महाराष्ट्र के लगभग 70 लाख किसानों के लिए एक बड़ी राहत की खबर है। जो डिजिटल क्रॉप सर्वे एप के माध्यम से पंजीकरण में कठिनाई के बाद अब किसान ई-फेरफार (e-ferfar) के जरिए ऑफलाइन पंजीकरण कर सकते हैं।
राजस्व मंत्री के निर्देश पर जारी हुआ सरकारी आदेश
राजस्व मंत्री चंद्रशेखर बावनकुले के निर्देशों के बाद, राज्य के राजस्व विभाग ने शुक्रवार को एक सरकारी प्रस्ताव जारी किया। सरकार के इस आदेश के अनुसार, चालू खरीफ सीजन के दौरान जिन जगहों पर एप की खराबी के कारण ऑनलाइन पंजीकरण अटका हुआ है, वहां अब पटवारी स्तर पर फसलों की जांच की अनुमति दे दी गई है।
ऐप में किसानों को आ रही थीं ये 4 बड़ी परेशानियां
सरकार द्वारा जारी किए गए आदेश में उन चार मुख्य तकनीकी समस्याओं का जिक्र किया गया है, जिनकी वजह से किसान परेशान थे। किसान के अपने खेत में मौजूद होने के बावजूद, ऐप में असल खेत और उसकी दिखाई जा रही सीमा (बाउंड्री) के बीच 20 मीटर से ज्यादा की दूरी नजर आ रही थी। एप में खेतों के नक्शे आपस में बदल गए थे। एप में कई पूरे के पूरे गांवों के नक्शे ही मौजूद नहीं थे। कई किसानों के नाम और उनके जमीन के खाता नंबर ऐप में दिखाई ही नहीं दे रहे थे।
ई-फेरफार प्रणाली बनेगा दूसरा रास्ता
सरकार के अनुसार, जिन मामलों में इन तकनीकी खामियों को दूर करने की तमाम कोशिशों के बाद भी ऑनलाइन पंजीकरण संभव नहीं हो पा रहा है, वहां ई-फेरफार प्रणाली के जरिए फसल का पंजीकरण करने की छूट दी जाएगी।
कब शुरू हुई थी ऑनलाइन व्यवस्था?
सरकारी आदेश के मुताबिक, राज्य सरकार ने 15 अगस्त 2021 को ई-फसल निरीक्षण प्रणाली शुरू की थी, ताकि किसान अपने मोबाइल फोन से आसानी से फसल की जानकारी दर्ज कर सकें। इस पूरी प्रक्रिया का मकसद पंजीकरण को सभी की पहुंच में लाना और पारदर्शी बनाना था।
इसके बाद एग्रीस्टैक (AgriStack) प्लेटफॉर्म के जरिए पंजीकरण की सुविधा देने के लिए 1 दिसंबर 2024 से इस एप में कुछ तकनीकी बदलाव किए गए थे। लेकिन, खरीफ सीजन में इस डिजिटल क्रॉप सर्वे एप्लिकेशन में कई दिक्कतें सामने आ गईं, जिसकी वजह से कुछ क्षेत्रों में ऑनलाइन पंजीकरण करना बहुत मुश्किल हो गया था।