भारत मौसम विज्ञान विभाग के अनुसार, 31 अक्टूबर उत्तर भारतीय राज्यों में मौसम का मिजाज बदलने वाला है। IMD केमुताबिक, पश्चिमी विक्षोभ और चक्रवाती के चलते उत्तर प्रदेश, उत्तराखंड, हिमाचल प्रदेश, जम्मू-कश्मीर-लद्दाख और हरियाणा-दिल्ली के विभिन्न इलाकों में 31 अक्टूबर से आने वाले दिनों के दौरान हल्की से छिटपुट बारिश और गरज-चमक की स्थिति बन सकती है।
उत्तर भारतीय राज्यों में बारिश और मौसम का पूर्वानुमान
IMD के अनुसार, 31 अक्टूबर को उत्तराखंड में गरज और बिजली चमकने के साथ बारिश की संभावना है। वहीं, 31 अक्टूबर से 2 नवंबर के दौरान उत्तराखंड, हिमाचल प्रदेश, जम्मू-कश्मीर-लद्दाख-गिलगित-बाल्टिस्तान-मुजफ्फराबाद और पूर्वी उत्तर प्रदेश में छिटपुट बारिश देखने को मिल सकती है। इसके अलावा, पश्चिमी उत्तर प्रदेश और पूर्वी राजस्थान में 31 अक्टूबर को तथा हरियाणा, चंडीगढ़ और दिल्ली में 2 नवंबर को छिटपुट बारिश होने का अनुमान व्यक्त किया गया है। मौसम प्रणाली के विश्लेषण में IMD ने बताया कि उत्तर हरियाणा और आसपास के क्षेत्र पर एक पश्चिमी विक्षोभ 4.5 किमी की ऊंचाई पर चक्रवाती परिसंचरण के रूप में बना हुआ है, जबकि चक्रवाती तूफान 'अर्णब' का बचा हुआ निम्न दबाव क्षेत्र दक्षिण-पूर्व उत्तर प्रदेश और उसके आसपास केंद्रित है।
तापमान का हाल: ऊना में सबसे कम न्यूनतम तापमान दर्ज
बीते 24 घंटों के आंकड़ों के आधार पर IMD ने बताया कि उत्तर भारत के मैदानी इलाकों में सबसे कम न्यूनतम तापमान 11.6 डिग्री सेल्सियस हिमाचल प्रदेश के ऊना में दर्ज किया गया। विभाग के अनुसार, उत्तराखंड, हिमाचल प्रदेश, पूर्वी उत्तर प्रदेश और पश्चिमी उत्तर प्रदेश के कुछ इलाकों में न्यूनतम तापमान सामान्य से काफी अधिक दर्ज किया गया है। वहीं पश्चिमी उत्तर प्रदेश और उत्तराखंड के छिटपुट स्थानों पर अधिकतम तापमान सामान्य के आसपास बना रहा।
फसलों और कटी उपज के बचाव के लिए IMD की सलाह
बदलते मौसम और बारिश की संभावना को देखते हुए IMD ने किसानों के लिए सलाह जारी की है। उत्तर प्रदेश के किसानों को कटी हुई उपज को तुरंत सुरक्षित स्थानों पर रखने और प्लास्टिक से ढकने की सलाह दी गई है। इसके अलावा गन्ने, बासमती धान, अन्य खड़ी फसलों और सब्जियों के खेतों में जल निकासी की उचित व्यवस्था सुनिश्चित करने तथा गन्ने और सब्जियों के पौधों को गिरने से बचाने के लिए सहारा देने को कहा गया है। उत्तराखंड के किसानों के लिए IMD ने सलाह दी है कि यदि संभव हो तो परिपक्व धान की कटाई तुरंत कर लें, कटी फसल को सुरक्षित स्थानों पर पहुंचाएं और खेतों में पानी जमा न होने दें।