उत्तर प्रदेश में जमीन का उपयोग बदलवाने के लिए लोगों को अब कम शुल्क देना होगा। योगी सरकार ने कृषि भूमि को आवासीय, औद्योगिक, कार्यालय और व्यावसायिक उपयोग में बदलने का शुल्क घटा दिया है। वहीं, आवासीय जमीन को औद्योगिक और व्यावसायिक उपयोग में बदलने की दरें भी कम की गई हैं। इसके अलावा विकास प्राधिकरणों को 6,000 वर्ग मीटर तक की जमीन का भू-उपयोग बदलने का अधिकार दिया गया है।
प्रमुख सचिव आवास पी. गुरु प्रसाद ने उत्तर प्रदेश नगर योजना और विकास (भू-उपयोग परिवर्तन शुल्क का निर्धारण, उद्ग्रहण एवं संग्रहण) तृतीय संशोधन नियमावली-2026 जारी की। सरकार के मुताबिक, नियमों को आसान बनाने और शुल्क घटाने का उद्देश्य ईज ऑफ डूइंग बिजनेस को बढ़ावा देना और प्रदेश में विकास तथा उद्योगों के लिए जमीन उपलब्ध कराने की प्रक्रिया को आसान बनाना है।
कृषि भूमि को दूसरे उपयोग में बदलने का शुल्क घटा
नए नियमों के तहत कृषि, पार्क, खुले स्थान और ग्रीन बेल्ट से सार्वजनिक सुविधा, यातायात और परिवहन के लिए भू-उपयोग बदलने का शुल्क 20 से घटाकर 15 फीसदी कर दिया गया है। कृषि भूमि को लघु और वृहद उद्योग के लिए बदलने पर 15 फीसदी शुल्क लगेगा। आवासीय उपयोग के लिए शुल्क 50 से घटकर 25 फीसदी, कार्यालय के लिए 100 से 50 फीसदी, मिश्रित उपयोग के लिए 125 से 65 फीसदी और व्यावसायिक उपयोग के लिए 150 से 75 फीसदी कर दिया गया है। शुल्क सर्किल रेट के आधार पर तय होगा।
आवासीय जमीन से कुछ बदलाव पर शुल्क नहीं
आवासीय जमीन को सार्वजनिक सुविधा, यातायात और पार्किंग के लिए इस्तेमाल करने पर अब कोई भू-उपयोग परिवर्तन शुल्क नहीं देना होगा। आवासीय से लघु और वृहद उद्योग के लिए भी शुल्क नहीं लिया जाएगा। वहीं, आवासीय भूमि को कार्यालय उपयोग में बदलने पर 25 फीसदी तथा मिश्रित और व्यावसायिक उपयोग में बदलने पर 50-50 फीसदी शुल्क देना होगा। राज्य सरकार जिन जमीनों के भू-उपयोग परिवर्तन शुल्क में पूरी या आंशिक छूट दे रही है, उन पर अलग से शुल्क नहीं लगाया जाएगा।
सर्किल रेट से तय होगा शुल्क
भू-उपयोग परिवर्तन शुल्क जमीन के कुल क्षेत्रफल और संबंधित क्षेत्र के सर्किल रेट के आधार पर तय किया जाएगा। यदि संबंधित योजना या सेक्टर का सर्किल रेट उपलब्ध नहीं है तो पास की योजना का सर्किल रेट लिया जाएगा। कृषि या वाणिज्यिक जमीन का सर्किल रेट उपलब्ध नहीं होने पर अकृषिक भूमि की दर को आधार बनाया जाएगा। वहीं, कृषि भूमि का सर्किल रेट उपलब्ध नहीं होने पर उसकी दर आवासीय सर्किल रेट की 20 फीसदी मानी जाएगी। आवेदन शुल्क 1,000 रुपये प्रति हेक्टेयर रखा गया है।
बड़े भूखंड के लिए टेलिस्कोपिक तरीके से गणना
बड़े भूखंडों के लिए शुल्क की गणना टेलिस्कोपिक आधार पर की जाएगी। यानी जमीन का पूरा क्षेत्रफल एक ही दर से नहीं जोड़ा जाएगा, बल्कि अलग-अलग क्षेत्रफल की तय श्रेणियों के अनुसार शुल्क की गणना होगी। इसमें सर्किल रेट और लागू प्रतिशत को आधार बनाया जाएगा। जमीन के क्षेत्रफल के आधार पर सर्किल रेट में कोई अतिरिक्त छूट नहीं मिलेगी।
6,000 वर्ग मीटर तक बदलाव का अधिकार
नए नियमों के तहत विकास प्राधिकरणों को 6,000 वर्ग मीटर तक की जमीन का भू-उपयोग बदलने का अधिकार दिया गया है। हालांकि, प्राधिकरण मास्टर प्लान में किसी खास भू-उपयोग को कुल क्षेत्रफल के एक फीसदी तक ही बदल सकेंगे। इससे अधिक क्षेत्र के भू-उपयोग में बदलाव का अधिकार शासन के पास रहेगा।
आवेदन पर तय समय में होगी कार्रवाई
भू-उपयोग बदलने के आवेदन की एक प्रति मुख्य नगर एवं ग्राम नियोजक को भी दी जाएगी। विकास प्राधिकरण और नगर एवं ग्राम नियोजक विभाग आवेदन की एक साथ समीक्षा करेंगे और 22 दिनों में अपनी संस्तुति देंगे। जरूरत पड़ने पर 60 दिनों के भीतर स्पष्टीकरण मांगा या दिया जा सकेगा।
इसके बाद प्रस्ताव को विकास प्राधिकरण बोर्ड के सामने रखा जाएगा। मंजूरी मिलने के बाद प्राधिकरण की वेबसाइट पर जानकारी प्रकाशित की जाएगी और कम से कम एक समाचार पत्र में भी इसे प्रकाशित कर 15 दिनों में आपत्तियां मांगी जाएंगी। यदि कोई आपत्ति नहीं आती है तो प्रस्ताव को 15 दिनों के भीतर विकास प्राधिकरण के उपाध्यक्ष के पास भेजा जाएगा।
90 दिनों में जमा करना होगा शुल्क
शुल्क की जानकारी मिलने के बाद संबंधित व्यक्ति को 90 दिनों के भीतर पैसा जमा करना होगा। भुगतान होने के बाद 15 दिनों के भीतर भू-उपयोग परिवर्तन की सूचना जारी की जाएगी। सभी विकास प्राधिकरणों में भू-उपयोग परिवर्तन से जुड़े मामलों के लिए उपाध्यक्ष की अध्यक्षता में समिति बनाई जाएगी। इसमें मुख्य नगर नियोजक और नगर नियोजक सदस्य सचिव होंगे। इसके अलावा चार अन्य सदस्य भी समिति में शामिल होंगे।
कुछ जमीनों का भू-उपयोग नहीं बदलेगा
नए नियमों में कुछ विशेष श्रेणी की जमीनों का भू-उपयोग बदलने की अनुमति नहीं होगी। इनमें हरित क्षेत्र, मनोरंजन क्षेत्र, वन, सार्वजनिक और अर्ध-सार्वजनिक सुविधाओं की जमीन शामिल हैं। अर्ध-सार्वजनिक सुविधाओं में सीवेज, फार्म, सीवेज ट्रीटमेंट प्लांट (STP), जल संयंत्र, ठोस कचरा प्रबंधन (SWM), श्मशान और कब्रिस्तान जैसी जमीनें शामिल हैं।
इसके अलावा सड़क, रेलवे की जमीन, पार्किंग, जल निकासी और तालाब जैसी जमीनों का भू-उपयोग भी नहीं बदला जा सकेगा। सरकार का कहना है कि शुल्क और प्रक्रिया को आसान करने से जमीन के उपयोग में बदलाव की प्रक्रिया सरल होगी और प्रदेश में उद्योग, आवास तथा अन्य विकास कार्यों को गति मिल सकेगी।
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