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नितिन गडकरी की अपील : गन्ने से सिर्फ चीनी बनाने पर निर्भर न रहें मिलें, उप-उत्पादों पर दें जोर

गांव जंक्शन डेस्क, नई दिल्ली Published by: Mohammad Aamil Updated Wed, 23 Sep 2026 11:53 AM IST
सार

केंद्रीय मंत्री नितिन गडकरी ने चीनी मिलों से केवल चीनी उत्पादन पर निर्भर न रहने की अपील की। उन्होंने गन्ने से इथनॉल, सीबीजी और दूसरे उप-उत्पाद बनाने पर जोर दिया। गडकरी के मुताबिक, चीनी रिकवरी में 1 फीसदी सुधार से सालाना 50-60 हजार करोड़ रुपये की अतिरिक्त आय हो सकती है।

केंद्रीय सड़क परिवहन मंत्री नितिन गडकरी
केंद्रीय सड़क परिवहन मंत्री नितिन गडकरी - फोटो : सोशल मीडिया
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विस्तार
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केंद्रीय सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्री नितिन गडकरी ने चीनी मिलों से गन्ने से सिर्फ चीनी बनाने के बजाय उससे बनने वाले दूसरे उत्पादों पर ध्यान देने की अपील की है। उन्होंने कहा कि ऊर्जा क्षेत्र में गन्ने के उप-उत्पादों से कमाई की बड़ी संभावनाएं हैं। मिलों को बगास से बिजली बनाने के बजाय इससे सीबीजी (कंप्रेस्ड बायोगैस) बनाने पर भी विचार करना चाहिए।

गडकरी ने मंगलवार को नई दिल्ली में नेशनल फेडरेशन ऑफ कोऑपरेटिव शुगर फैक्टरीज (NFCSF) के वार्षिक पुरस्कार समारोह में यह बात कही। उन्होंने कहा कि चीनी की कीमतों पर अंतरराष्ट्रीय बाजार, खासकर ब्राजील की स्थिति का असर पड़ता है। इसलिए केवल चीनी के कारोबार पर निर्भर रहना मिलों के लिए लंबे समय तक फायदेमंद नहीं हो सकता।

रिकवरी एक फीसदी बढ़ी तो 50-60 हजार करोड़ का फायदा
गडकरी ने चीनी मिलों को गन्ने से चीनी की रिकवरी बढ़ाने पर भी जोर दिया। उन्होंने कहा कि अगर चीनी की रिकवरी में एक फीसदी की बढ़ोतरी होती है तो इससे सालाना 50,000 से 60,000 करोड़ रुपये तक अतिरिक्त आय हो सकती है।

उन्होंने कहा कि गन्ने से बनने वाले अलग-अलग उप-उत्पादों से मिलों की आर्थिक स्थिति मजबूत हो सकती है। इससे किसानों को भी गन्ने का बेहतर भाव देने में मदद मिलेगी। गडकरी ने कहा कि उप-उत्पादों से आर्थिक रूप से मजबूत होने पर मिलें किसानों को 600 रुपये प्रति क्विंटल तक गन्ने का भाव देने की स्थिति में आ सकती हैं।

ब्राजील के कारण बदलते हैं चीनी के दाम
गडकरी ने कहा कि भारत में चीनी की कीमतों पर ब्राजील का बड़ा असर पड़ता है। उनके मुताबिक, ब्राजील दुनिया का सबसे बड़ा चीनी निर्यातक है। वहां उत्पादन अधिक होने पर दुनिया के बाजार में चीनी की उपलब्धता बढ़ती है और भारत में भी कीमतों पर दबाव आता है। वहीं, ब्राजील में उत्पादन घटने पर चीनी के दाम बढ़ सकते हैं।

उन्होंने बताया कि ब्राजील में चीनी उत्पादन की लागत करीब 23 रुपये प्रति किलो है, जबकि भारत में यह लागत करीब 33-34 रुपये प्रति किलो बैठती है। उन्होंने कहा कि भारतीय मिलों को इस अंतर को देखते हुए अपनी उत्पादन लागत घटाने और नए उत्पाद विकसित करने पर ध्यान देना चाहिए।

गन्ने के रस से सीधे इथनॉल बनाने पर जोर
बंद चीनी मिलों को दोबारा शुरू करने के सवाल पर गडकरी ने गन्ने की खेती जारी रखते हुए गन्ने के रस से सीधे इथनॉल बनाने वाली परियोजनाओं पर जोर दिया। उन्होंने कहा कि मिलों को केवल चीनी उत्पादन पर निर्भर रहने के बजाय एथनॉल और दूसरे उत्पादों की ओर बढ़ना चाहिए। उन्होंने कहा, “आप केवल चीनी पर निर्भर रहकर अपना कारोबार नहीं चला सकते। आपको उप-उत्पादों की ओर बढ़ना होगा।”

अक्टूबर में 100 फीसदी इथनॉल वाली इनोवा
गडकरी ने बताया कि टोयोटा मोटर्स ने अक्टूबर में अपनी पहली 100 फीसदी इथनॉल से चलने वाली इनोवा फ्लेक्स-फ्यूल एसयूवी लॉन्च करने के लिए उनसे अनुरोध किया है। उनके अनुसार, यह वाहन बिजली भी पैदा करेगा और इस बिजली का इस्तेमाल वाहन चलाने में किया जा सकेगा। इससे वाहन चलाने की लागत कम करने में मदद मिल सकती है।

बगास से सीबीजी बनाने की संभावना
गन्ने से निकलने वाले बगास का इस्तेमाल अभी चीनी मिलों में को-जनरेशन से बिजली बनाने में किया जाता है। गडकरी ने कहा कि मौजूदा दरों पर बगास से बिजली बनाना उतना फायदेमंद नहीं है। इसके बजाय बगास का इस्तेमाल सीबीजी बनाने में किया जा सकता है। उन्होंने कहा कि सरकार सीबीजी को उचित कीमत पर खरीदने के लिए प्रतिबद्ध है।

सरकार पंजाब और हरियाणा में हर साल निकलने वाले करीब 220 लाख टन धान के पुआल से सीबीजी बनाने को बढ़ावा दे रही है। इसके अलावा बांस, बगास और नेपियर घास से भी सीबीजी बनाने की योजनाओं को प्रोत्साहित किया जा रहा है।

1,908 सीबीजी प्लांट पंजीकृत
गडकरी के अनुसार, देश में अब तक 1,908 सीबीजी प्लांट पंजीकृत हो चुके हैं। इनमें से 132 प्लांट चालू हैं, जबकि 340 प्लांट निर्माणाधीन हैं। चालू प्लांटों की कुल क्षमता करीब 900-1,000 टन प्रतिदिन है।

किसानों के हित में तकनीक पर जोर
गडकरी ने कहा कि कृषि क्षेत्र में कीमतों को लेकर चर्चा अक्सर शहरों के नजरिए से होती है। जब प्याज या टमाटर की कीमत बहुत कम हो जाती है और किसान अपनी उपज सड़क पर फेंकने को मजबूर होते हैं, तब इस समस्या पर उतनी चर्चा नहीं होती। उन्होंने इस स्थिति से निपटने के लिए तकनीक और कृषि प्रसंस्करण को बढ़ावा देने की जरूरत बताई। उन्होंने चीनी मिलों से कहा कि गन्ने से अधिक से अधिक मूल्य हासिल करने के लिए नई तकनीकों को अपनाएं और चीनी के साथ एथनॉल, सीबीजी, बिजली तथा दूसरे उप-उत्पादों पर भी काम करें।
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