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कपास उत्पादन बढ़ाने के लिए ICAR की नई रणनीति : AI, कीट-प्रतिरोधी बीज और आधुनिक तकनीक के उपयोग पर जोर

गांव जंक्शन डेस्क, नई दिल्ली Published by: Devesh Saraswat Updated Mon, 12 Oct 2026 04:57 PM IST
सार

  • ICAR ने कपास उत्पादन की बढ़ती लागत और कीटों की समस्या से निपटने के लिए नई रणनीति पेश की है।
  • इस पहल में एआई, कीट-प्रतिरोधी बीज, ड्रिप सिंचाई और आधुनिक मशीनों का इस्तेमाल शामिल है।
  • सिरसा स्थित CICR क्षेत्रीय केंद्र में उच्च स्तरीय बैठक में वैज्ञानिकों और अधिकारियों ने चर्चा की।
  • तकनीक विकसित करने के साथ-साथ उसे किसानों के खेतों तक पहुंचाना भी जरूरी बताया गया।

कपास की खेती को मजबूती देने के लिए ICAR की नई रणनीति सामने आई।
कपास की खेती को मजबूती देने के लिए ICAR की नई रणनीति सामने आई। - फोटो : गांव जंक्शन
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विस्तार
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कपास उत्पादन की बढ़ती लागत और कीटों की समस्या को देखते हुए भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद ने नई रणनीती पेश की है। इस पहल के तहत खेती-बाड़ी में एआई, कीट प्रतिरोधी बीज और आधुनिक तकनीकों का उपयोग किया जाएगा। इस नई रणनीति पर सिरसा स्थित केंद्रीय कपास अनुसंधान संस्थान (CICR) के क्षेत्रीय केंद्र में आयोजित एक उच्च स्तरीय बैठक में चर्चा की गई। इस बैठक में प्रमुख कृषि वैज्ञानिक, तीन उत्तरी राज्यों के कृषि अधिकारी और निजी क्षेत्र के प्रतिनिधि शामिल हुए।

किसानों के खेतों तक तकनीक का पहुंचना है जरूरी
बैठक की अध्यक्षता करते हुए ICAR के उप महानिदेशक (फसल विज्ञान) डॉ. डी. के. यादव ने कहा कि कपास का उत्पादन बढ़ाने के लिए केवल अच्छी किस्म के बीज ही काफी नहीं हैं, बल्कि आधुनिक तकनीक, भरोसेमंद कृषि सामग्री और समय पर वैज्ञानिक मार्गदर्शन की भी आवश्यकता है। डॉ. यादव के अनुसार, "नई तकनीक विकसित करना महत्वपूर्ण है, लेकिन यह सुनिश्चित करना भी उतना ही जरूरी है कि ये तकनीकें किसानों तक पहुंचें और उनके खेतों में प्रभावी ढंग से उपयोग की जाएं।"

उन्होंने अधिक उपज देने वाली और कीट-प्रतिरोधी कपास की किस्मों, ड्रिप सिंचाई, खेती में मशीनों के उपयोग और फसलों की निगरानी के लिए आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस आधारित सिस्टम की वकालत की, ताकि समय रहते समस्याओं की पहचान की जा सके। अधिकारियों के अनुसार, किसानों को आर्थिक नुकसान से बचाने और फसल खराब होने से रोकने के लिए नकली बीज और उर्वरकों की बिक्री पर लगाम लगाने के प्रयास भी लगातार किए जा रहे हैं।

बीमारियों पर शोध और कृषि विभागों के साथ तालमेल पर जोर
चौधरी चरण सिंह हरियाणा कृषि विश्वविद्यालय के कुलपति डॉ. बी. आर. कंबोज ने कपास में लगने वाले नए कीटों और बीमारियों पर शोध को तेज करने की मांग की। उन्होंने वैज्ञानिकों और कृषि विभागों के बीच बेहतर तालमेल पर जोर दिया, ताकि कीटों के भारी नुकसान पहुंचाने से पहले ही किसानों को सही समाधान मिल सके।

वहीं, ICAR के उप महानिदेशक (कृषि विस्तार) डॉ. राजबीर सिंह ने किसानों की मदद करने वाले केंद्र सरकार के कार्यक्रमों की जानकारी दी और वैज्ञानिक सलाह को सीधे कपास उत्पादक गांवों तक पहुंचाने की आवश्यकता पर जोर दिया। सीआईसीआर सिरसा के प्रमुख डॉ. एस. के. वर्मा ने उत्तर भारत में कपास की खेती की वर्तमान स्थिति पेश करते हुए मौसम और कीटों से जुड़ी चुनौतियों की जानकारी साझा की। प्रधान वैज्ञानिक डॉ. ऋषि कुमार ने कीटों और बीमारियों के मुख्य खतरों, उनके बचाव के उपायों और भविष्य की शोध प्राथमिकताओं के बारे में बताया।

कपास उत्पादकता मिशन 2026-31 का प्रस्ताव
सीआईसीआर के निदेशक डॉ. वी. एन. वाघमारे ने कपास की पैदावार बढ़ाने, खेती की लागत घटाने और मशीनीकरण को बढ़ावा देने के उपाय बताए। उन्होंने संस्थान की नवीनतम तकनीकों और प्रस्तावित 'कपास उत्पादकता मिशन 2026-31' के बारे में भी विस्तार से चर्चा की।

बैठक में शामिल सभी विशेषज्ञों ने इस बात पर जोर दिया कि किसानों को बेहतर बीज, सही कीट नियंत्रण, आधुनिक मशीनें और समय पर कृषि सलाह उपलब्ध कराने के लिए अनुसंधान संस्थानों, राज्य के कृषि विभागों और उद्योगों को मिलकर काम करना चाहिए। इस प्रस्तावित मिशन का मुख्य उद्देश्य कपास का उत्पादन बढ़ाना, लागत कम करना और किसानों को मौसम तथा बीमारियों के खतरों से निपटने के लिए मजबूत बनाना है।


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