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बारिश की हर बूंद बचाने की तैयारी: सूखाग्रस्त तालुकों में तेज होंगे पानी बचाने के काम, बनेंगे जल संरक्षण ढांचे

गांव जंक्शन डेस्क, नई दिल्ली Published by: Mohammad Aamil Updated Sat, 31 Oct 2026 06:41 PM IST
सार

महाराष्ट्र के 76 सूखाग्रस्त तालुकों में जल संरक्षण कार्य तेज होंगे। केंद्र सरकार ने खेत तालाब, नाला बांध और कोल्हापुरी बंधारे के जरिए बारिश का पानी बचाने पर जोर दिया है।

महाराष्ट्र के 76 तालुकों में विशेष अभियान
महाराष्ट्र के 76 तालुकों में विशेष अभियान - फोटो : सोशल मीडिया
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विस्तार
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बारिश के पानी की हर बूंद को सहेजना जरूरी है, ताकि गांव पानी के मामले में आत्मनिर्भर बन सकें। इसके लिए ग्रामीणों को जल संरक्षण से जुड़े ढांचों की देखभाल और मरम्मत की जिम्मेदारी भी उठानी होगी। ग्रामीण विकास मंत्रालय के भूमि संसाधन विभाग के सचिव दिलीप कुमार ने महाराष्ट्र के पुणे जिले के खेड़ क्षेत्र में जल संरक्षण कार्यों की समीक्षा करते हुए यह बात कही।

दिलीप कुमार ने 30 अक्तूबर को वरुडे, गुलानी और वाफगांव गांवों का दौरा किया। यहां प्रधानमंत्री कृषि सिंचाई योजना 2.0 के तहत जलग्रहण विकास कार्य किए जा रहे हैं। इनका उद्देश्य मिट्टी और पानी का संरक्षण करना, खेती की उत्पादकता बढ़ाना और गांवों का टिकाऊ विकास करना है।

ग्रामीणों से बातचीत में सचिव ने कहा कि पानी हमारे भविष्य का आधार है। गांवों को जल के मामले में सुरक्षित और आत्मनिर्भर बनाने के लिए बारिश की हर बूंद को बचाना होगा। उन्होंने ग्रामीणों से जल संरक्षण के लिए बनाए गए ढांचों की नियमित देखभाल और मरम्मत करने की अपील की, ताकि ये अगले 20 साल तक काम करते रहें। उन्होंने खेड़ क्षेत्र के गांवों को हिवरे बाजार की तर्ज पर जल आत्मनिर्भर बनाने पर भी जोर दिया।

खेतों और गांवों में बनाए गए जल संरक्षण ढांचों की समीक्षा
दौरे के दौरान सचिव ने पहाड़ी से घाटी की ओर पानी के बहाव को ध्यान में रखकर बनाए गए जल संरक्षण ढांचों का निरीक्षण किया। इनमें कंटूर ट्रेंच, मिट्टी के नाला बांध, सीमेंट के नाला बांध, कोल्हापुरी बंधारे और पानी जमा करने वाले तालाब शामिल हैं।

उन्होंने देखा कि इन ढांचों से बारिश के पानी का बहाव रोकने, जमीन के भीतर पानी पहुंचाने और खेती के लिए पानी की उपलब्धता बढ़ाने में कितनी मदद मिली है। इसके अलावा भूजल स्तर में बदलाव और किसानों को हुए लाभ की भी समीक्षा की। योजना के तहत बनाए गए खेत तालाबों, बागवानी पौधरोपण और किसानों को दिए गए कृषि उपकरणों का भी जायजा लिया गया। महिला स्वयं सहायता समूहों को मिले लाभ की जानकारी भी ली गई।

11 गांवों में बढ़ा भूजल स्तर, साल में दो से तीन फसलें
खेड़ परियोजना के तहत आने वाले 11 गांवों के लोगों ने बताया कि जल संरक्षण कार्यों से भूजल स्तर में सुधार हुआ है। इससे किसान अब साल में दो से तीन फसलें उगा पा रहे हैं। खेती की आमदनी और ग्रामीणों की आजीविका में भी सुधार हुआ है।

ग्रामीणों ने बताया कि इस साल सूखे जैसे हालात के बावजूद खेत तालाबों में जमा पानी और कुओं में बढ़े जलस्तर से खड़ी फसलों की सिंचाई करने में मदद मिली। सीमेंट के नाला बांध और कंटूर ट्रेंच जैसे ढांचों से पानी का स्तर बेहतर हुआ है।

महाराष्ट्र के 76 सूखाग्रस्त तालुकों में काम तेज करने के निर्देश
दिलीप कुमार ने 29 अक्तूबर को पुणे के यशदा संस्थान में महाराष्ट्र के मृदा एवं जल संरक्षण विभाग के सचिव के साथ समीक्षा बैठक भी की। इसमें प्रधानमंत्री कृषि सिंचाई योजना के कामकाज और खर्च की प्रगति पर चर्चा हुई।

उन्होंने महाराष्ट्र के सूखाग्रस्त इलाकों में जल संरक्षण के काम समय पर पूरा करने के निर्देश दिए। राज्य के 304 सूखाग्रस्त तालुकों में से योजना के तहत शामिल 76 तालुकों में काम तेजी से पूरा करने पर जोर दिया गया। अल नीनो की आशंका को देखते हुए जल भंडारण क्षमता बढ़ाने और गांवों में पानी की उपलब्धता सुनिश्चित करने को प्राथमिकता देने की बात कही गई।

इसके लिए जमीन के भीतर पानी पहुंचाने वाले तालाब, जल भंडारण तालाब, बांध और कोल्हापुरी बंधारे जैसे काम तेजी से पूरे करने के निर्देश दिए गए। इनसे बारिश का पानी जमा करने, गांवों में जल उपलब्धता बढ़ाने और सूखे के दौरान फसलों को सिंचाई के लिए पानी देने में मदद मिलेगी। बैठक में तय समय पर परियोजनाएं पूरी करने, निर्माण की गुणवत्ता बनाए रखने, केंद्र और राज्य सरकार के बीच बेहतर तालमेल और उपलब्ध बजट का सही इस्तेमाल करने पर भी जोर दिया गया।
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