कर्नाटक में गन्ने का उचित दाम और न्यूनतम समर्थन मूल्य (MSP) समेत दूसरी मांगों को लेकर चल रहा किसानों का आंदोलन सोमवार, 19 अक्टूबर को अस्थायी रूप से स्थगित कर दिया गया। धारवाड़ में किसान नेताओं और केंद्रीय मंत्री प्रल्हाद जोशी के बीच बातचीत के बाद यह फैसला लिया गया। किसानों ने राज्य और केंद्र सरकार को अपनी मांगें पूरी करने के लिए 26 नवंबर तक का समय दिया है। किसान नेताओं ने चेतावनी दी है कि तय समय तक मांगें पूरी नहीं हुईं तो 27 नवंबर को हुबली में केंद्रीय मंत्री के आवास का घेराव किया जाएगा।
रिपोर्ट के मुताबिक, रविवार रात केंद्रीय मंत्री प्रल्हाद जोशी और किसान नेताओं शशिकांत गुरुजी तथा चुनप्पा पुजारी के बीच बैठक हुई। बातचीत के बाद किसान नेताओं ने विभिन्न जिलों के प्रतिनिधियों से चर्चा की और हुबली की ओर प्रस्तावित मार्च को फिलहाल रोकने का फैसला किया।
MSP पर समाधान के लिए मांगा और समय
धारवाड़ में यारिकोप्पा क्रॉस के पास प्रदर्शनकारियों को संबोधित करते हुए किसान नेता चुनप्पा पुजारी ने कहा कि प्रल्हाद जोशी ने किसानों की मांगों पर आश्वासन दिया है। हालांकि, उन्होंने गन्ने के न्यूनतम समर्थन मूल्य (MSP) से जुड़े मुद्दे को सुलझाने के लिए और समय मांगा है।
पुजारी ने मांग की कि अगले चार से पांच दिनों के भीतर बेलगावी में चीनी मिल मालिकों और किसान नेताओं की बैठक बुलाई जाए। उन्होंने चीनी मिलों से चीनी के परिवहन को रोकने के लिए कदम उठाने की भी मांग की।
सुवर्ण विधान सौधा में बैठक कराने पर जोर
किसान नेताओं ने बेलगावी स्थित सुवर्ण विधान सौधा में गन्ना किसानों की समस्याओं और मांगों पर चर्चा के लिए तत्काल बैठक बुलाने की मांग की। उनका कहना है कि किसानों के मुद्दों पर चर्चा किसी दूसरी जगह के बजाय निर्धारित प्रशासनिक केंद्र में होनी चाहिए।
पुजारी ने कहा कि किसान उपमुख्यमंत्री डीके शिवकुमार और केंद्रीय मंत्री प्रल्हाद जोशी की ओर से दिए गए आश्वासनों का सम्मान करेंगे। उन्होंने लोकतांत्रिक व्यवस्था में बातचीत और सहयोग को जरूरी बताया।
मांगें पूरी नहीं हुईं तो आंदोलन तेज करने की चेतावनी
किसान नेताओं ने साफ कहा कि 26 नवंबर तक मांगें पूरी नहीं हुईं तो आंदोलन फिर तेज किया जाएगा। उन्होंने 27 नवंबर को हुबली में प्रल्हाद जोशी के आवास का घेराव करने के लिए बड़ी संख्या में किसानों को जुटाने की चेतावनी दी है।
नेताओं ने दावा किया कि जरूरत पड़ने पर इस आंदोलन में एक करोड़ किसानों को शामिल करने की कोशिश की जाएगी। फिलहाल आंदोलन को अस्थायी रूप से स्थगित किया गया है। अब सभी की नजर सरकारों के अगले कदम और किसानों की मांगों पर होने वाली बातचीत पर है।
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