पंजाब में इस साल 1 जून से धान की रोपाई की अनुमति दी गई थी। अब इसका असर फसल की कटाई पर दिख रहा है। कम समय में तैयार होने वाली धान की किस्में और हाइब्रिड धान की फसल कई इलाकों में पककर तैयार हो गई है, लेकिन सरकारी खरीद 1 अक्टूबर से शुरू होनी है। इससे किसानों के सामने अपनी तैयार फसल को कम दाम पर निजी खरीदारों को बेचने का खतरा बढ़ गया है।
इंडियन एक्सप्रेस की खबर के मुताबिक, किसानों का कहना है कि अगर सरकारी खरीद जल्दी शुरू नहीं हुई तो उन्हें मजबूरी में न्यूनतम समर्थन मूल्य (MSP) से कम कीमत पर धान बेचना पड़ सकता है। कुछ किसानों ने बताया कि सरकारी खरीद शुरू नहीं होने के कारण वे अपनी फसल का कुछ हिस्सा निजी कारोबारियों को 2,000 से 2,100 रुपये प्रति क्विंटल में बेच चुके हैं। जबकि 2026-27 के लिए धान का MSP 2,461 रुपये प्रति क्विंटल तय है।
जल्दी तैयार होने वाली किस्मों की फसल पककर तैयार
किसान PR-126 और 7501, 7301 व 134 जैसी हाइब्रिड किस्मों की खेती कर रहे हैं। इन किस्मों की फसल कम समय में तैयार हो जाती है। किसानों के मुताबिक, इस साल मौसम में पिछले साल जैसी लगातार बारिश और बाढ़ नहीं हुई, इसलिए फसल अपने सामान्य समय पर पक रही है।
PR-126 धान की फसल रोपाई के करीब 93 दिन बाद तैयार हो जाती है। ऐसे में जून के मध्य में इसकी रोपाई करने वाले किसानों की फसल सितंबर के मध्य तक तैयार हो सकती है। पंजाब में धान के बड़े क्षेत्र में PR-126 की खेती होती है। इसके अलावा कम अवधि वाली कई हाइब्रिड किस्में भी किसानों के बीच लोकप्रिय हो रही हैं। किसानों का कहना है कि जब सरकार ने रोपाई की तारीख पहले कर दी है तो फसल की वास्तविक पकने की अवधि को देखते हुए सरकारी खरीद भी पहले शुरू की जानी चाहिए।
निजी खरीदार MSP से 200-300 रुपये कम दे रहे
जालंधर के जैतेवाली गांव के किसान हरमिंदर सिंह ने इंडियन एक्सप्रेस को बताया कि उन्होंने 15 एकड़ में PR-126 की रोपाई की थी। इसमें से करीब तीन एकड़ की फसल ही मंडी तक पहुंचाई है। उनके मुताबिक, सरकारी खरीद शुरू नहीं होने के कारण निजी खरीदार MSP से 200 से 300 रुपये प्रति क्विंटल कम दाम दे रहे हैं। उन्होंने बताया कि एक सप्ताह और इंतजार करने पर फसल में नमी कम हो सकती है। कुछ हद तक कम नमी खरीद के लिए बेहतर होती है, लेकिन ज्यादा सूखने पर दाने का वजन कम हो सकता है। इससे किसान को आर्थिक नुकसान उठाना पड़ सकता है।
तैयार फसल होने के बावजूद कटाई रोक रहे किसान
कपूरथला के ढिलवां के किसान गुररतन सिंह के अनुसार, उनकी धान की फसल पूरी तरह तैयार है, लेकिन कम कीमत पर बेचने के डर से वह कटाई नहीं कर रहे हैं। उन्होंने थोड़ी फसल मंडी में पहुंचाई थी, लेकिन वहां मिलने वाला भाव MSP के मुकाबले काफी कम था। किसानों की परेशानी इसलिए भी बढ़ गई है क्योंकि उन्होंने सरकार की ओर से तय 1 जून से धान की रोपाई की अनुमति का पालन किया। अब उनका कहना है कि अगर रोपाई का समय पहले किया गया है तो जल्दी तैयार होने वाली फसल के लिए सरकारी खरीद की शुरुआत भी उसी हिसाब से होनी चाहिए।
खरीद के लिए नमी की सीमा 17 फीसदी
धान की सरकारी खरीद के लिए अनाज में नमी की निर्धारित सीमा 17 फीसदी है। किसानों के सामने समस्या यह है कि फसल तैयार होने के बाद अगर उसे ज्यादा समय तक खेत या मंडी में रखा गया तो नमी घटने के साथ वजन भी कम हो सकता है।
पिछले साल स्थिति कुछ अलग थी। पंजाब में अगस्त और सितंबर के दौरान भारी बारिश और बाढ़ के कारण कई इलाकों में खेतों में पानी भर गया था। इससे फसल पकने और मंडियों में पहुंचने में देरी हुई। हालांकि, सरकार ने पिछले साल सरकारी खरीद 16 सितंबर से शुरू कर दी थी, लेकिन शुरुआती दिनों में फसल की आवक काफी कम रही। 22 सितंबर तक पंजाब में केवल 10,392 मीट्रिक टन धान की खरीद हुई थी।
इस बार बारिश कम, इसलिए फसल समय पर तैयार
इस साल पंजाब में अब तक बारिश सामान्य से करीब 37 फीसदी कम रही है। पिछले साल जैसी लगातार बारिश नहीं होने के कारण जल्दी रोपी गई धान की फसल समय पर तैयार हो रही है। यही वजह है कि इस बार किसानों को सरकारी खरीद शुरू होने से पहले ही फसल पक जाने की समस्या का सामना करना पड़ रहा है।
खन्ना मंडी के श्रमिक यूनियन के अध्यक्ष दर्शन लाल का कहना है कि PR-126 और हाइब्रिड धान की आवक मंडियों में शुरू हो गई है। सरकारी खरीद नहीं होने के कारण कुछ किसानों ने फसल मंडी में रख दी है। कुछ मामलों में आढ़तियों ने भी धान अपने स्तर पर रख लिया है, ताकि सरकारी खरीद शुरू होने के बाद उसे बेचा जा सके।
किसानों ने सरकार से की खरीद जल्दी शुरू करने की मांग
किसान गुरबख्शिश सिंह का कहना है कि अगर सरकार अभी खरीद की तारीख आगे नहीं बढ़ा सकती तो मंडियों में निजी खरीदारों द्वारा किसानों से कम कीमत पर धान खरीदने पर रोक लगानी चाहिए। कपूरथला से कांग्रेस विधायक राणा गुरजीत सिंह ने भी कहा कि शुरुआती रोपाई के कारण कम अवधि वाली धान की किस्में जल्दी तैयार हुई हैं और कई किसानों को कम कीमत पर फसल बेचनी पड़ रही है। उनका कहना है कि अगर सरकार ने रोपाई की तारीख पहले की है तो किसानों को MSP का लाभ दिलाने के लिए सरकारी खरीद भी पहले शुरू की जानी चाहिए।
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