महाराष्ट्र की 85 प्रतिशत तहसील सूखे की चपेट में आ चुकी हैं। दूसरी तरफ किसान रबी फसलों की बुवाई की तैयारी में जुटे हुए हैं। प्रदेश सरकार ने जल की सीमित उपलब्धता, अल नीनो के खतरे और मिट्टी में कम नमी को देखते हुए कम जल खपत वाली फसलों को बढ़ावा देने का फैसला लिया है। इसके लिए 22 अक्तूबर से 30 नवंबर के बीच राज्य में खेत बचाओ अभियान चलाया जाएगा।
दलहन और तिलहन की खेती पर रहेगा जोर
अधिकारियों के अनुसार, इस अभियान के माध्यम से किसानों को अपनी फसलों में बदलाव लाने के लिए प्रेरित करने पर जोर रहेगा। प्रदेश के कृषि आयुक्त सूरज मांढरे के अनुसार, इस अभियान के तहत मुख्य रूप से दलहन और तिलहन की खेती पर ध्यान दिया जाएगा। इसके अलावा मिट्टी की गुणवत्ता सुधारने, खादों के संतुलित उपयोग, प्राकृतिक खेती और जल संरक्षण पर भी जोर दिया जाएगा।
किसान आय पर दबाव, रबी में चुनौती बरकरार
बीते खरीफ सीजन में कम बारिश की वजह से किसानों को भारी नुकसान उठाना पड़ा है। एक अधिकारी का कहना है कि फसल कटाई से शुरुआती नतीजों से पता चलता है कि हजारों किसानों को 50 प्रतिशत से ज्यादा उपज का नुकसान हो सकता है। मराठवाड़ा, विदर्भ और पश्चिमी महाराष्ट्र के कुछ हिस्सों रबी सीजन के लिए भी चिंता बनी हुई है।
तिलहन और ज्वार को मिलेगा बढ़ावा
खेत बचाओ अभियान के तहत पानी की उपलब्धता वाले इलाकों में तिलहन और ज्वार फसल की बुवाई को प्राथमिकता दी जाएगी। इस तरह कम से कम चारे की उपलब्धता को मजबूती मिल सकती है। इसके अलावा धान कटाई के बाद खाली जमीन का सही उपयोग और पर ड्रॉप मोर क्रॉप के तहत सूक्ष्म-सिंचाई को भी बढ़ावा दिया जाएगा।
कम पानी वाली फसलों की सख्त जरूरत
मराठवाड़ा और विदर्भ जैसे सूखाग्रस्त इलाकों में अनियमित बारिश और गिरते भूजल स्तर के कारण बार-बार फसलें खराब हो रही हैं। भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद के ताजा आकलन में भी भूजल और फसलों के पैटर्न को देखते हुए चिंता जताई गई है। आईसीएआर ने सलाह दी है कि महाराष्ट्र सहित कई राज्यों में किसानों को अपने क्षेत्र के हिसाब से कम पानी मांगने वाली फसलें उगानी चाहिए और सिंचाई के बेहतर तरीके अपनाने चाहिए। कृषि विशेषज्ञों ने भी सीमित पानी वाले क्षेत्रों में ज्वार, बाजरा, दालें और तिलहन उगाने की वकालत की है।
विशेषज्ञों ने बताई जमीनी चुनौतियां
दूसरी तरफ जानकारों के अनुसार, फसल विविधीकरण के लिए किसान को मनाना एक बड़ी चुनौती है, क्योंकि जमीनी स्तर पर एमएसपी का दायरा कुछ फसलों तक ही सीमित है। ऐसे में दलहन और दूसरी अनाज फसले भी सरकारी समर्थन के दायरे में आनी चाहिए । इसके अलावा दलहन-तिलहन की खेती को बढ़ावा देने के लिए अच्छे बीज, तकनीकी मार्गदर्शन और पक्के खरीदार को अहम है