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Uttarakhand Modern Machines Make Farming Easier Mountains Reducing Hard Work Of Women Farmers
उत्तराखंड : पहाड़ों में खेती आसान बनाएंगी आधुनिक मशीनें, महिला किसानों की घटेगी मेहनत
गांव जंक्शन डेस्क, नई दिल्ली
Published by: Mohammad Aamil
Updated Sat, 07 Nov 2026 04:06 PM IST
सार
उत्तराखंड के पहाड़ी इलाकों में छोटी कृषि मशीनों, मिलेट थ्रेशर और सोलर तकनीक से खेती आसान बनाने की तैयारी है। इससे महिला किसानों का शारीरिक श्रम और समय बचेगा।
पहाड़ों में खेती करना आसान नहीं है। छोटे और बिखरे खेतों के साथ ऊबड़-खाबड़ जमीन के कारण यहां आधुनिक कृषि मशीनों का इस्तेमाल भी मुश्किल होता है। ऐसे में कृषि यंत्रीकरण यानी खेती में मशीनों के उपयोग से किसानों की मेहनत और समय दोनों बचाए जा सकते हैं। इससे खासकर महिला किसानों को बड़ी राहत मिलेगी।
जनजातीय गौरव दिवस के अवसर पर विवेकानंद पर्वतीय कृषि अनुसंधान संस्थान, अल्मोड़ा में किसानों के लिए विशेष प्रशिक्षण कार्यक्रम आयोजित किया गया। इसमें संस्थान के वरिष्ठ वैज्ञानिक डॉ. मनोज कुमार ने किसानों को आधुनिक कृषि तकनीकों की जानकारी दी।
उन्होंने बताया कि पहाड़ी जिलों में कठिन भौगोलिक परिस्थितियों और छोटे-बिखरे खेतों के कारण कृषि मशीनों की उपलब्धता काफी कम है। यहां प्रति हेक्टेयर कृषि शक्ति एक किलोवाट से भी कम है। ऐसे में खेती के काम को आसान बनाने के लिए छोटी और उपयोगी मशीनों की जरूरत है।
छोटी मशीनों से बचेगा समय और श्रम
डॉ. मनोज कुमार ने संस्थान की ओर से विकसित वीएल स्मॉल टूल किट, मिलेट थ्रेशर, पॉलीटनल और सोलर ड्रायर जैसी तकनीकों के फायदे बताए। उन्होंने कहा कि इनका इस्तेमाल करने से खेती के काम में लगने वाला समय और मेहनत कम होगी। खासकर महिला किसानों को शारीरिक श्रम से राहत मिलेगी।
किसानों ने दिए पहाड़ के हिसाब से मशीनें बनाने के सुझाव
प्रशिक्षण के बाद किसानों के साथ खुली चर्चा हुई। इसमें बांपा गांव के हरीश नेगी ने पहाड़ों में पेट्रोल-डीजल की कमी को देखते हुए सौर ऊर्जा और बैटरी से चलने वाले कृषि यंत्र विकसित करने का सुझाव दिया। उन्होंने बैलों की कमी को देखते हुए घोड़े और खच्चर से चलने वाले हल बनाने की मांग भी रखी। वहीं, गमशाली की रुक्मिणी देवी ने सामूहिक सिंचाई के लिए सोलर पंप उपलब्ध कराने का सुझाव दिया।
वैज्ञानिकों ने किसानों को भरोसा दिलाया कि पहाड़ी क्षेत्रों की जरूरतों और भौगोलिक परिस्थितियों को ध्यान में रखकर ही नई कृषि तकनीकों का विकास किया जाएगा। संस्थान के निदेशक डॉ. लक्ष्मी कांत के मार्गदर्शन में आयोजित कार्यक्रम का संचालन डॉ. बृज मोहन पांडे ने किया।
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