खेती-बाड़ी में कीटनाशकों का छिड़काव किसानों को नुकसान पहुंचा सकता है। कई मामले ऐसे सामने आए हैं, जिसमें कीटनाशक से सीधा संपर्क एक जानलेवा गलती साबित हुई है। कीटनाशकों के इस खतरे और कुछ सावधानियों को दिमाग में रखकर ही किसानों को फसलो ंमें संतुलित और जरूरत पड़ने पर ही कीटनाशकों का छिड़काव करना चाहिए।
इन बातों का रखें खास ध्यान
छिड़काव करते समय हमेशा दस्ताने, चश्मा, मास्क और पूरी बाजू के कपड़े पहनें। रसायन की थोड़ी सी भी मात्रा सेहत को नुकसान पहुंचा सकती है। छिड़काव खत्म होने के तुरंत बाद अपने हाथ अच्छी तरह धोएं और कपड़े बदल लें। इससे केमिकल के अंश आपके शरीर या कपड़ों के जरिए घर तक नहीं पहुंचेंगे।छिड़काव के दौरान दूसरे लोगों और पालतू जानवरों को खेत से दूर रखें। हर छिड़काव के बाद टंकी, नोजल और पाइप की अच्छी तरह धोएं। वहीं, कीटनाशकों का भंडारण ऐसी जगह करें जहां से पानी-चारे आदि में उसकी पहुंच की संभावना न हो।
छिड़काव का सही समय क्या है?
उत्तर भारत के कई हिस्सों में इन दिनों तेज हवाओं का दौर जारी है। तेज हवा के दौरान छिड़काव से बचें। यह सलाह बारिश के मौसम में भी लागू होती है। छिड़काव हमेशा सुबह जल्दी या शाम के समय करना चाहिए।
छिड़काव के दौरान भूलकर भी न करें ये गलतियां
डिब्बे पर लिखे निर्देशों को पढ़े बिना अलग-अलग रसायनों को आपस में न मिलाएं। गलत मिश्रण से फसल को नुकसान पहुंच सकता है। अधिक कीटनाशक के इस्तेमाल से बचें, क्योंकि यह फसल को तनाव में डाल सकता है। तालाब, नदी या पशुओं के रहने की जगह के बहुत करीब छिड़काव न करें। हमेशा एक सुरक्षित दूरी बनाए रखें। अगर मशीन का नोजल सही दिशा में नहीं है या प्रेशर बहुत कम या ज्यादा है, तो दवा पूरे खेत में एक समान नहीं पहुंचेगी।
ड्रोन तकनीक का उपयोग करें
कीटनाशकों से कम से कम संपर्क रखने के लिए किसान ड्रोन तकनीक का उपयोग कर सकते हैं। यह तकनीक कीटनाशकों का सटीक तरीके से छिड़काव करती है, जिससे दवा की बर्बादी और खपत कम होती है।