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महाराष्ट्र : सूखे की मार से जूझ रहे किसानों के बीच दिवाली मनाएंगे CM फडणवीस, गांव में बिताएंगे पूरी रात

गांव जंक्शन डेस्क, नई दिल्ली Published by: Mohammad Aamil Updated Sat, 07 Nov 2026 03:12 PM IST
सार

  • महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस सूखा प्रभावित किसानों के साथ दिवाली मनाएंगे।

  • नागपुर जिले के लोहारी सावंगा गांव में रात बिताएंगे मुख्यमंत्री।

  • किसानों से सिंचाई, फसल बीमा और पानी की उपलब्धता पर करेंगे चर्चा।

  • रविवार को नरखेड़ तालुका के जनप्रतिनिधियों के साथ बैठक करेंगे।

मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस
मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस - फोटो : सोशल मीडिया
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विस्तार
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महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस इस बार दिवाली सूखा प्रभावित किसानों के साथ मनाएंगे। वह शनिवार को नागपुर जिले के नरखेड़ तालुका के लोहारी सावंगा गांव पहुंचेंगे। यहां वह किसानों और उनके परिवारों के साथ समय बिताएंगे और उनकी समस्याएं सुनेंगे। इस पहल का मकसद खेती के संकट से जूझ रहे किसानों का हौसला बढ़ाना और उन्हें यह भरोसा दिलाना है कि सरकार उनके साथ खड़ी है।

मुख्यमंत्री शनिवार शाम नागपुर से गांव के लिए रवाना होंगे और रात भी वहीं बिताएंगे। इस दौरान वह किसानों से सिंचाई, फसल बीमा, पानी की उपलब्धता और खेती से जुड़ी दूसरी समस्याओं पर बातचीत करेंगे।

सूखे से खेती और किसान परिवारों पर बढ़ा संकट
महाराष्ट्र के कई इलाकों में सूखे जैसे हालात बने हुए हैं। इसका असर खेती-किसानी पर पड़ा है और कई किसान परिवार आर्थिक मुश्किलों का सामना कर रहे हैं। ऐसे में मुख्यमंत्री का किसानों के बीच दिवाली मनाने का फैसला अहम माना जा रहा है।

रविवार सुबह मुख्यमंत्री नरखेड़ तालुका के जनप्रतिनिधियों के साथ बैठक करेंगे। इसमें स्थानीय समस्याओं पर चर्चा होगी। वापसी के दौरान वह कुछ गांवों में रुककर खेतों का जायजा भी ले सकते हैं। साथ ही, जल संरक्षण के लिए चल रहे कामों की प्रगति की समीक्षा करेंगे।

मंत्रियों से भी किसानों के साथ दिवाली मनाने की अपील
फडणवीस ने इससे पहले राज्य मंत्रिमंडल के सभी मंत्रियों से अपील की थी कि वे दिवाली के दौरान कम से कम एक दिन किसी गांव में किसानों के साथ बिताएं। उनका कहना है कि इससे मंत्रियों को किसान परिवारों की वास्तविक परेशानियों को समझने का मौका मिलेगा। वे किसानों के सुख-दुख में शामिल होकर उनका हौसला भी बढ़ा सकेंगे।

मुख्यमंत्री ने कहा था कि किसानों की परेशानी का असर सिर्फ खेती करने वाले परिवारों तक सीमित नहीं रहता, बल्कि इससे पूरे ग्रामीण अर्थव्यवस्था पर प्रभाव पड़ता है। इसलिए किसानों को राहत देने के लिए सरकार, जनप्रतिनिधियों, सामाजिक संगठनों और आम लोगों को मिलकर प्रयास करने चाहिए।
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