग ने आगामी इथेनॉल सप्लाई वर्ष में प्रमुख गन्ना उत्पादों से बने इथेनॉल को खरीद के टेंडर में फिर से शामिल करने की अपील की है।

नए सप्लाई सीजन के लिए 11 अरब लीटर इथेनॉल का टेंडर
इथेनॉल की खरीद के लिए दूसरी तेल विपणन कंपनियों की ओर से भारत पेट्रोलियम कॉर्पोरेशन लिमिटेड ने 16 अक्तूबर को टेंडर जारी किया था। नवंबर महीने से शुरू होने वाले नए इथेनॉल सप्लाई वर्ष में 20 प्रतिशत इथेनॉल ब्लेंडिंग के लक्ष्य को हासिल करने के लिए 11 अरब लीटर इथेनॉल की बोलियां मंगाई गई हैं।

सी-हेवी मोलासेस से बना इथेनॉल टेंडर के तहत पात्र
इस मौजूदा टेंडर के तहत, गन्ने के रस, शुगर सिरप और बी-हेवी मोलासेस से बनने वाले इथेनॉल को पूरी तरह बाहर रखा गया है, जबकि सी-हेवी मोलासेस से बनने वाला इथेनॉल इसके लिए पात्र बना हुआ है। टेंडर दस्तावेज के अनुसार, केंद्र सरकार ने निर्देश दिए हैं कि 2026-27 में एथनॉल सप्लाई के लिए गन्ने के डायवर्जन को घटाकर शून्य कर दिया जाए। टेंडर में साफ कहा गया है कि गन्ने के रस, चीनी, शुगर सिरप और बी-हेवी मोलासेस से बनने वाले एथनॉल के लिए कोई भी प्रस्ताव नहीं मांगे गए हैं।

इस टेंडर में मक्के, टूटे हुए चावल, भारतीय खाद्य निगम (FCI) के पास मौजूद सरप्लस चावल और सी-हेवी मोलासेस से बनने वाले एथनॉल की बोलियां स्वीकार की जा रही हैं।

फीडस्टॉक्स की सोर्सिंग में बदलाव
इथेनॉल-ब्लेंडेड पेट्रोल योजना के तहत कच्चे तेल के आयात को घटाने और वाहनों से होने वाले प्रदूषण को कम करने के लिए पहले अनाज और गन्ने दोनों से बनने वाले इथेनॉल का इस्तेमाल किया जाता था, लेकिन इन नए प्रतिबंधों के साथ फीडस्टॉक्स की सोर्सिंग में एक बड़ा बदलाव देखने को मिला है।


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