छत्तीसगढ़ के बलौदाबाजार जिले में विकासखंड भाटापारा के गांव ढाबाडीह के किसानों ने पारंपरिक खेती से एक कदम आगे रखा है। अब यह किसान खेती संग बाजार के उतार-चढ़ाव को पीछे छोड़ते हुए उन्नत बीज उत्पादन की तरफ मुड़ गए हैं। इस बड़े बदलाव से किसानों की आय में लगभग 75 प्रतिशत की बढ़ोतरी हुई है। आधुनिक कृषि तकनीकों का इस्तेमाल करके अब इन किसानों को प्रति एकड़ 1.75 लाख रुपये की बचत हो रही है।
अनुबंध खेती से खत्म हुआ बाजार का खतरा
ग्राम ढाबाडीह के किसान रूपेंद्र साहू, उमा साहू, राजाराम एक्का और प्रमिला साहू पहले पारंपरिक तरीके से धान और सब्जियों की खेती किया करते थे। मौसम की अनिश्चितता और बाजार के भाव में उतार-चढ़ाव के कारण उन्हें अपनी सीमित कमाई से ही संतोष करना पड़ता था।
अपनी इस समस्या को दूर करने के लिए किसानों ने भाटापारा के उद्यान विभाग के अधिकारियों से संपर्क किया। विभाग के अधिकारियों के मार्गदर्शन और सलाह के अनुसार, इन किसानों ने एक प्रमुख बीज कंपनी के साथ अनुबंध (कॉन्ट्रैक्ट) किया और 25 एकड़ जमीन पर अच्छी गुणवत्ता वाले बीज का उत्पादन शुरू किया। कंपनी के साथ अनुबंध होने के कारण फसल के दाम पहले से ही तय रहते हैं। इससे बाजार में भाव गिरने का खतरा खत्म हो गया और साथ मिलकर सामूहिक खेती करने से मजदूरी का खर्च भी काफी कम हुआ है।
मुनाफे में हुई शानदार वृद्धि
खेती के पुराने तरीके में, जब ये किसान आठ हेक्टेयर में सब्जी और दो हेक्टेयर में धान उगाते थे, तब उन्हें प्रति एकड़ केवल एक लाख रुपये का मुनाफा होता था। लेकिन अब बदलाव के बाद, नौ हेक्टेयर क्षेत्र में सब्जी उगाने और बीज उत्पादन करने से उनकी बचत बढ़कर 1.75 लाख रुपये प्रति एकड़ तक पहुंच गई है।
उद्यान विभाग ने दिए क्रॉप सोलर ड्रायर
बारिश के मौसम में बीजों को सुखाने में आने वाली परेशानी को दूर करने के लिए भी सरकारी स्तर पर मदद दी गई है। उद्यानिकी विभाग के अनुसार, किसानों की सुविधा के लिए उन्हें दो 'क्रॉप सोलर ड्रायर' (बीज सुखाने की मशीन) प्रदान किए गए हैं। ढाबाडीह के इन किसानों की सफलता से प्रभावित होकर अब आसपास के गांवों के दूसरे किसान भी अनुबंध आधारित इस आधुनिक बीज उत्पादन को अपनाने में गहरी रुचि दिखा रहे हैं।