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जंगली जानवरों से फसल नुकसान पर बढ़ेगा मुआवजा : AI से होगी निगरानी... सरकार ला रही नई नीति

गांव जंक्शन डेस्क, नई दिल्ली Published by: Mohammad Aamil Updated Mon, 28 Sep 2026 12:43 PM IST
सार

केरल सरकार मानव-वन्यजीव संघर्ष से निपटने के लिए CMC नीति लाने की तैयारी कर रही है। इसके तहत जंगली जानवरों से फसल नुकसान का मुआवजा बढ़ाने और प्रभावित किसानों को तय समय में भुगतान करने की व्यवस्था होगी। जंगलों की सीमा पर AI आधारित सुरक्षा तकनीक लगाने की भी योजना है।

सांकेतिक तस्वीर
सांकेतिक तस्वीर - फोटो : AI Image
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केरल में इंसानों और जंगली जानवरों के बीच बढ़ते संघर्ष से निपटने के लिए सरकार नई कंटेनमेंट, मिटिगेशन एंड कंपनसेशन (CMC) नीति लाने की तैयारी कर रही है। राज्य के वन मंत्री शिबू बेबी जॉन ने कहा कि इस नीति के तहत जंगली जानवरों से फसलों और दूसरी संपत्तियों को होने वाले नुकसान का मुआवजा बढ़ाया जाएगा। साथ ही, प्रभावित किसानों को तय समय के भीतर मुआवजा दिलाने की व्यवस्था की जाएगी। मंत्री ने यह बात एसोसिएशन ऑफ प्लांटर्स ऑफ केरल (APK) की 87वीं वार्षिक आम बैठक में कही।

जंगल और घास के मैदान किए जाएंगे विकसित
मंत्री ने कहा कि सरकार प्राकृतिक जंगलों को फिर से विकसित करने और घास के मैदान बढ़ाने पर काम कर रही है। जंगलों की सीमा से लगे इलाकों में AI आधारित सुरक्षा व्यवस्था भी विकसित करने की योजना है, ताकि जंगली जानवरों की गतिविधियों पर नजर रखी जा सके और मानव-वन्यजीव संघर्ष को कम किया जा सके।

उन्होंने यह भी कहा कि पिछले कुछ वर्षों में इंसानी गतिविधियों के कारण भी मानव और वन्यजीवों के बीच टकराव बढ़ा है। सरकार खेती में विविधीकरण, कृषि उत्पादों में मूल्य संवर्धन और पर्यटन से जुड़े प्रस्तावों पर भी विचार करने को तैयार है।

मुआवजा दिए बिना जमीन नहीं ली जाएगी
वन मंत्री ने कहा कि आगे से सेक्शन 3 के तहत कोई जमीन मुआवजा दिए बिना अधिग्रहित नहीं की जाएगी। इससे जमीन मालिकों के हितों की रक्षा करने की बात कही गई है। जंगली जानवरों से फसल नुकसान के लिए बीमा जैसी व्यवस्था की मांग

APK की बैठक में सरकार से जंगली जानवरों के कारण होने वाले फसल नुकसान के लिए मोटर बीमा जैसी मुआवजा व्यवस्था शुरू करने की मांग की गई। इसका उद्देश्य नुकसान होने पर किसानों को राहत देने की प्रक्रिया को आसान और समयबद्ध बनाना है।

APK के अध्यक्ष टी. आर. राधाकृष्णन ने कहा कि बागान क्षेत्र के सामने उत्पादन लागत में लगातार बढ़ोतरी बड़ी चुनौती है। उन्होंने कहा कि बिना मजदूरों पर अतिरिक्त बोझ डाले और मजदूरी से जुड़ी लागत बढ़ाए बिना कारोबार में विविधता लाने के विकल्प तलाशे जा रहे हैं। उन्होंने एग्रोफॉरेस्ट्री, मूल्य संवर्धन, ब्रांडिंग और प्लांटेशन टूरिज्म को क्षेत्र की आय बढ़ाने के संभावित रास्ते बताया।

भूमि उपयोग और ESZ पर सरकार से चर्चा जारी
राधाकृष्णन ने कहा कि सरकार के साथ भूमि उपयोग से जुड़े कई मुद्दों पर बातचीत जारी है। इनमें इको-सेंसिटिव जोन (ESZ) की अधिसूचना और प्रस्तावित भूमि सुधार शामिल हैं। उन्होंने प्रमुख बाजारों, खासकर खाड़ी देशों तक कृषि और बागान उत्पाद पहुंचाने के लिए सुरक्षित और भरोसेमंद परिवहन मार्ग विकसित करने पर भी उद्योग स्तर पर खुली चर्चा की मांग की।

विविधीकरण का दायरा 5 से बढ़ाकर 30% करने की मांग
UPASI के उपाध्यक्ष अनिल मैथ्यू, जो बैठक में मुख्य अतिथि थे, ने कहा कि बागान क्षेत्र बढ़ती उत्पादन लागत, जलवायु परिवर्तन और मानव-वन्यजीव संघर्ष जैसी कई चुनौतियों का सामना कर रहा है। उन्होंने इन समस्याओं से निपटने के लिए फसल और गतिविधियों में विविधीकरण तथा टिकाऊ खेती को बढ़ावा देने की जरूरत बताई।

उन्होंने बागानों में विविधीकरण की मौजूदा सीमा 5 प्रतिशत से बढ़ाकर 30 प्रतिशत करने की मांग की। साथ ही मानव-वन्यजीव संघर्ष को राज्य आपदा घोषित करने और अंतिम ESZ अधिसूचना में बागानों तथा कृषि भूमि को इसके दायरे से बाहर रखने की मांग की।
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