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किसानों के खेत में छिपी बेहतरीन कॉफी किस्मों की होगी पहचान : CCRI करेगा निजी कंपनियों और किसानों से साझेदारी

गांव जंक्शन डेस्क, पटना Published by: Devesh Saraswat Updated Thu, 15 Oct 2026 09:27 AM IST
सार

  • केंद्रीय कॉफी अनुसंधान संस्थान नई किस्में विकसित करने के लिए रिसर्च साझेदारी करेगा।
  • किसानों के खेतों में मौजूद अधिक उपज देने वाले कॉफी पौधों की वैज्ञानिक जांच होगी।
  • संस्थान अब तक अरेबिका की 15 और रोबस्टा की 3 किस्में जारी कर चुका है।
  • साझेदारी के लिए संस्थान को अब तक 4 आवेदन मिले हैं।
  • पिछले साल दिसंबर में अरेबिका कॉफी की दो नई किस्में जारी की गई थीं, जो सफेद तना छेदक कीट और पत्ती के रस्ट रोग से बचाव में सक्षम हैं।

कॉफी किसानों तक बेहतर उपज-गुणवत्ता वाली कॉफी किस्में पहुंचाने की पहल
कॉफी किसानों तक बेहतर उपज-गुणवत्ता वाली कॉफी किस्में पहुंचाने की पहल - फोटो : गांव जंक्शन
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विस्तार
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कॉफी बोर्ड के तहत काम करने वाले केंद्रीय कॉफी अनुसंधान संस्थान ने कॉफी की नई किस्में विकसित करने और उत्पादन समेत गुणवत्ता में सुधार के लिए एक बड़ा कदम उठाया है। विभाग के अनुसार, संस्थान अब निजी कंपनियों, अनुसंधान संस्थानों और कॉफी उत्पादक किसानों के साथ रिसर्च पार्टनरशिप करने जा रहा है।

किसानों के खेतों में मौजूद बेहतरीन किस्मों की होगी जांच
सीसीआरआई के निदेशक एम. सेंथिल कुमार के अनुसार, इस पहल का मुख्य उद्देश्य प्राकृतिक रूप से या किसानों द्वारा विकसित की गई कॉफी की होनहार किस्मों की पहचान करना है।

निदेशक का कहना है कि कई बार किसानों के खेतों में बहुत अधिक उपज देने वाले और बेहतरीन गुणवत्ता वाले पौधे मौजूद होते हैं, लेकिन किसानों को उन्हें जांचने या बढ़ावा देने का तरीका नहीं पता होता। अब संस्थान ऐसे पौधों की वैज्ञानिक तरीके से जांच करने में मदद करेगा और यह तय करेगा कि क्या उन्हें बड़े पैमाने पर व्यावसायिक खेती (व्यापारिक स्तर पर उगाने) के लिए इस्तेमाल किया जा सकता है।

साझेदारी से बाहरी विशेषज्ञों और नई तकनीक का मिलेगा लाभ
100 से अधिक वर्षों का इतिहास रखने वाले इस संस्थान ने अब तक अपनी रिसर्च के जरिए अरेबिका (Arabica) कॉफी की 15 और रोबस्टा (Robusta) की 3 किस्में जारी की हैं।

अधिकारियों के अनुसार, अब संस्थान अपने मौजूदा संसाधनों से आगे बढ़कर बाहरी विशेषज्ञों, अनुसंधान सुविधाओं और मैनपावर (कार्यबल) का लाभ उठाना चाहता है। इस साझेदारी से नई किस्मों की पहचान करने, उनका विकास करने और बीजों की बनावट समझने (जीनोटाइपिंग) जैसे कामों में तेजी आएगी। इसके अलावा, निदेशक ने बताया कि इस कदम से कॉफी उत्पादक क्षेत्रों में बिना अनुमति वाले पौधों के प्रवेश पर भी रोक लगाने में मदद मिलेगी।

नियमों के तहत होगी साझेदारी, 4 ने दिखाई रुचि
प्रस्तावित नियमों के अनुसार, इस साझेदारी में शामिल होने वाली सभी पार्टियों को 'सामग्री हस्तांतरण समझौते' (मटेरियल ट्रांसफर एग्रीमेंट), बौद्धिक संपदा (IP) और किसानों व उद्योग को होने वाले फायदों से जुड़े तय दिशा-निर्देशों का सख्ती से पालन करना होगा।

यह साझेदारी निजी अनुसंधान संगठनों, सरकारी संस्थानों, रिसर्च एंड डेवलपमेंट (R&D) करने वाली कंपनियों और अनुभवी व्यक्तिगत शोधकर्ताओं के लिए खुली रहेगी। संस्थान को अब तक इस दिशा में 4 आवेदन (एक्सप्रेशन ऑफ इंटरेस्ट) मिल चुके हैं।

बीमारियों से लड़ने वाली नई किस्में और मौजूदा काम
वर्तमान में, कॉफी बोर्ड 'जैन इरिगेशन सिस्टम्स' के साथ मिलकर चुनिंदा कॉफी किस्मों के 'टिश्यू-कल्चर' वाले पौधों का उत्पादन बड़े पैमाने पर बढ़ाने का काम भी कर रहा है।

आपको बता दें कि पिछले साल दिसंबर में सीसीआरआई ने अरेबिका कॉफी की दो नई, अधिक उपज देने वाली किस्में जारी की थीं। ये नई किस्में 'व्हाइट स्टेम बोरर' (सफेद तना छेदक कीट) और 'लीफ रस्ट' (पत्ती पर लगने वाला रोग) जैसी बीमारियों से सुरक्षित रहने में सक्षम हैं।


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