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धान की खेती पर खतरा : नदी में छोड़ा जा रहा गंदा पानी, किसान संगठनों ने सरकार से की कार्रवाई की मांग

गांव जंक्शन डेस्क, नई दिल्ली Published by: Mohammad Aamil Updated Mon, 28 Sep 2026 06:27 PM IST
सार

मन्नारगुड़ी में बिना उपचार किए सीवेज बामनी नदी में छोड़ने का आरोप है। सेरनकुलम बैराज में सीवेज जमा होने से दुर्गंध फैल रही है और पानी पर निर्भर मवेशियों को परेशानी हो रही है।

सांकेतिक तस्वीर
सांकेतिक तस्वीर - फोटो : गांव जंक्शन
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तमिलनाडु के मन्नारगुड़ी में बामनी नदी में बिना साफ किए सीवेज छोड़े जाने का मामला सामने आया है। किसान संगठनों की समन्वय समिति ने आरोप लगाया है कि नगर पालिका की ओर से छोड़ा जा रहा सीवेज सेरनकुलम बैराज में जमा हो गया है। इससे आसपास दुर्गंध फैल रही है और बैराज के पानी पर निर्भर पशुओं के लिए भी परेशानी बढ़ गई है।

240 करोड़ रुपये खर्च होने के बावजूद सीवेज नदी में छोड़ने का आरोप
ऑल फार्मर्स एसोसिएशन की समन्वय समिति के अध्यक्ष पीआर पांडियन ने 28 सितंबर को मन्नारगुड़ी में मीडिया से बातचीत में यह मुद्दा उठाया। उन्होंने कहा कि मन्नारगुड़ी नगर पालिका क्षेत्र में भूमिगत सीवेज नेटवर्क के काम के लिए 240 करोड़ रुपये आवंटित किए गए हैं, इसके बावजूद नगर पालिका कथित तौर पर बिना उपचार किए सीवेज को बामनी नदी में छोड़ रही है। उनके अनुसार, यह सीवेज सेरनकुलम बैराज में जमा हो गया है। इससे इलाके में तेज दुर्गंध फैल रही है। बैराज के पानी पर निर्भर मवेशियों को भी इससे परेशानी हो रही है।

दूसरे बैराज तक पहुंच रहा सीवेज
किसान संगठन के अनुसार, बिना साफ किए छोड़ा गया सीवेज आगे बहकर थोप्पाथनावेली बैराज तक भी पहुंच रहा है। यह बामनी नदी पर बने कई बैराजों में से एक है। बामनी नदी मुथुपेट्टई के पास थोप्पानावेली में बंगाल की खाड़ी में मिलती है।

धान की खेती के लिए अहम है बामनी नदी
पांडियन ने राज्य सरकार से मामले में जल्द हस्तक्षेप करने की मांग की। उन्होंने संबंधित विभाग के अधिकारियों को निर्देश देकर सीवेज की समस्या का स्थायी समाधान कराने की अपील की। उन्होंने कहा कि बामनी नदी मन्नारगुड़ी और आसपास के इलाकों से लेकर जिले के अंतिम छोर तक धान की खेती के लिए महत्वपूर्ण है। ऐसे में नदी को प्रदूषण से बचाने के लिए जल्द कदम उठाना जरूरी है।
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