महाराष्ट्र के 358 में से 305 तहसीलों में सूखा घोषित कर दिया गया है। केंद्र सरकार के राहत पैकेज के इंतजार के बीच प्रदेश सरकार ने किसानों की अभी के लिए राहत देने का बड़ा फैसला किया है। मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने बुधवार को एलान किया कि प्रदेश सरकार केंद्र की मदद का इंतजार किए बिना, दिवाली से पहले अनुमानित 1.25 करोड़ से 1.45 करोड़ किसानों को 5,000-5,000 रुपये की आर्थिक मदद देगी।
सीधे बैंक खाते में आएंगे पैसे
अधिकारियों के मुताबिक, सरकार के इस कदम से सरकारी खजाने पर करीब 6,000 से 7,000 करोड़ रुपये का बोझ आएगा। हालांकि, अभी यह तय होना बाकी है कि इस मदद के लिए कौन-कौन से किसान पात्र होंगे। इसलिए लाभार्थियों की अंतिम संख्या और कुल खर्च में थोड़ा बदलाव हो सकता है। सरकार के अनुसार, यह सहायता राशि सीधे किसानों के बैंक खातों में जमा की जाएगी। इसी घोषणा के साथ सरकार ने सूखा प्रभावित तहसीलों की संख्या भी 265 से बढ़ाकर 305 कर दी है।
यह मदद केंद्र के पैकेज का एडवांस है
राज्य सरकार किसानों को दी जा रही इस रकम को केंद्र से मिलने वाले संभावित सूखा राहत पै़केज के एडवांस के तौर पर दे रही है। कैबिनेट बैठक के बाद मुख्यमंत्री फडणवीस ने कहा, केंद्र से सूखा राहत मिलने की एक तय प्रक्रिया होती है, जिसे दिवाली से पहले पूरा करना मुश्किल है। नियमों और समय-सीमा के कारण इतने कम समय में यह काम संभव नहीं था।
मुख्यमंत्री ने साफ किया कि केंद्र से जो सहायता मिलनी है, वह आने पर जरूर दी जाएगी। लेकिन, फिलहाल दिवाली के मौके पर किसानों के हाथ में कुछ पैसे रहें, इसलिए राज्य सरकार यह रकम एडवांस के रूप में अपनी तरफ से दे रही है। अधिकारियों के अनुसार, राज्य सरकार के इस खर्च को बाद में केंद्र के पैकेज से एडजस्ट कर लिया जाएगा या फिर विधानसभा के शीतकालीन सत्र में अलग से इसकी व्यवस्था की जाएगी।
विपक्ष और किसान संगठनों ने की आलोचना
सरकार की इस घोषणा के बाद विपक्ष और किसान संगठनों ने नाराजगी जताई है। उनका कहना है कि खरीफ सीजन में किसानों को जो नुकसान हुआ है, उसकी तुलना में यह रकम नाकाफी है। अखिल भारतीय किसान सभा (AIKS) ने एक बयान जारी कर इस मदद को किसानों के साथ एक भद्दा मजाक बताया है। संगठन ने कहा, 5,000 रुपये इतनी छोटी रकम है कि इससे किसानों की लागत भी नहीं निकलेगी। पुराने अनुभवों को देखते हुए डर है कि कहीं इसी एडवांस को अंतिम पैकेज न मान लिया जाए।
कांग्रेस ने की 1 लाख रुपये प्रति हेक्टेयर की मांग
महाराष्ट्र कांग्रेस के अध्यक्ष हर्षवर्धन सपकाल ने कहा कि यह मदद किसानों के जख्मों पर नमक छिड़कने जैसी है। उन्होंने आरोप लगाते हुए कहा, बीजेपी के पास विधायकों, सांसदों को खरीदने और उद्योगपतियों को देने के लिए पैसे हैं, लेकिन किसानों के लिए नहीं। सपकाल ने मांग की है कि किसानों को 1 लाख रुपये प्रति हेक्टेयर के हिसाब से आर्थिक मदद दी जानी चाहिए।
मीडिया रिपोर्ट में सरकारी सूत्रों के हवाले से बताया गया कि यह मात्र अंतरिम राहत है, जिसके माध्यम से किसानों को दिवाली से पहले जरूरी खर्च पूरे करने में मदद करना है।