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चीन-रूस से यूरिया आयात में भारी उछाल : 11 महीनों में भारत ने मंगाया 35 लाख टन से ज्यादा खाद, जानें सब कुछ...

गांव जंक्शन डेस्क, नई दिल्ली Published by: Devesh Saraswat Updated Sat, 14 Mar 2026 08:17 PM IST
सार

खाद की जरूरत को पूरा करने के लिए भारत चीन और रूस पर तेजी से निर्भर हो रहा है। सरकार द्वारा लोकसभा में दी गई जानकारी के मुताबिक, चालू वित्त वर्ष के दौरान चीन और रूस से यूरिया समेत अन्य उर्वरकों का आयात काफी बढ़ गया है।  अप्रैल 2025 से फरवरी 2026 के बीच भारत ने अकेले चीन से रिकॉर्ड मात्रा में यूरिया मंगाया है, जो पिछले तीन वर्षों में सबसे ज्यादा है।
 

चीन-रूस से यूरिया आयात में उछाल।
चीन-रूस से यूरिया आयात में उछाल। - फोटो : सोशल मीडिया
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विस्तार
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खाद की जरूरत को पूरा करने के लिए भारत चीन और रूस पर तेजी से निर्भर हो रहा है। सरकार द्वारा लोकसभा में दी गई जानकारी के मुताबिक, चालू वित्त वर्ष के दौरान चीन और रूस से यूरिया समेत अन्य उर्वरकों का आयात काफी बढ़ गया है।  अप्रैल 2025 से फरवरी 2026 के बीच भारत ने अकेले चीन से रिकॉर्ड मात्रा में यूरिया मंगाया है, जो पिछले तीन वर्षों में सबसे ज्यादा है।

चीन से आयात के आंकड़े
केंद्रीय उर्वरक राज्य मंत्री अनुप्रिया पटेल ने लोकसभा में एक लिखित जवाब में बताया कि चीन से भारत का यूरिया आयात इस साल बहुत तेजी से बढ़ा है - अप्रैल 2025 से फरवरी 2026 के बीच चीन से 21.24 लाख टन यूरिया आया है। तुलना के लिए देखें तो, पूरे वित्त वर्ष 2024-25 में यह आंकड़ा सिर्फ 0.99 लाख टन था। इसी दौरान चीन से 5.11 लाख टन डीएपी, 0.28 लाख टन एमओपी और 9.61 लाख टन एनपीके खाद भी भारत पहुंची है।

रूस से भी बढ़ रहा खाद का भंडार
रूस से भी भारत का उर्वरक आयात इस साल बढ़ा है। फरवरी तक रूस से यूरिया का आयात 13.99 लाख टन रहा, जो 2024-25 के पूरे साल के 9.23 लाख टन के मुकाबले काफी ज्यादा है। इसके अलावा, रूस से इस साल 7.55 लाख टन डीएपी, 12.97 लाख टन एमओपी और 21 लाख टन एनपीके फर्टिलाइजर भी भारत मंगवा चुका है।

अगर सिर्फ चीन और रूस की बात करें, तो इस चालू वित्त वर्ष में फरवरी तक दोनों देशों से कुल 35.23 लाख टन यूरिया का आयात हुआ है।

क्या देश में खाद की कमी है?
आयात के इतने बड़े आंकड़ों के बीच सरकार ने देश में खाद की उपलब्धता पर भी स्थिति स्पष्ट की है। मंत्री के अनुसार देश में यूरिया की कुल जरूरत करीब 370.84 लाख टन है, जबकि उपलब्धता इससे कहीं ज्यादा यानी 432.44 लाख टन है।अब तक डायरेक्ट बेनिफिट ट्रांसफर (DBT) के जरिए यूरिया की 381.59 लाख टन बिक्री हो चुकी है।

सरकार ने जानकारी दी कि डीएपी और पोटाश जैसे उर्वरक ओपन जनरल लाइसेंस के दायरे में आते हैं। इसका मतलब है कि कंपनियां अपनी व्यावसायिक जरूरतों और बाजार की स्थिति को देखते हुए इन्हें खुद मंगाने या बनाने के लिए स्वतंत्र हैं। यह रिपोर्ट साफ करती है कि भारत अपनी खेती की जरूरतों को पूरा करने के लिए चीन और रूस जैसे देशों से उर्वरक आयात पर जोर दे रहा है ताकि किसानों को खाद की कमी न हो।

 
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