पंजाब ने आगामी रबी सीजन को देखते हुए डीएपी खाद की कमी का हवाला देते हुए केंद्र सरकार से तुरंत लाख मीट्रिक टन डीएपी आवंटित करने की मांग की है।
रबी सीजन के लिए खाद की जरूरत और कमी
सरकार के अनुसार, पंजाब को आगामी रबी सीजन के लिए कुल 5.50 लाख मीट्रिक टन डीएपी की आवश्यकता है। इसमें से 70,000 मीट्रिक टन खाद की जरूरत आलू की फसल के लिए है, जिसकी बुवाई पहले ही शुरू हो चुकी है। वहीं, गेहूं की बुवाई के लिए 4.80 लाख मीट्रिक टन डीएपी की आवश्यकता होगी। गेहूं की बुवाई अक्तूबर के आखिर में शुरू होगी और नवंबर के मध्य तक पूरी कर ली जाएगी।
'द ट्रिब्यून' को जानकारी देते हुए एक वरिष्ठ सरकारी अधिकारी ने बताया कि इस कुल जरूरत के मुकाबले पंजाब के पास वर्तमान में केवल 1.60 लाख मीट्रिक टन डीएपी का स्टॉक मौजूद है। इससे राज्य में 3.90 लाख मीट्रिक टन खाद की सीधी कमी हो गई है।
कृषि मंत्री ने केंद्रीय मंत्री को लिखा पत्र
खाद की इस कमी को लेकर पंजाब के कृषि मंत्री गुरमीत सिंह खुड्डियां की अध्यक्षता में एक उच्च स्तरीय बैठक हुई। बैठक में यह फैसला लिया गया कि इस मामले को तुरंत केंद्र सरकार के सामने उठाया जाएगा।
इसके बाद, कृषि मंत्री खुड्डियां ने केंद्रीय रसायन एवं उर्वरक मंत्री जेपी नड्डा को एक पत्र लिखा है। मंत्री ने मांग की है कि अक्तूबर महीने के लिए पंजाब का डीएपी आवंटन बढ़ाकर 3 लाख मीट्रिक टन किया जाए। इसके साथ ही उन्होंने अपील की है कि इसमें से ज्यादा से ज्यादा मात्रा 15 अक्तूबर तक राज्य को सप्लाई कर दी जाए।
आपूर्ति में कमी और बंदरगाहों से दूरी की चुनौती
कृषि मंत्री खुड्डियां के अनुसार, पंजाब को जुलाई और अगस्त में अग्रिम स्टॉक के लिए 1.49 लाख मीट्रिक टन डीएपी प्राप्त हुई थी। इसके बाद, सितंबर महीने में 1.02 लाख मीट्रिक टन के आवंटन के मुकाबले 16 सितंबर तक राज्य को केवल 0.46 लाख मीट्रिक टन खाद ही मिल पाई थी।
कृषि मंत्री ने कहा कि इस कमी के कारण रबी सीजन के लिए डीएपी की उपलब्धता पर दबाव काफी बढ़ गया है। उन्होंने समय पर खाद पहुंचने की अहमियत पर जोर देते हुए बताया कि देश में उपलब्ध डीएपी का एक बड़ा हिस्सा विदेशों से आयात किया जाता है और पंजाब प्रमुख बंदरगाहों से काफी दूर स्थित है।
इस स्थिति को देखते हुए, कृषि मंत्री खुड्डियां ने केंद्र सरकार से इस मामले पर "तत्काल और प्राथमिकता के आधार पर" ध्यान देने की मांग की है।