उत्तर प्रदेश के आम की पहुंच अब देश की सीमाओं से आगे विदेशी बाजारों तक हो रही है। डीजीसीआईएस के आंकड़ों के अनुसार, वित्तीय वर्ष 2021-22 से 2025-26 के बीच उत्तर प्रदेश से कुल 9,084.41 मीट्रिक टन आम का निर्यात हुआ है। यूएई, सऊदी अरब, कतर समेत अन्य खाड़ी देश और नेपाल उत्तर प्रदेश के आम के प्रमुख विदेशी बाजार हैं।
उत्तर प्रदेश सरकार के अनुसार, किसानों की उपज को व्यापक बाजार उपलब्ध कराने के लिए उत्पादन के साथ ब्रांडिंग, पैकेजिंग, प्रसंस्करण और निर्यात सुविधाओं के विकास पर जोर दिया जा रहा है। प्रमुख आम उत्पादक क्षेत्रों में पैक हाउस और निर्यात सुविधाएं विकसित की गई हैं। निर्यातकों को आर्थिक प्रोत्साहन भी दिया जा रहा है।
बाग से विदेशी बाजार तक तैयार हो रही निर्यात की कड़ी
लखनऊ, सहारनपुर, अमरोहा, गोरखपुर और वाराणसी में विकसित पैक हाउस आम को निर्यात के लिए तैयार करने में अहम भूमिका निभा रहे हैं। यहां आम की छंटाई, ग्रेडिंग, ट्रीटमेंट और पैकेजिंग की जाती है।
मंडी परिषद के पैक हाउस में अंतरराष्ट्रीय मानकों के अनुसार हॉट वाटर ट्रीटमेंट और वेपर हीट ट्रीटमेंट की सुविधा उपलब्ध है। एपीडा और उत्तर प्रदेश मंडी परिषद के समन्वित प्रयासों से पैक हाउस का समय से प्रमाणीकरण भी कराया गया है। इससे प्रदेश में ही आम को विदेशी बाजारों के मानकों के अनुसार तैयार करने की सुविधा मिल रही है।
निर्यात में चौसा की हिस्सेदारी करीब 55 प्रतिशत
उत्तर प्रदेश से निर्यात होने वाले आम में चौसा की हिस्सेदारी करीब 55 प्रतिशत है। इसके बाद दशहरी की हिस्सेदारी करीब 25 प्रतिशत और रटौल की करीब 15 प्रतिशत है। चौसा के बेहतर टिकाऊपन और अपेक्षाकृत लंबी शेल्फ लाइफ को लंबी दूरी के विदेशी बाजारों के लिए अनुकूल बताया गया है। उत्तर प्रदेश स्टेट हॉर्टिकल्चर एक्सपोर्ट प्रमोशन बोर्ड के सदस्य सतीश कुमार सिंह के अनुसार, मलीहाबाद का दशहरी अपनी मिठास और खुशबू, बागपत का रटौल अपने विशिष्ट स्वाद-सुगंध और बनारसी लंगड़ा अपने खास स्वाद के लिए पहचान रखता है। आम्रपाली और पूर्वांचल के गवरजीत को भी व्यापक बाजार से जोड़ने के प्रयास किए जा रहे हैं।
650 आम उत्पादक फार्म हॉर्टीनेट से जुड़े
एपीडा और उत्तर प्रदेश मंडी परिषद के प्रयासों से इस वर्ष करीब 650 आम उत्पादक फार्मों का हॉर्टीनेट पर पंजीकरण कराया गया है। हॉर्टीनेट एपीडा की ट्रेसबिलिटी प्रणाली है, जिसके जरिए निर्यात होने वाले आम को उत्पादक फार्म से पैक हाउस और फिर निर्यात तक ट्रैक किया जा सकता है। सरकार के अनुसार, इससे गुणवत्ता नियंत्रण और निर्यात मानकों के अनुपालन को मजबूती मिलेगी। खास तौर पर यूरोप जैसे कड़े मानकों वाले बाजारों में उत्तर प्रदेश के आम की पहुंच बढ़ाने में इससे मदद मिल सकती है।
किसानों को दिए गए 15 लाख मैंगो कवर
उत्तर प्रदेश मंडी परिषद ने इस वर्ष पहली बार फल उत्पादकों को 15 लाख मैंगो कवर उपलब्ध कराए हैं। इन विशेष कवर से आम को कीटों, दाग-धब्बों और प्रतिकूल मौसम के प्रभाव से बचाने में मदद मिलती है। इससे बेहतर गुणवत्ता वाला और निर्यात योग्य फल तैयार करने में किसानों को सुविधा मिलने की बात कही गई है।
निर्यातकों को भाड़े और मार्केटिंग पर प्रोत्साहन
उत्तर प्रदेश निर्यात प्रोत्साहन नीति 2025-30 के तहत हवाई, समुद्री और सड़क मार्ग से निर्यात पर कुल भाड़े का 25 प्रतिशत निर्यातक को दिए जाने का प्रावधान है। एक निर्यातक को सालाना अधिकतम 20 लाख रुपये तक का लाभ मिल सकता है। इसके अलावा ट्रेड फेयर, बायर-सेलर मीट, डिजिटल मार्केटिंग और निर्यात सर्टिफिकेशन जैसी अनुमन्य गतिविधियों पर 75 प्रतिशत तक प्रतिपूर्ति का प्रावधान है। निर्यात के नए रास्ते भी तलाशे जा रहे हैं। जुलाई में अमरोहा से 12.5 मीट्रिक टन दशहरी और लंगड़ा आम की व्यावसायिक खेप रीफर कंटेनर के माध्यम से समुद्री मार्ग से दुबई भेजी गई।
पांच साल में 90,844 क्विंटल आम विदेश भेजा गया
डीजीसीआईएस के आंकड़ों के अनुसार, 2021-22 में उत्तर प्रदेश से 4,122.79 मीट्रिक टन आम का निर्यात हुआ। 2022-23 में यह आंकड़ा 527.59 मीट्रिक टन, 2023-24 में 567.62 मीट्रिक टन और 2024-25 में 396.64 मीट्रिक टन रहा। 2025-26 में उत्तर प्रदेश से 3,469.77 मीट्रिक टन आम का निर्यात किया गया। इस तरह 2021-22 से 2025-26 के बीच कुल 9,084.41 मीट्रिक टन यानी 90,844 क्विंटल आम विदेश भेजा गया।
मंडी निदेशक जितेंद्र प्रताप सिंह के अनुसार, मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के निर्देश पर किसानों को बेहतर और व्यापक बाजार उपलब्ध कराने के लिए पैक हाउस और निर्यात सुविधाओं को लगातार मजबूत किया जा रहा है। उनके अनुसार, चौसा, दशहरी, रटौल और लंगड़ा के साथ आम्रपाली और गवरजीत को भी व्यापक बाजार से जोड़ने पर जोर है, ताकि वैश्विक बाजार में उत्तर प्रदेश के आम की पहचान मजबूत हो और किसानों के लिए बाजार का दायरा लगातार बढ़े।