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महाराष्ट्र : चारे की किल्लत दूर करने का प्लान, जिला बजट का 5% होगा खर्च... दूसरे राज्यों में भेजने पर रोक
गांव जंक्शन डेस्क, नई दिल्ली
Published by: Mohammad Aamil
Updated Sat, 31 Oct 2026 12:38 PM IST
सार
महाराष्ट्र में सूखे के बीच पशुओं के चारे की कमी दूर करने के लिए सरकार ने जिला बजट का 5 फीसदी खर्च करने का फैसला किया है। चारा बैंक बनेंगे और सूखा प्रभावित इलाकों से दूसरे राज्यों में चारा भेजने पर रोक लगेगी।
महाराष्ट्र में सूखे के कारण पशुओं के लिए चारे की कमी दूर करने के लिए राज्य सरकार ने कई बड़े फैसले लिए हैं। अब हर जिले के सालाना विकास बजट का कम से कम 5 फीसदी हिस्सा चारा उत्पादन, भंडारण और उसकी उपलब्धता बढ़ाने पर खर्च किया जाएगा। इसके साथ ही सूखा प्रभावित सीमावर्ती इलाकों से दूसरे राज्यों में चारा भेजने पर रोक लगाई जाएगी। सरकार ने सूखे के दौरान चारे का इस्तेमाल पशुओं के भोजन के अलावा दूसरे कामों में करने पर भी प्रतिबंध लगा दिया है।
पशुपालन, डेयरी विकास और मत्स्य विभाग की ओर से शुक्रवार को जारी सरकारी आदेश में जिला कलेक्टरों को चारा बैंक बनाने, सूखे चारे की कीमत तय सीमा में रखने और पशु शिविरों में बायोमेट्रिक हाजिरी की व्यवस्था करने के निर्देश दिए गए हैं।
हर जिले के बजट का 5 फीसदी चारे पर खर्च होगा
सरकारी आदेश के अनुसार, जिला कलेक्टर प्रभारी मंत्री की मंजूरी से जिले की सालाना योजना राशि का कम से कम 5 फीसदी हिस्सा चारे से जुड़ी योजनाओं पर खर्च कर सकेंगे। इसका इस्तेमाल चारा उत्पादन बढ़ाने, उपलब्ध चारे को सुरक्षित रखने और चारे के दूसरे विकल्प विकसित करने में किया जाएगा।
कृषि विभाग रबी सीजन के लिए चारे के बीजों की पर्याप्त उपलब्धता सुनिश्चित करेगा। किसानों और पशुपालकों को ऐसी चारा फसलें उगाने के लिए प्रोत्साहित किया जाएगा, जिनमें कम पानी लगता है और जिनकी एक से अधिक बार कटाई की जा सकती है।
कृषि विश्वविद्यालयों की जमीन पर उगाया जाएगा चारा
सरकार ने चारा उत्पादन बढ़ाने के लिए कृषि विश्वविद्यालयों, बीज उत्पादन केंद्रों, कृषि निगम और पशुपालन विभाग के खेतों का इस्तेमाल करने का फैसला किया है। वन क्षेत्रों में उपलब्ध घास और चारे की कटाई कर उसे सुरक्षित रखा जाएगा, ताकि जरूरत पड़ने पर पशुपालकों को उपलब्ध कराया जा सके। जिला कलेक्टर खाली पड़े खेतों में चारा उगाने की व्यवस्था करेंगे। इसके लिए किसान उत्पादक संगठनों (एफपीओ), किसान कंपनियों और स्वयंसेवी समूहों की मदद से चारा बैंक भी बनाए जाएंगे।
सूखे चारे का भाव 12 और साइलेज का 8 रुपये किलो तय
सरकार ने चारे की खरीद के लिए अधिकतम संदर्भ मूल्य भी तय किया है। इसके तहत सूखे चारे का भाव 12 रुपये प्रति किलो और साइलेज का भाव 8 रुपये प्रति किलो रखा गया है। इसमें ढुलाई का खर्च शामिल नहीं होगा। चारे की खरीद तय सीमा के भीतर ही की जाएगी। लंबे समय तक सुरक्षित रखे जा सकने के कारण सूखे चारे को प्राथमिकता दी जाएगी।
चारे से पैकेजिंग और बिजली बनाने पर रोक
सूखे की स्थिति में चारे का इस्तेमाल पशुओं को खिलाने के अलावा पैकेजिंग, जैव ईंधन और बिजली उत्पादन जैसे कामों में नहीं किया जा सकेगा। साथ ही, महाराष्ट्र के सूखा प्रभावित सीमावर्ती इलाकों से दूसरे राज्यों में चारा भेजने पर कानूनी रोक लगाने के निर्देश दिए गए हैं। अगर किसी जिले में चारे की कमी होती है तो संभागीय आयुक्त, पशुपालन अधिकारी और जिला कलेक्टर मिलकर आसपास के जिलों से चारे की व्यवस्था करेंगे।
पशु शिविरों में बायोमेट्रिक हाजिरी अनिवार्य
चारा शिविरों की निगरानी के लिए राज्य स्तर पर 'चारा छावनी निगरानी और प्रबंधन प्रणाली' बनाई जाएगी। इसके जरिए चारे की मांग, उपलब्धता, पशुओं की संख्या, शिविरों में रोजाना हाजिरी, पशु चिकित्सा सेवाओं और खर्च का रिकॉर्ड रखा जाएगा।
सभी पशु शिविरों में सीसीटीवी कैमरे, बायोमेट्रिक या क्यूआर कोड से हाजिरी और पशुओं का सत्यापन अनिवार्य होगा। इसके लिए भारत पशुधन डिजिटल प्रणाली में दर्ज पशुओं का रिकॉर्ड इस्तेमाल किया जाएगा।
हाइड्रोपोनिक्स और अजोला से भी तैयार होगा चारा
सरकार ने चारे के दूसरे विकल्पों को बढ़ावा देने का भी फैसला किया है। इसके तहत बिना मिट्टी के पानी में चारा उगाने वाली हाइड्रोपोनिक्स तकनीक और अजोला के इस्तेमाल को बढ़ावा दिया जाएगा। पशुपालकों को चारा सुरक्षित रखने और उसका प्रसंस्करण करने का प्रशिक्षण भी दिया जाएगा।
इसके अलावा चीनी मिलों को जरूरत के अनुसार गन्ने की पत्तियां, बगास और शीरा उपलब्ध कराने के निर्देश दिए गए हैं। पशु शिविरों में चारा उत्पादन, उपकरण, पानी और साफ-सफाई की व्यवस्था के लिए कंपनियों से कॉरपोरेट सामाजिक जिम्मेदारी (सीएसआर) के तहत मदद लेने को भी प्रोत्साहित किया जाएगा।
304 तहसीलों में सूखा घोषित
महाराष्ट्र सरकार ने 2026 के खरीफ सीजन में कम बारिश के कारण ट्रिगर-1 और ट्रिगर-2 की स्थिति वाले 304 तहसीलों में सूखा घोषित किया है। चारे की कमी से निपटने के लिए सरकार ने पहले एक अध्ययन समूह बनाया था। उसकी सिफारिशों को सूखा प्रबंधन पर बनी कैबिनेट उपसमिति ने मंजूरी दी थी। इसके बाद सरकार ने ये नए निर्देश जारी किए हैं।
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