खरीफ विपणन सत्र (2026-27) की धान खरीद प्रक्रिया में सुस्ती देखने को मिली है। खराब मौसम और धीमे उठान की वजह से इस साल धान खरीद में 20 प्रतिशत से ज्यादा की गिरावट देखने को मिली है। जानकारों का कहना है कि खराब मौसम ने कटाई पर खराब असर डाला है। लेकिन, मौसम साफ होने के साथ आवक में सुधार की उम्मीद है।
चालू सत्र के लिए सरकार ने 7.195 करोड़ टन धान खरीद का लक्ष्य तय किया है। गौर करने वाली बात यह है कि चालू सत्र का लक्ष्य पिछले साल के 7.2 करोड़ टन के लगभग बराबर है। दूसरी तरफ बारिश की कमी ने धान के रकबे को 3.5 प्रतिशत घटाने का काम किया है। सूखा प्रभावित राज्यों और स्थानीय स्तर पर कम बारिश धान उत्पादन पर असर डाल सकती है।
पंजाब और हरियाणा खरीद में सबसे आगे
आंकड़ों के अनुसार, 28 अक्टूबर तक 88.6 लाख टन धान की खरीद के साथ पंजाब सबसे आगे है। इसके बाद हरियाणा में 36 लाख टन, तमिलनाडु में 4,18,987 टन और उत्तराखंड में 81,681 टन धान की खरीद हुई है। हालांकि, केंद्रीय खाद्यान्न खरीद पोर्टल के अनुसार पिछले साल इन सभी प्रमुख राज्यों में खरीद का स्तर अधिक था। पूरे सीजन के अनुमानों के अनुसार, सरकार को पंजाब से सबसे अधिक 1.8 करोड़ टन धान मिलने की उम्मीद है। इसके बाद छत्तीसगढ़ से 1.09 करोड़ टन, ओडिशा से 64 लाख टन, उत्तर प्रदेश से 62 लाख टन, हरियाणा से 58 लाख टन और तेलंगाना से 57 लाख टन खरीद का अनुमान है।
बारिश से बढ़ी नमी, किसानों ने टाला कटाई का काम
उत्तर-पश्चिमी क्षेत्र (जिसमें पंजाब, हरियाणा, राजस्थान, यूपी आदि शामिल हैं) में 1 से 21 अक्टूबर के बीच सामान्य से 6 प्रतिशत अधिक बारिश हुई। यहां 18.9 मिमी के मुकाबले 20 मिमी बारिश दर्ज की गई। पंजाब के अधिकारीयों ने माना की बेमौसम बारिश से फसल में नमी बढ़ गई है, जिससे किसानों ने कटाई का काम फिलहाल काट दिया है। उनके अनुसार, अब उठान की चुनौती को सुलझा लिया गया है।
देश के पास अनाज का पर्याप्त भंडार मौजूद
धान की बुवाई में कमी के बावजूद, सरकार को घरेलू खपत और खाद्य सुरक्षा के लिए पर्याप्त चावल मिलने का पूरा भरोसा है। चावल 'प्रधानमंत्री गरीब कल्याण अन्न योजना (PMGKAY)' का एक मुख्य हिस्सा है। सरकारी आंकड़ों के अनुसार, 1 अक्टूबर 2026 तक केंद्रीय पूल में 3.776 करोड़ टन चावल का भंडार था, जो 1.025 करोड़ टन के अनिवार्य नियम से बहुत ज्यादा है। बता दें कि पिछले साल सरकार ने 7.2 करोड़ टन के लक्ष्य के मुकाबले 8.1 करोड़ टन धान की खरीद की थी।