राजस्थान के बाड़मेर जिले में इस साल कम मानसूनी बारिश ने आर्थिक मोर्चे पर किसानों के लिए बड़ी चुनोौती खड़ी कर दी है। जिले के 2,738 में से 2,460 गांव भयंकर सूखे की जद में आ गए हैं। बीते आठ सालों के इस सबसे भयानक अकाल के कारण जिले की लगभग 50 अरब रुपये की फसलें खेत में ही सूखकर पूरी तरह बर्बाद हो गई हैं।
सिर्फ 10 प्रतिशत उपज निकलने की उम्मीद
गुड़ामालानी स्थित कृषि विज्ञान केंद्र के कृषि विशेषज्ञ डॉ. प्रदीप पगारिया के अनुसार, बाड़मेर में हर साल लगभग 150 लाख मीट्रिक टन फसल का उत्पादन होता है, लेकिन इस बार मात्र 10 प्रतिशत उपज होने की ही उम्मीद है। जिले में सामान्य रूप से 387 मिलीमीटर बारिश होती है, लेकिन इस बार सिर्फ 207 मिलीमीटर बारिश ही हुई है। बारिश रुकने से अंकुरित फसलें एक महीने के अंदर ही नष्ट हो गईं।
अरबों रुपये का हुआ नुकसान
कृषि विभाग की रिपोर्ट के मुताबिक, इस बार बाजरे की फसल पूरी तरह (100 प्रतिशत) खराब हो गई है, जिससे लगभग 1 अरब 65 करोड़ रुपये का नुकसान हुआ है। इसके अलावा, ग्वार की फसल प्रभावित होने से करीब 38 अरब 75 करोड़ रुपये और मूंग की फसल में 80 प्रतिशत नुकसान से 9 अरब 83 करोड़ रुपये की तबाही हुई है। मोठ की फसल में भी 1 करोड़ 26 लाख रुपये का नुकसान दर्ज किया गया है।
पशु चारे की उपलब्धता पर संकट
सूखे के कारण जिले में मवेशियों के लिए चारे का भारी संकट पैदा हो गया है और गोवंश भुखमरी की कगार पर है। मुख्यमंत्री ने सूखाग्रस्त गांवों में चारा डिपो और पशु शिविर खोलने की घोषणा की थी, लेकिन अब तक जमीनी स्तर पर काम शुरू नहीं हुआ है।
चारा डिपो खोलने की मंजूरी मिली, गिरदावरी रिपोर्ट तैयार
बाड़मेर के अतिरिक्त जिलाधीश रवींद्र कुमार के अनुसार, जिले की गिरदावरी रिपोर्ट पूरी तरह तैयार कर ली गई है और इसे दो-तीन दिन में ऑनलाइन पोर्टल पर डाल दिया जाएगा। अधिकारी के अनुसार, अकालग्रस्त क्षेत्रों में चारा डिपो खोलने की मंजूरी मिल चुकी है और प्रशासन जल्द ही जरूरत के हिसाब से राहत कार्य शुरू कर देगा।