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धान किसानों की बल्ले-बल्ले : MSP से 1000 रुपये तक ज्यादा मिल रहा भाव, सोना मसूरी-कोलम चावल हो सकते हैं महंगे

गांव जंक्शन डेस्क, नई दिल्ली Published by: Mohammad Aamil Updated Thu, 22 Oct 2026 12:17 PM IST
सार

  • MSP से 1,000 रुपये से ज्यादा भाव: प्रीमियम किस्मों के धान के लिए किसानों को 3,600 से 3,700 रुपये प्रति क्विंटल तक मिल रहे हैं।

  • कर्नाटक में 5,200 रुपये तक भाव: कुछ मंडियों में धान की कीमत इस स्तर तक पहुंच गई है।

  • सोना मसूरी और कोलम हो सकते हैं महंगे: दक्षिण भारत में कम बारिश से उत्पादन प्रभावित होने के कारण कीमतों में तेजी की आशंका है।

  • चावल निर्यात के भाव में तेजी: उसना चावल 3,550 रुपये और सफेद चावल 3,350 रुपये प्रति क्विंटल तक पहुंच गया है।

धान खरीद
धान खरीद - फोटो : गांव जंक्शन
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विस्तार
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देश में प्रीमियम किस्मों के धान की खेती करने वाले किसानों को इस बार न्यूनतम समर्थन मूल्य (MSP) से करीब 1,000 रुपये प्रति क्विंटल या उससे अधिक कीमत मिल रही है। हालांकि, इसका असर चावल की कीमतों पर भी पड़ सकता है। बिजनेस लाइन की रिपोर्ट के मुताबिक, अल नीनो के प्रभाव और कम बारिश के कारण दक्षिण भारत के कुछ इलाकों में धान की पैदावार प्रभावित हुई है। इससे सोना मसूरी और कोलम जैसी लोकप्रिय किस्मों के दाम अगले कुछ महीनों तक ऊंचे रह सकते हैं।

दिल्ली के कृषि व्यापार विश्लेषक एस. चंद्रशेखरन के मुताबिक, फिलहाल प्रीमियम किस्मों के धान का भाव 3,600 से 3,700 रुपये प्रति क्विंटल तक मिल रहा है। यह सरकार की ओर से तय न्यूनतम समर्थन मूल्य से करीब 1,100 रुपये अधिक है। कुछ राज्यों में किसानों को एमएसपी के ऊपर बोनस भी मिलता है। ऐसे में प्रीमियम धान उगाने वाले किसानों को इस बार बेहतर कमाई का मौका मिल रहा है।

इस साल ग्रेड-ए धान का न्यूनतम समर्थन मूल्य 2,461 रुपये प्रति क्विंटल तय किया गया है। आंध्र प्रदेश के बापटला जिले की कई कृषि उपज मंडी समितियों (APMC) में बीपीटी धान का भाव 3,600 से 4,500 रुपये प्रति क्विंटल तक दर्ज किया गया। वहीं, कर्नाटक की कई मंडियों में धान की कीमत 3,000 रुपये से अधिक रही और कुछ जगहों पर यह 5,200 रुपये प्रति क्विंटल तक पहुंच गई।

सोना मसूरी और कोलम चावल महंगे होने की आशंका
दक्षिण भारत में धान की पैदावार प्रभावित होने से सोना मसूरी और कोलम जैसी चावल की किस्मों की कीमतों पर दबाव बढ़ रहा है। कर्नाटक के साथ आंध्र प्रदेश और तेलंगाना के कुछ हिस्सों में कम बारिश के कारण उत्पादन प्रभावित हुआ है। इसका असर घरेलू बाजार के साथ चावल के निर्यात कारोबार पर भी पड़ रहा है।

निर्यातकों के मुताबिक, चावल की कीमतों में तेजी से बदलाव हो रहा है। ऐसे में मिलों से मिलने वाले भाव पर सौदा तय करने के लिए बहुत कम समय मिल रहा है। नई दिल्ली के निर्यातक राजेश पहाड़िया जैन ने बताया कि उनके मामले में मिलर की ओर से दिया गया भाव केवल छह घंटे तक मान्य रहता है, क्योंकि कीमतें तेजी से बदल रही हैं।

हालांकि, चावल निर्यातक संघ (TREA) के अध्यक्ष बी.वी. कृष्णा राव का कहना है कि भाव की वैधता के लिए कोई तय नियम नहीं है। यदि फोन पर ही सौदा तय हो जाए, तो कीमत 24 घंटे से अधिक समय तक भी मान्य रह सकती है।

तमिलनाडु एग्री कमोडिटीज एक्सपोर्टर्स एसोसिएशन के अध्यक्ष एम. मदन प्रकाश के अनुसार, पहले मिलर आमतौर पर व्यापारियों और निर्यातकों को भाव पर सौदा करने के लिए दो से तीन दिन देते थे। अब यह अवधि घटकर करीब एक दिन रह गई है।

इंडियन राइस एक्सपोर्टर्स फेडरेशन के उपाध्यक्ष (पश्चिम बंगाल) सूरज अग्रवाल ने कहा कि भाव कितनी देर तक मान्य रहेगा, यह मिलर, व्यापारी, ब्रोकर और निर्यातक के आपसी संबंधों के साथ खरीदे जाने वाले चावल की मात्रा पर भी निर्भर करता है।

सामान्य चावल के भाव में भी तेजी
चावल के निर्यात कारोबार में भी कीमतें बढ़ी हैं। निर्यातक राजेश पहाड़िया जैन के मुताबिक, पिछले दो सप्ताह में उसना चावल का भाव 100 रुपये प्रति क्विंटल बढ़कर 3,550 रुपये हो गया है। वहीं, सफेद चावल की कीमत 3,200 रुपये से बढ़कर 3,350 रुपये प्रति क्विंटल पहुंच गई है। निर्यात बाजार में 5 फीसदी टूटे दानों वाले उसना चावल का भाव करीब 395 डॉलर प्रति टन और सफेद चावल का भाव 380 डॉलर प्रति टन से अधिक बताया गया है।

हालांकि, चावल निर्यातक संघ के अध्यक्ष बी.वी. कृष्णा राव का कहना है कि निर्यात बाजार में अभी भी खरीदारों का दबदबा है और सामान्य कारोबार जारी है। उनके मुताबिक, बीपीटी चावल करीब 80 रुपये प्रति किलो और इसकी दूसरी किस्में 60 से 80 रुपये प्रति किलो के भाव पर बिक रही हैं। वहीं, भारतीय खाद्य निगम (FCI) का चावल करीब 35 रुपये प्रति किलो और प्रीमियम चावल लगभग 70 रुपये प्रति किलो के भाव पर उपलब्ध है।

अल नीनो से फसल पर असर की चिंता
कम बारिश और अल नीनो के प्रभाव को लेकर चावल बाजार में चिंता बढ़ गई है। कारोबारियों को आशंका है कि मौसम का असर धान की पैदावार और गुणवत्ता पर पड़ सकता है। सूरज अग्रवाल के मुताबिक, गोविंद भोग जैसी कुछ किस्मों का धान बारिश के प्रति संवेदनशील होता है। ज्यादा बारिश होने पर इसकी गुणवत्ता प्रभावित हो सकती है।

कर्नाटक में गैर-बासमती चावल का उत्पादन विशेष रूप से प्रभावित हुआ है। कम मानसूनी बारिश के कारण राज्य में करीब आधी फसल की बुवाई या बढ़वार में देरी हुई है। जलाशयों में पानी का स्तर भी कम बताया गया है। ऐसे में राज्य सरकार सिंचाई के बजाय पेयजल की जरूरत को प्राथमिकता दे सकती है।

विश्लेषक एस. चंद्रशेखरन के मुताबिक, खरीफ धान की नई फसल मंडियों में पहुंचने लगी है और आने वाले कुछ हफ्तों में आवक बढ़ने की उम्मीद है। उन्होंने कहा कि एमएसपी किसानों के लिए न्यूनतम मूल्य है, अधिकतम नहीं। इस साल ऊंचे भाव से किसानों को फायदा हो रहा है, जबकि मिलरों, व्यापारियों और निर्यातकों को बढ़ती कीमतों के बीच कारोबार संभालने में मुश्किल हो रही है।

यूपी और बिहार के चावल पर भी असर
कर्नाटक में कोलम चावल की उपलब्धता कम होने से उत्तर प्रदेश और बिहार में उगाई जाने वाली कुछ किस्मों की मांग बढ़ रही है। ये किस्में कोलम चावल के विकल्प के रूप में इस्तेमाल की जाती हैं। कारोबारियों के मुताबिक, इन किस्मों के भाव 3,300 रुपये प्रति क्विंटल से ऊपर चल रहे हैं। सूरज अग्रवाल ने बताया कि कर्नाटक में कोलम चावल की स्थिति खराब होने के कारण फिलहाल इसके भाव के प्रस्ताव भी नहीं मिल रहे हैं। दूसरी ओर, पश्चिम बंगाल जैसे राज्यों में सोना मसूरी की खेती का रकबा घटा है।

उनके मुताबिक, पिछले साल तक सोना मसूरी का अच्छा भाव नहीं मिलने से कुछ किसानों ने इसकी जगह गोविंद भोग की खेती शुरू कर दी, क्योंकि इससे बेहतर आमदनी मिल रही थी। इससे पता चलता है कि एक राज्य में किसी किस्म की कमी होने पर दूसरे राज्यों में उसके विकल्पों की कीमतें भी बढ़ सकती हैं।

उत्पादन घटने का अनुमान, लेकिन सरकारी गोदामों में पर्याप्त चावल
इस साल कम बारिश के कारण भारत का खरीफ चावल उत्पादन पिछले साल के 12.393 करोड़ टन के मुकाबले कम से कम एक करोड़ टन घटने की आशंका जताई गई है। धान की खेती का रकबा भी करीब चार फीसदी घटकर 426.81 लाख हेक्टेयर रह गया है।

हालांकि, सरकारी गोदामों में चावल का पर्याप्त भंडार मौजूद है। एक सितंबर तक भारतीय खाद्य निगम के पास रिकॉर्ड 3.905 करोड़ टन चावल का स्टॉक था। इसके अलावा, उसके पास इतना धान भी था, जिससे करीब 3.075 करोड़ टन चावल तैयार किया जा सकता है।

एस. चंद्रशेखरन ने कहा कि सरकार को बाजार में हस्तक्षेप करते समय किसानों की आमदनी और उपभोक्ताओं के लिए उचित कीमतों के बीच संतुलन बनाकर चलना होगा। मौजूदा ऊंचे भाव किसानों की आय बढ़ाने का अवसर हैं, लेकिन उत्पादन में कमी और चावल की महंगाई को देखते हुए बाजार पर नजर रखना भी जरूरी है।
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