केंद्रीय वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने शुक्रवार को कहा कि किसानों की जरूरतों को पूरा करने और उनकी आय से जुड़ी आजीविका को मजबूत करने के लिए केंद्र सरकार ने कई योजनाएं शुरू की हैं। उन्होंने कहा कि किसान कल्याण प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व वाली सरकार की प्राथमिकताओं में रहा है।
वित्त मंत्री आंध्र प्रदेश के अन्नामय्या जिले के मदनपल्ले में रायलसीमा ग्लोबल हॉर्टिकल्चर हब और भारतीय कृषि विद्यालय के शिलान्यास कार्यक्रम को संबोधित कर रही थीं। कार्यक्रम में आंध्र प्रदेश के मुख्यमंत्री एन. चंद्रबाबू नायडू, उपमुख्यमंत्री पवन कल्याण, मानव संसाधन विकास मंत्री नारा लोकेश समेत कई लोग मौजूद रहे।
पीएम-किसान और किसान क्रेडिट कार्ड का दिया उदाहरण
सीतारमण ने कहा कि किसानों तक सीधे आर्थिक मदद पहुंचाने के लिए पीएम-किसान सम्मान निधि और संस्थागत ऋण उपलब्ध कराने के लिए किसान क्रेडिट कार्ड (KCC) जैसी योजनाएं चलाई जा रही हैं। सरकार का जोर किसानों को समय पर कृषि इनपुट और जरूरी सुविधाएं उपलब्ध कराने पर भी है।
300 रुपये में यूरिया, 2,700 रुपये की सब्सिडी
वित्त मंत्री ने कहा कि वैश्विक परिस्थितियों के कारण यूरिया की आयात लागत बढ़ी है। कोविड-19 महामारी और पश्चिम एशिया में भू-राजनीतिक तनाव के बीच यूरिया की लागत करीब 3,000 रुपये प्रति बोरी तक पहुंच गई थी। इसके बावजूद किसानों को यूरिया करीब 300 रुपये प्रति बोरी की दर से मिल रहा है। उन्होंने कहा कि इसके लिए केंद्र सरकार करीब 2,700 रुपये प्रति बोरी की सब्सिडी दे रही है।
मौसम के अनुकूल बीज और सौर पंप पर जोर
सीतारमण ने कहा कि जलवायु परिवर्तन से जुड़ी चुनौतियों को देखते हुए ऐसी बीज किस्मों को बढ़ावा दिया जा रहा है, जो अधिक गर्मी और सूखे जैसी परिस्थितियों का सामना कर सकें। उन्होंने गोबरधन योजना का भी जिक्र किया। इसके तहत ग्रामीण क्षेत्रों के कचरे को बायोगैस में बदलने पर जोर दिया जाता है। वहीं, पीएम-कुसुम योजना के तहत सौर पंपों के जरिए किसानों को सिंचाई के लिए सौर ऊर्जा उपलब्ध कराने का प्रयास किया जा रहा है।
फसल नुकसान से सुरक्षा के लिए बीमा
वित्त मंत्री ने कहा कि प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना (PMFBY) के जरिए किसानों को प्राकृतिक आपदाओं और अन्य जोखिमों से होने वाले फसल नुकसान के खिलाफ बीमा सुरक्षा दी जा रही है। उन्होंने बताया कि कृषि के साथ पशुपालन और मत्स्य पालन जैसे क्षेत्रों को भी मजबूत किया जा रहा है। इसके लिए राज्य सरकारों के सहयोग से मोबाइल पशु चिकित्सा इकाइयों और पशु चिकित्सा सेवाओं को बढ़ाया जा रहा है, जिससे पशुपालन और दुग्ध उत्पादन को मदद मिल सके।
रायलसीमा में 1 लाख करोड़ रुपये का बागवानी हब
सीतारमण ने कहा कि रायलसीमा को कृषि और बागवानी के क्षेत्र में आगे बढ़ाने के लिए 10 जिलों में विश्वस्तरीय ग्लोबल हॉर्टिकल्चर हब विकसित करने की योजना है। मुख्यमंत्री चंद्रबाबू नायडू ने इसके लिए करीब 1 लाख करोड़ रुपये की महत्वाकांक्षी परियोजना की परिकल्पना की है।
इसमें रायलसीमा के आठ जिलों के साथ दो पड़ोसी जिले शामिल होंगे। परियोजना को प्रधानमंत्री मोदी के समर्थन के साथ विश्व बैंक और एशियाई विकास बैंक (ADB) जैसे संस्थानों की वित्तीय सहायता से आगे बढ़ाया जा रहा है।
तकनीक और पानी बचाने पर फोकस
वित्त मंत्री के मुताबिक, इस परियोजना का उद्देश्य कृषि में विश्वस्तरीय तकनीक का इस्तेमाल बढ़ाना और पानी के बेहतर उपयोग को सुनिश्चित करना है। इससे क्षेत्र में बागवानी और कृषि से जुड़ी गतिविधियों को नई तकनीक से जोड़ने में मदद मिलने की उम्मीद है।
गांधी जयंती और लाल बहादुर शास्त्री जयंती के मौके पर 10 जिलों में ग्लोबल हॉर्टिकल्चर हब और मदनपल्ले में भारतीय कृषि विद्यालय की पहल को आगे बढ़ाया गया। सीतारमण ने कहा कि ये पहल महात्मा गांधी के ग्रामीण विकास के विचार और लाल बहादुर शास्त्री के ‘जय जवान, जय किसान’ के संदेश से जुड़ी हैं। उन्होंने कहा कि किसानों की गरिमा, कल्याण और लंबे समय तक आर्थिक मजबूती को सरकार की नीतियों में प्राथमिकता दी जा रही है।
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