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Home› Khabar Junction› 84 38 Million Tonnes Of Foodgrains In Fci Warehouses Nearly Three Times The Prescribed Buffer Limit Subsidy

FCI के गोदामों में 84.38 मिलियन टन अनाज : तय बफर सीमा से करीब तीन गुना, बढ़ सकता है सब्सिडी का बोझ...

गांव जंक्शन डेस्क, पटना Published by: Devesh Saraswat Updated Thu, 15 Oct 2026 11:04 AM IST
सार

  • एफसीआई के पास 84.38 मिलियन टन अनाज, तय बफर स्टॉक सीमा से करीब तीन गुना ज्यादा।
  • 2026-27 में खाद्य सब्सिडी खर्च 2.47 लाख करोड़ रुपये से अधिक होने का अनुमान।
  • गेहूं और चावल की बढ़ती आर्थिक लागत से सरकारी खर्च पर दबाव बढ़ने की आशंका।
  • प्रधानमंत्री गरीब कल्याण अन्न योजना के तहत 81 करोड़ लोगों को हर महीने 5 किलो मुफ्त अनाज दिया जा रहा है।
  • अनाज के भारी भंडार और रखरखाव की लागत के बीच एफसीआई को अतिरिक्त धन की जरूरत पड़ सकती है।

भारतीय खाद्य निगम के बंपर अनाज भंडारण से खाद्य सब्सिडी का बोझ बढ़ सकता है।
भारतीय खाद्य निगम के बंपर अनाज भंडारण से खाद्य सब्सिडी का बोझ बढ़ सकता है। - फोटो : AI Image
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विस्तार
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भारतीय खाद्य निगम के पास इस समय 84.38 मिलियन टन अनाज का भारी भंडार है, जो 1 अक्टूबर के लिए तय 30.77 मिलियन टन की बफर स्टॉक (सुरक्षित भंडार) सीमा से लगभग तीन गुना ज्यादा है। इस बचे हुए अनाज को सुरक्षित रखने के बढ़ते खर्चों की वजह से 2026-27 में केंद्र सरकार का खाद्य सब्सिडी खर्च तय बजट से काफी ऊपर जा सकता है।

खाद्य सब्सिडी में उछाल के आसार
जानकारों के अनुसार, 2026-27 के लिए सरकार ने खाद्य सब्सिडी के लिए 2.27 लाख करोड़ रुपये का बजट रखा था (इसमें एफसीआई और विकेंद्रीकृत खरीद प्रणाली वाले राज्यों का हिस्सा शामिल है)। लेकिन अगर अनाज का भंडार इसी तरह बढ़ता रहा, तो असल खर्च 2.47 लाख करोड़ रुपये को पार कर सकता है।

खाद्य सब्सिडी का बड़ा हिस्सा जारी
वित्त मंत्रालय ने एफसीआई के लिए तय 1.52 लाख करोड़ रुपये के खाद्य सब्सिडी बजट में से 83,000 करोड़ रुपये जारी कर दिए हैं। इसके अलावा, अस्थायी काम-काज के लिए 50,000 करोड़ रुपये का एडवांस भी दिया गया है। सूत्रों के मुताबिक, यह एडवांस साल के अंत तक एफसीआई के हिस्से में एडजस्ट कर लिया जाएगा, जिसके बाद बढ़ते खर्चों को पूरा करने के लिए वित्त मंत्रालय को और अतिरिक्त पैसा देना पड़ेगा।

बता दें कि वित्त वर्ष 2025-26 में कुल खाद्य सब्सिडी खर्च 2.27 लाख करोड़ रुपये था, जिसमें से 1.69 लाख करोड़ रुपये एफसीआई के माध्यम से खर्च किए गए थे। वित्त मंत्रालय पिछले कुछ सालों से समय पर पैसा जारी कर रहा है, ताकि एफसीआई को ज्यादा लोन न लेना पड़े। सालाना खाद्य सब्सिडी बजट का 70% से ज्यादा हिस्सा एफसीआई के जरिए ही जाता है।

गोदामों में कितना है अनाज और क्या है लागत?
वर्तमान में एफसीआई के पास 84.38 मिलियन टन अनाज है, जिसमें 38.1 मिलियन टन चावल और 46.1 मिलियन टन गेहूं शामिल है। इस आंकड़े में अभी मिल मालिकों से मिलने वाला 19 मिलियन टन चावल शामिल नहीं है।

न्यूनतम समर्थन मूल्य (MSP), रखरखाव और अन्य खर्चों में बढ़ोतरी के कारण, एफसीआई के लिए अनाज की आर्थिक लागत बढ़ने का अनुमान है। सरकार के आंकड़ों के अनुसार, वित्त वर्ष 2025-26 में चावल की लागत 42.11 रुपये प्रति किलो और गेहूं की 29.68 रुपये प्रति किलो थी, जो 2026-27 में बढ़कर क्रमशः 43.91 रुपये प्रति किलो और 31.45 रुपये प्रति किलो हो जाने का अनुमान है।

मुफ्त राशन योजना के तहत अनाज का वितरण
सब्सिडी का एक बड़ा हिस्सा प्रधानमंत्री गरीब कल्याण अन्न योजना के तहत 80 करोड़ से ज्यादा लोगों को मुफ्त अनाज देने और सुरक्षित भंडार बनाए रखने पर खर्च होता है। इस योजना के तहत 81 करोड़ लोगों को हर महीने 5 किलो अनाज बिल्कुल मुफ्त दिया जा रहा है।

सरकारी जानकारी के अनुसार, इस योजना को 2028 के अंत तक के लिए बढ़ा दिया गया है, जिस पर सरकारी खजाने से 11.8 लाख करोड़ रुपये का खर्च आने का अनुमान है। मुफ्त राशन योजना के लिए एफसीआई हर साल 36-38 मिलियन टन चावल और 18-20 मिलियन टन गेहूं बांटता है। वहीं, पिछले कई सालों से सरकार हर साल 80-85 मिलियन टन अनाज की खरीद कर रही है, जिसकी वजह से गोदामों में अनाज का भारी स्टॉक जमा हो रहा है।

एफसीआई का लोन और कर्ज
पैसे की कमी को पूरा करने के लिए एफसीआई किसी भी समय 90 दिनों के लिए 1 लाख करोड़ रुपये तक का छोटे समय का लोन (शॉर्ट-टर्म लोन) ले सकता है। इस पर बैंक सालाना 5.55% से 7.4% तक ब्याज लेते हैं। इसके अलावा, एफसीआई ने अब तक 36,700 करोड़ रुपये के बॉन्ड भी जारी किए हैं, जिनका भुगतान 2028 से 2031 के बीच किया जाना है।


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