भारत और नीदरलैंड ने कृषि क्षेत्र में आधुनिक तकनीक, नवाचार और बेहतर ज्ञान के आदान-प्रदान के जरिए उत्पादकता बढ़ाने पर सहमति जताई है। दोनों देशों के बीच कृषि और बागवानी क्षेत्र में 25 उत्कृष्टता केंद्र (Centres of Excellence) स्थापित करने की दिशा में हुई प्रगति की समीक्षा भी की गई। साथ ही, बीज क्षेत्र में सहयोग बढ़ाने के लिए कार्ययोजना तैयार करने पर सहमति बनी है।
केंद्रीय कृषि एवं किसान कल्याण मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने 28 सितंबर को नई दिल्ली में नीदरलैंड के कृषि, मत्स्य, खाद्य सुरक्षा एवं प्रकृति मंत्री सिल्वियो एर्केंस के साथ द्विपक्षीय बैठक की। बैठक में दोनों देशों के बीच कृषि क्षेत्र में चल रहे सहयोग की समीक्षा की गई और नए क्षेत्रों में साझेदारी बढ़ाने पर चर्चा हुई।
25 उत्कृष्टता केंद्रों की प्रगति पर चर्चा
बैठक में कृषि और बागवानी क्षेत्र में स्थापित किए जा रहे 25 उत्कृष्टता केंद्रों की प्रगति पर दोनों पक्षों ने विचार किया। इन केंद्रों के जरिए आधुनिक कृषि तकनीक, नई जानकारी और बेहतर उत्पादन पद्धतियों को बढ़ावा देने पर जोर है। भारत और नीदरलैंड ने कृषि क्षेत्र में तकनीक और नवाचार के इस्तेमाल को बढ़ाने तथा किसानों तक उपयोगी ज्ञान पहुंचाने के लिए सहयोग जारी रखने की प्रतिबद्धता दोहराई।
बीज क्षेत्र में बढ़ेगा सहयोग
दोनों देशों ने बीज क्षेत्र में सहयोग की नई संभावनाएं तलाशने पर भी सहमति जताई। इसके लिए एक कार्ययोजना तैयार की जाएगी, जिसमें सहयोग के प्रमुख क्षेत्रों को तय किया जाएगा। इसका उद्देश्य दोनों देशों के बीच बीज क्षेत्र में सहयोग के लिए स्पष्ट ढांचा तैयार करना और उसे प्रभावी तरीके से लागू करना है।
कृषि नवाचार पर भी जोर
बैठक में कृषि क्षेत्र में नवाचार और नई तकनीकों से जुड़े संभावित क्षेत्रों की पहचान करने पर भी चर्चा हुई। दोनों पक्षों ने माना कि भारत और नीदरलैंड ने कृषि नवाचार के क्षेत्र में महत्वपूर्ण प्रगति की है। ऐसे क्षेत्रों में आपसी सहयोग बढ़ाने की संभावनाओं पर काम किया जाएगा।
दोनों देशों के अधिकारियों ने लिया हिस्सा
नीदरलैंड के प्रतिनिधिमंडल में कृषि, मत्स्य, खाद्य सुरक्षा एवं प्रकृति मंत्रालय के महानिदेशक मार्टेन वान डेन बर्ग, वरिष्ठ अधिकारी और भारत में नीदरलैंड की राजदूत मारिसा गेरार्ड्स समेत दूतावास के अन्य अधिकारी शामिल रहे। भारतीय प्रतिनिधिमंडल में कृषि एवं किसान कल्याण विभाग के सचिव अतीश चंद्र, कृषि अनुसंधान एवं शिक्षा विभाग (DARE) के सचिव डॉ. एमएल जाट और अन्य वरिष्ठ अधिकारी मौजूद रहे।
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