इस साल कम मानसूनी बारिश का असर खरीफ अनाज उत्पादन पर पड़ता दिखाई दे रह है। जानकारों का कहना है कि अनाजों में सबसे ज्यादा नुकसान धान की पैदावार को हो सकता है। बाजार में उत्पादन कम होने की संभावना ने चावल की खुदरा कीमतों में तेजी लाने का काम किया है। गौर करने वाली बात यह है कि आने वाले महीनों में व्यापारी चावल को और महंगा होत देख रहे हैं।
चावल का खुदार दाम 12 प्रतिशत उछला, गेहूं का भविष्य कैसा?
सरकार के उपभोक्ता मामलों के विभाग के मूल्य निगरानी सेल के आंकड़ों के अनुसार, शुक्रवार को चावल की औसत खुदरा कीमत 48.23 रुपये प्रति किलो तक पहुंच गई, जो पिछले साल के मुकाबले 12 प्रतिशत अधिक है। सितंबर महीने में चावल की खुदरा महंगाई दर 8.25 प्रतिशत रही, जो अगस्त 2026 के 5.89 प्रतिशत से काफी ज्यादा है। गेहूं की कीमतों में ज्यादा उछाल नहीं आएगा क्योंकि सरकार के पास इसका भारी भंडार मौजूद है, लेकिन चावल की बढ़ती कीमतों से अनाज श्रेणी में खाद्य महंगाई दर और बढ़ सकती है।
धान की पैदावार 4 से 5 प्रतिशत नीचे गिर सकती है
क्रिसिल इंटेलिजेंस के निदेशक पुषन शर्मा कहते हैं कि इस बार धान की पैदावार में 4 से 5 प्रतिशत तक की कमी आ सकती है। सरकार के कृषि मंत्रालय के आंकड़ों के अनुसार, 2026 के खरीफ सीजन में धान का रकबा 4 प्रतिशत घटकर 426.8 लाख हेक्टेयर रह गया है। कर्नाटक में 4.6 लाख हेक्टेयर, तेलंगाना में 4.3 लाख हेक्टेयर, आंध्र प्रदेश में 1.8 लाख हेक्टेयर और तमिलनाडु में 1.5 लाख हेक्टेयर तक धान के रकबे में बड़ी गिरावट दर्ज की गई है। उत्तरी राज्यों पंजाब, हरियाणा और उत्तर प्रदेश में धान की कटाई इस महीने की शुरुआत से शुरू हो चुकी है।
व्यापार की जानकारी रखने वाले लोगों मानना है कि फसल वर्ष 2026-27 के दौरान चावल का कुल उत्पादन घटकर 14.7 करोड़ टन रह सकता है। इससे पहले 2025-26 के सीजन में देश ने 15.4 करोड़ टन का रिकॉर्ड उत्पादन किया था और चीन को पछाड़कर दुनिया का सबसे बड़ा चावल उत्पादक देश बन गया था। केंद्रीय कृषि सचिव आतिश चंद्रा ने भी हाल ही में कहा है कि वर्षा आधारित क्षेत्रों में यह खरीफ सीजन चुनौतीपूर्ण रहा है और सिंचित क्षेत्रों में बेमौसम अत्यधिक बारिश ने फसल की सेहत को नुकसान पहुंचाया है, जिससे आने वाले सीजन में उत्पादन प्रभावित होने की आशंका है।
सोना मसूरी और बासमती की कीमतों में भारी उछाल
दक्षिणी राज्यों में सूखे और कम रकबे के कारण सोना मसूरी जैसे प्रीमियम गैर-बासमती चावल के दाम तेजी से बढ़े हैं। राइस विला के सह-संस्थापक सूरज अग्रवाल के अनुसार, सोना मसूरी का थोक भाव एक महीने पहले के 50 रुपये से बढ़कर 65-70 रुपये प्रति किलो हो गया है। इसके अलावा, निर्यातकों के अनुसार पंजाब और हरियाणा की मंडियों में नई बासमती फसल की कीमतें रिकॉर्ड 5,000 रुपये प्रति क्विंटल को पार कर गई हैं, जो एक साल पहले 4,000 रुपये थीं। पश्चिम एशिया से मजबूत मांग के कारण बासमती के दाम बढ़े हैं।
सरकारी भंडार और निर्यात में कमी की आशंका
वर्तमान में भारतीय खाद्य निगम के पास 376.5 लाख टन चावल का स्टॉक है, जबकि 1 अक्टूबर के लिए तय बफर मानक केवल 102.5 लाख टन का था। इस स्टॉक में मिल मालिकों से मिलने वाला 177 लाख टन अनाज शामिल नहीं है। वहीं, अमेरिकी कृषि विभाग की एक रिपोर्ट में अनुमान लगाया गया है कि सफेद और टूटे चावल के लदान में कमी के कारण 2027 में भारत का चावल निर्यात 4 प्रतिशत घटकर 240 लाख टन रह सकता है।