देश में मानसून सामान्य से 13 फीसदी कम बारिश के साथ खत्म हुआ है। इसका असर तुरंत भले ही साफ नजर न आए, लेकिन आने वाले महीनों में ग्रामीण आय और गांवों में होने वाले खर्च पर पड़ सकता है। विशेषज्ञों और एफएमसीजी कंपनियों के मुताबिक, दूसरी तिमाही में ग्रामीण इलाकों में रोजमर्रा की जरूरत के सामान की मांग बनी हुई है, लेकिन महंगे और गैर-जरूरी सामान पर खर्च में कुछ नरमी दिखाई दे रही है। त्योहारों का सीजन खत्म होने के बाद इसका असर और स्पष्ट हो सकता है।
हर क्षेत्र में एक जैसा नहीं होगा असर
बिजनेस लाइन की रिपोर्ट के मुताबिक, विशेषज्ञों का कहना है कि कम बारिश का असर देश के सभी ग्रामीण क्षेत्रों में एक जैसा नहीं होगा। जिन राज्यों और जिलों में बारिश की कमी ज्यादा रही है, वहां ग्रामीण मांग पर दबाव अधिक देखने को मिल सकता है। करीब 313 जिलों में बारिश सामान्य से कम या काफी कम रही है।
आनंद राठी इंस्टीट्यूशनल इक्विटीज के रिसर्च एनालिस्ट अजय ठाकुर के मुताबिक, कंपनियों से मिले जमीनी फीडबैक में दूसरी तिमाही के दौरान ग्रामीण क्षेत्रों में रोजमर्रा के जरूरी सामान की मांग स्थिर रही है। हालांकि, गैर-जरूरी और वैकल्पिक सामान की मांग में कुछ कमजोरी देखी गई है। उनके अनुसार, आने वाले महीनों में कम बारिश का ग्रामीण मांग पर असर ज्यादा स्पष्ट हो सकता है।
जरूरी सामान की मांग बनी रहने की उम्मीद
पारले प्रोडक्ट्स के चीफ मार्केटिंग ऑफिसर मयंक शाह ने कहा कि वित्त वर्ष 2026-27 की दूसरी तिमाही में ग्रामीण और शहरी दोनों क्षेत्रों में मांग मजबूत रही है। त्योहारों के दौरान भी मांग में तेजी जारी रहने की उम्मीद है। उन्होंने कहा कि खाद्य पदार्थ और रोजमर्रा की जरूरत के सामान पर कम बारिश का ज्यादा असर पड़ने की आशंका नहीं है। इसका प्रभाव मुख्य रूप से गैर-जरूरी और वैकल्पिक सामान की खरीद पर दिखाई दे सकता है।
कम बारिश से खेती और ग्रामीण आय पर असर
कम मानसून का सीधा असर खेती की उत्पादकता और कृषि गतिविधियों पर पड़ सकता है। खेती में उत्पादन या आमदनी कम होने पर ग्रामीण परिवार बड़े खर्चों को टाल सकते हैं और जरूरी सामान को प्राथमिकता दे सकते हैं।
ग्रांट थॉर्नटन भारत के पार्टनर और एग्रीकल्चर एंड अलाइड सेक्टर लीडर चिराग जैन के मुताबिक, आने वाले समय में ग्रामीण मांग अलग-अलग क्षेत्रों में अलग रह सकती है। दक्षिणी और पूर्वी भारत के उन इलाकों में खपत की वृद्धि कमजोर रह सकती है, जहां बारिश की कमी ज्यादा रही है। हालांकि, इसका अंतिम असर आगामी रबी सीजन की फसल पर भी निर्भर करेगा।
रबी की फसल से उम्मीद
विशेषज्ञों के मुताबिक, अगर रबी सीजन में फसल अच्छी रहती है तो किसानों और ग्रामीण परिवारों की आय में सुधार हो सकता है। इससे अगले वित्त वर्ष की दूसरी छमाही में ग्रामीण बाजार में मांग को सहारा मिलने की संभावना है। फिलहाल ग्रामीण परिवार खाने-पीने, स्वास्थ्य और शिक्षा जैसे जरूरी खर्चों को प्राथमिकता दे सकते हैं, जबकि टीवी, मोबाइल, दोपहिया वाहन और अन्य गैर-जरूरी सामान जैसे खर्चों में सावधानी बरत सकते हैं।
डीएस ग्रुप के बिजनेस हेड (कन्फेक्शनरी) ज्योतिरूप बरुआ ने कहा कि आने वाले महीनों में ग्रामीण मांग पर नजर रखना जरूरी होगा। अगर ग्रामीण उपभोक्ता खर्च को लेकर ज्यादा सतर्क होते हैं तो कम कीमत, बेहतर वैल्यू और सामान की आसान उपलब्धता खरीदारी के अहम आधार बन सकते हैं।
क्यों महत्वपूर्ण है ग्रामीण मांग?
ग्रामीण बाजार में मांग बढ़ने या घटने का असर एफएमसीजी, दोपहिया वाहन, कृषि उपकरण, कपड़े और अन्य उपभोक्ता सामानों की बिक्री पर पड़ता है। इसलिए कम बारिश से खेती और ग्रामीण आय पर पड़ने वाला असर आने वाले महीनों में कंपनियों के लिए भी महत्वपूर्ण संकेत होगा। फिलहाल विशेषज्ञों की नजर रबी सीजन पर है। अच्छी रबी फसल ग्रामीण आय को सहारा दे सकती है, जबकि कमजोर उत्पादन से ग्रामीण परिवारों के गैर-जरूरी खर्च पर दबाव बढ़ सकता है।
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