महाराष्ट्र के कई हिस्सों में अनार की चोरों से हिफाजत के लिए किसान सीसीटीवी कैमरे का सहारा ले रहे हैं। बीते साल चोरों ने अनार चोरी की कई घटनाओं को अंजाम दिया था। इस साल किसान कोई जोखिम नहीं लेना चाहते, जिस वजह से पुणे, सोलापुर, नासिक और अहिल्या नगर के अनार बागवान तकनीक का उपयोग करने लगे हैं। खास बात यह है कि यह कैमरे अनार के पकने के करीब होने के चरण से तुड़ाई के चरण तक कुछ हफ्तों के लिए लगाए जाते हैं।
ये कैमरे सौर उर्जा से चलते हैं रात में भी रिकॉर्ड करने में सक्षम है। बता दें कि प्रदेश में अनार तुड़ाई का सीजन जून महीने में शुरू होता है। बीते तुड़ाई सीजन के दौरान चोरों से प्रभावित इलाकों के बागों में कैमरे महंगे अनारों की सुरक्षा करते दिखाई दिए।
पारंपरिक रखवाली की जगह ले रही तकनीक
पारंपरिक नजरिए से फसलो ंकी चोरी से रखवाली के लिए गांव के किसान बारी-बारी से खेत-बागों की गशत करते थे। लेकिन, इस मोर्चों पर भी तकनीक दस्तक दे रही है। बाजार में किफायती दाम पर ऐसे कैमरे मिल रहे है, जो किसानों को घर बैठे मोबाइल पर खेत-बाग को लाइव वीडियो भेजते हैं। इन कैमरों में कई दूसरी खासियत भी हैं, जैसे एक अनार बागवान ने अपने खेत में ऐसा कैमरा लगाया है, जो बाग में हलचल होने पर मोबाइल पर अलार्म बजा देता है।
भगवा अनार की ऊंची कीमत और चोरी का खतरा
जानकारी के मुताबिक, पिछले साल जुलाई और अगस्त महीने में पुणे के शिरूर तालुका, सोलापुर जिले के सांगोला, अहिल्या नगर के श्रीरामपुर और नासिक जिले के देवला से उच्च मूल्य वाले बड़े आकार के अनारों की चोरी के कई मामले सामने आए थे। चोरी का मुख्य कारण अनार की बढ़ती कीमतें थीं। भगवा किस्म के अनार को भारत की सबसे बेहतरीन अनार किस्मों में गिना जाता है। अपने गहरे लाल रंग और बेहतर गुणवत्ता के कारण इसे निर्यात भी किया जाता है और बाजार में इसकी कीमत सबसे ज्यादा मिलती है। इसी वजह से यह किस्म चोरों के निशाने पर रहती है। पिछले साल चोरी के मामलों में पुणे और अन्य जगहों से कुछ स्थानीय लोगों की गिरफ्तारी हुई थी, लेकिन किसी बड़े सरगना को नहीं पकड़ा जा सका।
तेंदुए का खतरा और किसानों की मजबूरी
सांगोला, शिरूर और देवला के कुछ इलाकों में पारंपरिक रखवाली करना जान को जोखिम में डालने जैसा है, क्योंकि तेंदुए वाले इलाकों में रात के अंधेरे में बागों में घूमना घातक साबित हो सकता है।