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जम्मू-कश्मीर : ओलावृष्टि से फसल बचाने पर 90% सब्सिडी नहीं, प्रस्ताव खारिज, बागवानों को अभी 50% मदद

गांव जंक्शन डेस्क, नई दिल्ली Published by: Mohammad Aamil Updated Sat, 26 Sep 2026 04:45 PM IST
सार

  • J&K में एंटी-बर्ड और एंटी-हेल नेट लगाने पर 50% सब्सिडी मिल रही है।
  • एक लाभार्थी को अधिकतम 10,000 वर्गमीटर क्षेत्र तक सहायता मिलेगी।
  • 2024-25 में शोपियां के 6,792 बागवानों की 2,209.75 हेक्टेयर फसल प्रभावित हुई।
  • 2025-26 में 2,179 बागवानों को 51.43 लाख रुपये मुआवजा दिया गया।

सेब की बगिया
सेब की बगिया - फोटो : सोशल मीडिया
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विस्तार
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जम्मू-कश्मीर के सेब समेत अन्य फलों के बागों को ओलावृष्टि से बचाने के लिए बागवानों को फिलहाल एंटी-हेल नेट लगाने पर 50 फीसदी सब्सिडी मिल रही है। सरकार ने स्पष्ट किया है कि मौजूदा और पारंपरिक फलों के बागों में हेल नेट लगाने के लिए सब्सिडी बढ़ाकर 90 फीसदी करने का अभी कोई प्रस्ताव नहीं है।

सरकार ने विधानसभा में शोपियां के विधायक शबीर अहमद कुल्ले के सवाल के लिखित जवाब में यह जानकारी दी। सरकार के अनुसार, मिशन फॉर इंटीग्रेटेड डेवलपमेंट ऑफ हॉर्टिकल्चर (MIDH) के तहत बागवान एंटी-बर्ड और एंटी-हेल नेट लगाने के लिए 50 फीसदी सहायता ले सकते हैं।

10 हजार वर्ग मीटर तक क्षेत्र पर मिलेगी सहायता
एंटी-हेल नेट के लिए एक लाभार्थी को अधिकतम 10,000 वर्ग मीटर क्षेत्र तक सब्सिडी के लिए पात्र माना गया है। यदि बाग का क्षेत्र इससे कम है तो सहायता उसी के अनुपात में दी जाएगी। सरकार का कहना है कि इस सहायता का उद्देश्य बागवानों को ओलावृष्टि और खराब मौसम से फसल बचाने के लिए सुरक्षा उपाय अपनाने के लिए प्रोत्साहित करना है। खासकर उन इलाकों में इसका फायदा हो सकता है, जहां हर साल मौसम की वजह से फलों की फसल को नुकसान होता है।

शोपियां में दो साल में हजारों बागवान प्रभावित
सरकार ने शोपियां जिले में पिछले दो वर्षों में ओलावृष्टि और खराब मौसम से हुए नुकसान का आंकड़ा भी विधानसभा में बताया। 2023-24 में जिले में फसल नुकसान का कोई मामला दर्ज नहीं हुआ था। इसके बाद 2024-25 में 6,792 बागवान प्रभावित हुए। इनका कुल 2,209.75 हेक्टेयर बाग प्रभावित हुआ और सरकार की ओर से 98.83 लाख रुपये का मुआवजा दिया गया। वहीं, 2025-26 में 2,179 बागवानों की 589.40 हेक्टेयर बागवानी फसल प्रभावित हुई। इस नुकसान के लिए 51.43 लाख रुपये का मुआवजा दिया गया।

नुकसान का मौके पर जाकर होता है आकलन
सरकार के अनुसार, ओलावृष्टि और खराब मौसम से फसल को हुए नुकसान का आकलन बागवानी विभाग और राजस्व विभाग की संयुक्त टीम करती है। अधिकारी प्रभावित बागों का मौके पर जाकर निरीक्षण करते हैं और निर्धारित नियमों के आधार पर नुकसान का आकलन किया जाता है।

जिले से नुकसान की रिपोर्ट तैयार होने के बाद उसे राहत या मुआवजे के लिए जिला उपायुक्त (Deputy Commissioner) के पास भेजा जाता है। इसके बाद SDRF/NDRF के निर्धारित नियमों के तहत सहायता पर विचार किया जाता है।

जम्मू-कश्मीर में अभी लागू नहीं हुई मौसम आधारित फसल बीमा योजना
जम्मू-कश्मीर में पुनर्गठित मौसम आधारित फसल बीमा योजना (RWBCIS) अभी लागू नहीं हुई है। सरकार ने बताया कि इसके लिए बीमा कंपनियों की पहचान की प्रक्रिया शुरू कर दी गई है। केंद्र सरकार ने 4 फरवरी 2026 को जम्मू-कश्मीर प्रशासन को सभी 20 जिलों के लिए नए सिरे से टेंडर की तैयारी करने की सलाह दी थी। यह प्रक्रिया प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना (PMFBY) और RWBCIS के नियमों में प्रस्तावित बदलावों को ध्यान में रखते हुए की जा रही है। सरकार की योजना खरीफ 2026 से RWBCIS लागू करने की है।

सेब की फसल के लिए बीमा नियम तैयार
जम्मू-कश्मीर सरकार ने सेब की फसल के लिए RWBCIS के तहत बीमा की शर्तें तय करने को लेकर केंद्र के साथ चर्चा भी की है। इसमें ओलावृष्टि और हाई-डेंसिटी सेब के बागों को होने वाले नुकसान को भी शामिल किया गया है। सेब के लिए बीमा की शर्तें (टर्म शीट) तैयार हो चुकी हैं। हालांकि, RWBCIS के संशोधित दिशानिर्देशों पर केंद्र सरकार के स्तर पर अभी प्रक्रिया चल रही है।

जम्मू-कश्मीर में सेब और अन्य फलों की खेती करने वाले बागवानों को ओलावृष्टि और दूसरे मौसम संबंधी खतरों से लगातार नुकसान का सामना करना पड़ता है। ऐसे में एंटी-हेल नेट पर मौजूदा 50 फीसदी सब्सिडी और प्रस्तावित मौसम आधारित फसल बीमा योजना बागवानों के लिए महत्वपूर्ण है।
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