यूपी में चकबंदी की प्रक्रिया ने रफ्तार पकड़ी है। चकबंदी निदेशालय के ताजा आंकड़ों के अनुसार, साल 2017 के मुकाबले 2025 तक चकबंदी की प्रक्रिया पूरी करने वाले गांवों की संख्या में बड़ी बढ़ोतरी दर्ज की गई है। साल 2017 में प्रदेश के 1,925 गांवों में चकबंदी की प्रक्रिया पूरी हुई थी। वहीं, 2025 तक यह संख्या बढ़कर 3,192 गांव हो गई है। निदेशालय के अनुसार, इन सभी गांवों में चकबंदी का काम पूरा करके जमीन के कागजात वापस तहसीलों को सौंप दिए गए हैं। इस कदम से जमीन से जुड़े कागजातों को व्यवस्थित करने और किसानों के राजस्व से जुड़े कामों को तेजी से आगे बढ़ाने में काफी मदद मिली है।
21 लाख से अधिक मामलों का किया गया निपटारा
किसानों के जमीन विवादों को सुलझाने में भी अदालतों ने तेजी दिखाई है। निदेशालय के आंकड़ों के अनुसार, वर्ष 2017 तक जहां 12.55 लाख से अधिक वादों (मुकदमों) का निस्तारण किया गया था, वहीं वर्ष 2025 तक यह आंकड़ा बढ़कर 21.12 लाख के पार पहुंच गया। सरकारी रिपोर्ट बताती है कि पिछले आठ सालों में कुल 21 लाख 12 हजार 784 मामलों को सुलझाया गया है। किसानों के भूमि विवादों को खत्म करने की दिशा में इसे एक बड़ी उपलब्धि माना जा रहा है।
531 चकबंदी न्यायालयों का हुआ कंप्यूटरीकरण
चकबंदी व्यवस्था में पारदर्शिता लाने और इसे तकनीक से जोड़ने के लिए अदालतों के कंप्यूटरीकरण पर भी विशेष ध्यान दिया गया है। निदेशालय के मुताबिक, वर्ष 2017 में इस मामले में स्थिति शून्य थी (यानी कंप्यूटर की व्यवस्था नहीं थी), लेकिन 2025 तक 531 न्यायालयों को पूरी तरह से कंप्यूटरीकृत कर दिया गया है। इनमें उप संचालक चकबंदी, बंदोबस्त अधिकारी चकबंदी और चकबंदी अधिकारी के न्यायालयों के साथ-साथ 180 सहायक चकबंदी अधिकारियों के न्यायालय भी शामिल हैं। इससे अदालतों का कामकाज पहले से ज्यादा व्यवस्थित हो गया है।
चकबंदी प्रक्रिया से जुड़ी योजना के तहत 1,302 नए गांव शामिल
इसके अलावा चकबंदी प्रक्रिया के नवप्रसार के तहत भी कई गांवों को जोड़ा गया है। विभागीय आंकड़ों के अनुसार, पिछले आठ वर्षों में चकबंदी प्रक्रिया में कुल 1,302 गांवों को शामिल किया गया है। वहीं, साल 2017 में इस श्रेणी के तहत 2,468 गांवों की स्थिति दर्ज थी। आंकड़ों में इसे पिछले आठ वर्षों के दौरान चकबंदी कार्यों में शामिल किए गए गांवों के रूप में दर्शाया गया है।