पारंपरिक फसलों का साथ छोड़कर किसान नकदी फसलों की ओर रुख कर रहे हैं। राजस्थान के चित्तौड़गढ़ जिले के चिकारड़ा क्षेत्र में किसानों को गेंदे की खेती रास आ रही है। इस इलाकों के नीमगांव, नाना खेड़ा, झाड़सादड़ी, भाटोली समेत कई गांवों में किसान करीब 60 से 70 बीघा रकबे में गेंदे के फूल उगा रहे हैं।
खास बात यह है कि गेंदे की खेती से होने वाली नियमित कमाई ने किसानों का इसकी ओर रुझान बढ़ाया है।
अंबर येलो से शिवराज किंग तक कई उन्नत किस्में
इलाके में किसान कई तरह की उन्नत गेंदे की किस्म उगा रहे हैं, जिनमें अंबर येलो, लड्डू येलो, चाइनीज बॉल, सिंदूर ऑरेंज और शिवराज किंग शामिल हैं।
रोपाई के एक महीने बाद फूलों का उत्पादन शुरू
गेंदे की बुवाई की नींव नर्सरी में रखी जाती है, जहां बीजों की बुवाई होती है और एक महीने बाद पौधे खेत में रोपे जाते हैं। रोपाई के एक महीने बाद पौधों पर फूल दिखने लगते हैं। इसका एक चक्र तीन से चार महीने का होता है। सामान्य गेंदा और चाइनीज गेंदे मेें काफी अंतर होता है। सामान्य गेंदा जहां रोजाना एक से 1.5 क्विंटल प्रति बीघा फूल देता है, वहीं, चाइनीज गेंदे की उपज 3 क्विंटल तक होती है। इसके अलावा एक चाईनीज गेंदे का फूल 100 से 150 ग्राम तक का होता है।
रोजाना मंडी पहुंच रहे ताजे फूल
इलाके के किसान शाम के समय फूलों को तोड़कर थैलियों में पैक करते हैं। अगली सुबह ये फूल लक्ष्मीपुरा टोल नाके से पिकअप गाड़ियों के जरिए उदयपुर मंडी भेजे जाते हैं। यहां से रोजाना 4-5 गाड़ियां उदयपुर जाती हैं। इसके अलावा निंबाहेड़ा, कोटा, अजमेर और मध्य प्रदेश के बाजारों में भी फूलों की सप्लाई हो रही है।
साल में तीन फसलों ले रहे किसान, कमाई कितनी?
सामान्य दिनों में गेंदे का फूल 20 से 30 रुपये प्रति किलो बिकता है। त्योहारों पर मांग बढ़ने से दाम और बढ़ जाते हैं, हालांकि आवक ज्यादा होने पर भाव 3 से 5 रुपये तक भी गिर जाते हैं। किसान साल भर में 3 बार यह फसल लेते हैं, और हर फसल से उन्हें करीब डेढ़ लाख रुपये की आमदनी हो जाती है। नीमगांव के किसान मिट्ठू लाल बावरी और प्रभु लाल बावरी के अनुसार, इसमें रोगों की समस्या कम है और सही किस्म चुनने पर यह खेती पारंपरिक फसलों से बहुत ज्यादा लाभदायक है।