प्रधानमंत्री धन-धान्य कृषि योजना (PMDDKY) को लागू हुए एक साल पूरा हो गया है। इस मौके पर केंद्र सरकार ने बिहार के गया, राजस्थान के नागौर और मध्य प्रदेश के उमरिया जिले को योजना के तहत बेहतर प्रदर्शन के लिए सम्मानित किया। गया जिले ने देश में पहला, नागौर ने दूसरा और उमरिया ने तीसरा स्थान हासिल किया।
केंद्रीय कृषि एवं किसान कल्याण तथा ग्रामीण विकास मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने कहा कि योजना की असली सफलता इस बात से तय होगी कि इससे किसानों की जिंदगी में कितना सकारात्मक बदलाव आता है। उन्होंने अधिकारियों और राज्यों से अपील की कि योजना के दूसरे साल में कागजी काम के बजाय जमीन पर दिखने वाले नतीजों पर ध्यान दिया जाए।
खेती की पैदावार और किसानों की आमदनी बढ़ाने पर जोर
योजना का एक साल पूरा होने पर 12 अक्टूबर को नई दिल्ली स्थित भारतीय कृषि अनुसंधान परिसर (पूसा) के भारत रत्न सी. सुब्रमण्यम सभागार में कार्यक्रम आयोजित किया गया। इसमें केंद्र और राज्य सरकारों के अधिकारियों, जिला कलेक्टरों, कृषि वैज्ञानिकों और प्रगतिशील किसानों समेत 370 से अधिक प्रतिनिधियों ने हिस्सा लिया।
शिवराज सिंह चौहान ने कहा कि योजना के पहले साल में मजबूत आधार तैयार करने पर ध्यान दिया गया। अब दूसरे साल में ऐसे काम करने होंगे, जिनका फायदा किसानों को साफ तौर पर दिखाई दे। इसके लिए खेती की पैदावार बढ़ाने, एक साल में अधिक फसलें लेने, सिंचाई और जल प्रबंधन सुधारने, किसानों को कृषि कर्ज उपलब्ध कराने और अधिक मूल्य वाली फसलों को बढ़ावा देने पर जोर दिया जाएगा। इसके अलावा फसल कटाई के बाद उपज के भंडारण की सुविधाएं बढ़ाने और किसानों की आमदनी में सुधार लाने को भी प्राथमिकता दी जाएगी।
100 जिलों को खेती और खुशहाली का मॉडल बनाने का लक्ष्य
प्रधानमंत्री धन-धान्य कृषि योजना की घोषणा केंद्रीय बजट 2025-26 में की गई थी। इसे 11 अक्टूबर 2025 को शुरू किया गया। योजना के तहत देश के 100 ऐसे जिलों को चुना गया है, जहां कृषि उत्पादकता कम है, एक साल में फसल उगाने की दर कम है और किसानों को कृषि कर्ज मिलने में दिक्कतें हैं।
योजना का उद्देश्य इन जिलों में खेती की पैदावार बढ़ाना, फसलों में विविधता लाना, टिकाऊ खेती को प्रोत्साहित करना, सिंचाई सुविधाओं में सुधार करना और किसानों के लिए कर्ज की उपलब्धता आसान बनाना है। इसके साथ ही पंचायत और ब्लॉक स्तर पर फसल कटाई के बाद उपज रखने के लिए भंडारण सुविधाएं बढ़ाने पर भी काम किया जाएगा। सरकार का लक्ष्य है कि इन 100 जिलों को कृषि विकास, बेहतर उत्पादन और किसानों की खुशहाली के उदाहरण के रूप में तैयार किया जाए।
121 मानकों पर हो रही जिलों के काम की निगरानी
योजना में हर जिले की जरूरत के हिसाब से कृषि विकास की योजना बनाई जाती है। इसमें मिट्टी की स्थिति, बारिश, फसल चक्र, पानी की उपलब्धता, बुनियादी सुविधाओं और किसानों की जरूरतों को ध्यान में रखा जाता है।
जिलों के कामकाज की निगरानी 121 मानकों के आधार पर एक विशेष डैशबोर्ड के जरिए की जा रही है। हर महीने जिलों की रैंकिंग जारी की जाती है, जिससे उनके प्रदर्शन में पारदर्शिता बनी रहे और बेहतर काम करने के लिए प्रतिस्पर्धा बढ़े। योजना को प्रभावी बनाने के लिए केंद्र और राज्य सरकारों के विभागों, जिला प्रशासन, कृषि विज्ञान केंद्रों के वैज्ञानिकों और किसानों के बीच तालमेल बढ़ाने पर भी जोर दिया गया है।
18 जिलों को छह क्षेत्रों में बेहतर काम के लिए सम्मान
कार्यक्रम में योजना के छह प्रमुख उद्देश्यों के तहत 18 जिलों को उनके बेहतर काम के लिए सम्मानित किया गया।
कृषि उत्पादकता बढ़ाने के लिए : छत्रपति संभाजीनगर (महाराष्ट्र), चित्रकूट (उत्तर प्रदेश) और गेजिंग (सिक्किम)।
फसल विविधीकरण और टिकाऊ खेती के लिए : महोबा (उत्तर प्रदेश), डिंडोरी (मध्य प्रदेश) और चमोली (उत्तराखंड)।
फसल कटाई के बाद भंडारण क्षमता बढ़ाने के लिए : टीकमगढ़ और सीधी (मध्य प्रदेश), दंतेवाड़ा (छत्तीसगढ़)।
सिंचाई सुविधाओं में सुधार के लिए : किश्तवाड़ (जम्मू-कश्मीर), दाहोद और छोटा उदयपुर (गुजरात)।
कृषि कर्ज की उपलब्धता बढ़ाने के लिए : नारायणपेट (तेलंगाना), जालौन (उत्तर प्रदेश) और श्री सत्य साईं (आंध्र प्रदेश)।
बेहतर प्रशासन और सरकारी सेवाओं के लिए : नगरकुरनूल (तेलंगाना), कच्छ (गुजरात) और हावेरी (कर्नाटक)।
इन जिलों के प्रयासों को दूसरे जिलों के लिए उदाहरण के रूप में पेश किया गया, ताकि वे भी स्थानीय जरूरतों के हिसाब से नए तरीके अपनाकर खेती में सुधार कर सकें।
पानी बचाने से लेकर बागवानी और प्राकृतिक खेती तक के प्रयास
कार्यक्रम में गढ़चिरौली जिले ने जल संरक्षण और सूखे से निपटने के उपायों की जानकारी दी। अल्लूरी सीताराम राजू जिले ने अधिक मूल्य वाली बागवानी फसलों को बढ़ावा देने से जुड़ी पहल पेश की। वहीं, बांका जिले ने ‘लिलावरन प्राकृतिक खेती भूमि पुनर्जीवन मॉडल’ के जरिए जमीन को फिर से उपजाऊ बनाने के प्रयासों को सामने रखा।
इन उदाहरणों से यह दिखाने की कोशिश की गई कि स्थानीय जरूरतों के मुताबिक योजनाएं बनाकर, किसानों की भागीदारी बढ़ाकर और सरकारी विभागों के बीच तालमेल से कृषि संबंधी समस्याओं का समाधान किया जा सकता है।
22 अक्टूबर से शुरू होगा खेत बचाओ अभियान
केंद्रीय कृषि मंत्री ने बताया कि 22 अक्टूबर से 30 नवंबर 2026 तक सभी राज्यों में ‘खेत बचाओ अभियान’ चलाया जाएगा। इसका उद्देश्य किसानों को संतुलित और जरूरत के मुताबिक उर्वरकों के इस्तेमाल के लिए जागरूक करना है।
अभियान के जरिए मिट्टी की सेहत बनाए रखने, उसकी उर्वरता बचाने, पर्यावरण की रक्षा करने और प्राकृतिक संसाधनों के संरक्षण पर जोर दिया जाएगा। मंत्री ने राज्य सरकारों और संबंधित विभागों से अभियान को सफल बनाने की अपील की।
36 केंद्रीय योजनाओं को एक साथ जोड़कर होगा काम
प्रधानमंत्री धन-धान्य कृषि योजना के तहत 11 मंत्रालयों और विभागों की 36 केंद्रीय योजनाओं को एक साझा ढांचे के तहत जोड़ा गया है। इसके साथ संबंधित राज्य सरकारों की योजनाओं को भी शामिल किया गया है, ताकि हर जिले की कृषि संबंधी जरूरतों के अनुसार काम किया जा सके।
सरकार का कहना है कि योजना के दूसरे साल में सफल पहलों का विस्तार किया जाएगा और सभी चयनित जिलों में बेहतर नतीजे हासिल करने पर ध्यान दिया जाएगा। इसके लिए केंद्र और राज्य सरकारें, जिला प्रशासन, वैज्ञानिक संस्थान और किसान मिलकर काम करेंगे।
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