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समुद्री मछली पालन : नावों में लगेगा GPS, तय होगी मछुआरों की सीमा, बॉर्डर क्रॉस करते ही बजेगा अलर्ट

गांव जंक्शन डेस्क, नई दिल्ली Published by: Mohammad Aamil Updated Mon, 28 Sep 2026 12:55 PM IST
सार

तमिलनाडु और आंध्र प्रदेश के 25 मछुआरा गांवों के प्रतिनिधियों ने पुलिकट झील में सीमा विवाद रोकने के लिए GPS आधारित व्यवस्था लागू करने का सुझाव दिया है। नावों में GPS ट्रांसपोंडर लगाने से सीमा के करीब पहुंचते ही मछुआरों और दोनों राज्यों के मरीन पुलिस कंट्रोल रूम को अलर्ट मिल सकेगा।

समुद्री मछली पालन
समुद्री मछली पालन - फोटो : सोशल मीडिया
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विस्तार
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तमिलनाडु और आंध्र प्रदेश के बीच पुलिकट झील में मछली पकड़ने की सीमा को लेकर होने वाले विवादों को खत्म करने के लिए अब आधुनिक तकनीक का इस्तेमाल करने का प्रस्ताव रखा गया है। दोनों राज्यों के 25 मछली पकड़ने वाले गांवों के प्रतिनिधियों ने सर्वसम्मति से मांग की है कि झील में सीमा तय करने के लिए स्थायी GPS ट्रैकिंग सिस्टम लगाया जाए।

इस व्यवस्था के तहत झील में मछली पकड़ने वाली नावों की स्थिति पर नजर रखी जाएगी और सीमा के करीब पहुंचने पर नाव में तुरंत अलर्ट दिया जाएगा। संबंधित अधिकारियों को भी इसकी सूचना मिल सकेगी।

नमकीन पानी में खराब हो जाते हैं पुराने सीमा चिन्ह
दोनों राज्यों के अधिकारियों की शनिवार को गुम्मिडीपोंडी पंचायत यूनियन कार्यालय में बैठक हुई। इसमें पुलिकट झील में लंबे समय से चले आ रहे क्षेत्रीय और मछली पकड़ने से जुड़े विवादों पर चर्चा की गई। मछुआरों ने बताया कि अभी सीमा बताने के लिए कई जगह ताड़ के पेड़ के तनों का इस्तेमाल किया जाता है। ये तने खारे पानी में लंबे समय तक टिक नहीं पाते और सड़ जाते हैं।

इससे सीमा की पहचान मुश्किल हो जाती है और दोनों राज्यों के मछुआरों के बीच विवाद की स्थिति बनती है। इसी समस्या को देखते हुए मछुआरों ने पानी के अंदर स्थायी खंभे या दूसरे भौतिक निशान लगाने के बजाय GPS आधारित डिजिटल सीमा तय करने का सुझाव दिया।

नावों में लगाए जाएंगे GPS ट्रांसपोंडर
प्रस्ताव के अनुसार पुलिकट झील में चलने वाली मोटर वाली और पारंपरिक नावों में GPS ट्रांसपोंडर लगाए जाएंगे। यह उपकरण नाव की सही स्थिति की जानकारी देगा। नेशनल सेंटर फॉर कोस्टल रिसर्च (NCCR) जैसी एजेंसियां डिजिटल समुद्री सीमा के सटीक निर्देशांक तय करने में मदद कर सकती हैं।

यदि कोई नाव तय सीमा के करीब पहुंचती है या सीमा पार करती है तो नाव पर रियल टाइम अलर्ट मिलेगा। साथ ही तमिलनाडु के तिरुवल्लूर और आंध्र प्रदेश के तिरुपति के मरीन पुलिस कंट्रोल रूम को भी इसकी सूचना भेजी जा सकेगी।

GPS से छेड़छाड़ पर कार्रवाई का प्रस्ताव
अधिकारियों के मुताबिक तमिलनाडु मरीन फिशरीज रेगुलेशन एक्ट में प्रस्तावित संशोधनों के साथ इस व्यवस्था को जोड़ा जा सकता है। इसमें नाव के GPS ट्रांसपोंडर को जानबूझकर बंद करने या उसके साथ छेड़छाड़ करने को अपराध बनाने का प्रावधान प्रस्तावित है। इससे नावों की निगरानी और सीमा व्यवस्था को प्रभावी बनाने में मदद मिलने की उम्मीद है।

2014 के विवाद के बाद से तनाव
बैठक में मछुआरा समुदाय के प्रतिनिधियों ने कहा कि दोनों राज्यों के मछुआरों के बीच करीब एक दशक से तनाव की स्थिति बनी हुई है। इसकी एक बड़ी घटना अप्रैल 2014 में हुई थी, जब तमिलनाडु के चिन्ना मंगोडु गांव में घरों, नावों और मछली पकड़ने के जाल में आग लगाए जाने की घटना सामने आई थी।

स्थानीय प्रतिनिधियों के मुताबिक तमिलनाडु के मछुआरों के खिलाफ करीब 199 पुलिस मामले अभी लंबित हैं। गिरफ्तारी और नए विवाद के डर से स्थानीय मछुआरे पिछले 10 वर्षों से आंध्र प्रदेश के अधिकार क्षेत्र वाले पानी में जाने से बचते रहे हैं। मछुआरा प्रतिनिधियों ने कहा कि स्थायी शांति के लिए दोनों राज्य सरकारों को इन लंबित मामलों को जल्द निपटाने या आपसी सहमति से वापस लेने की दिशा में कदम उठाने चाहिए।

झील में पानी और मछलियों की कमी भी बड़ी समस्या
पुलिकट झील में गाद जमा होने और गर्मियों में पानी का स्तर कम होने से झील के समुद्र से जुड़े रास्ते प्रभावित होते हैं। इससे समुद्री मछलियों की आवाजाही कम हो जाती है और दोनों राज्यों के मछुआरों को सीमित और उथले पानी में मछली पकड़नी पड़ती है। इसी वजह से मछलियों के लिए उपलब्ध क्षेत्र कम होता है और सीमा को लेकर विवाद बढ़ने की स्थिति बनती है।

समुद्र का मुहाना खोलने पर ₹133.11 करोड़ की परियोजना
मछलियों की संख्या बढ़ाने और झील में समुद्री पानी का प्रवाह बेहतर करने के लिए केंद्र सरकार की ओर से ₹133.11 करोड़ की परियोजना पर काम किया जा रहा है। केंद्रीय मत्स्य मंत्रालय यह परियोजना रायडोरुवु समुद्री मुहाने को खोलने और उसे स्थिर करने के लिए लागू कर रहा है।

तिरुपति के सांसद मद्दिला गुरुमूर्ति की ओर से इस संबंध में किए गए अनुरोध के बाद परियोजना को आगे बढ़ाया गया है। समुद्र का मुहाना खुलने से झील में पानी और मछलियों की आवाजाही बेहतर होने की उम्मीद है। इससे मछलियों की उपलब्धता बढ़ने और दोनों राज्यों के मछुआरों के बीच सीमा को लेकर होने वाले विवाद कम होने की संभावना जताई गई है।

बैठक में पोन्नेरी और आंध्र प्रदेश के सुलुरपेटा के विधायक, तिरुवल्लूर की जिला कलेक्टर एस. कविता और तिरुपति के अतिरिक्त जिला कलेक्टर आर. गोविंदा राव समेत दोनों राज्यों के अधिकारी और मछुआरा प्रतिनिधि शामिल हुए।
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